नई दिल्ली,12 सितंबर (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के बीच शनिवार को नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय बैठक हुई। अनवर इब्राहिम 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत की यात्रा पर हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात में भारत और मलेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान रक्षा, व्यापार, डिजिटल तकनीक, सेमीकंडक्टर, बुनियादी ढाँचे और ऊर्जा समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत पहुँचने पर मलेशियाई प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में साझेदार देश के तौर पर मलेशिया की भागीदारी की सराहना की। दोनों नेताओं ने फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री मोदी की मलेशिया यात्रा के दौरान लिए गए फैसलों और उसके परिणामों की भी समीक्षा की। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति पर चर्चा हुई और आगे सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया।
बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और गति देने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके साथ ही रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने,सेमीकंडक्टर क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने और बुनियादी ढाँचे के विकास में सहयोग के नए अवसर तलाशने पर भी चर्चा हुई। तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया को देखते हुए डिजिटल अर्थव्यवस्था और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में भारत-मलेशिया सहयोग को विस्तार देने की संभावनाओं पर भी दोनों नेताओं ने विचार साझा किए।
ऊर्जा और वित्तीय तकनीक यानी फिनटेक के क्षेत्र में सहयोग भी बातचीत के प्रमुख विषयों में रहा। दोनों देशों के बीच शिक्षा, पर्यटन और लोगों के बीच आपसी संपर्क को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। भारत और मलेशिया के बीच लंबे समय से मजबूत सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध रहे हैं। ऐसे में दोनों सरकारें इन संबंधों को और व्यापक बनाने के लिए लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी जोर दे रही हैं।
द्विपक्षीय बैठक के दौरान मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने कोटा किनाबालु, सबाह में भारत का वाणिज्य दूतावास खोलने के लिए मलेशिया की सहमति की जानकारी दी। यह कदम दोनों देशों के बीच राजनयिक और लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे सबाह और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले भारतीय समुदाय तथा भारत आने-जाने वाले लोगों को कांसुलर सेवाएँ अधिक आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आसियान-भारत संबंधों को मजबूत करने में मलेशिया की ओर से मिल रहे निरंतर समर्थन की भी सराहना की। मलेशिया दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र में भारत का महत्वपूर्ण साझेदार है और आसियान के साथ भारत के संबंधों को आगे बढ़ाने में उसकी भूमिका अहम रही है। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर आपसी हित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
बैठक के अंत में दोनों नेताओं ने भारत-मलेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों पक्षों के बीच हाल के वर्षों में आर्थिक,रक्षा, तकनीकी और कूटनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। ऐसे में इस बैठक को द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम शुक्रवार को नई दिल्ली पहुँचे थे। हवाई अड्डे पर विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। भारत यात्रा के दौरान मलेशियाई प्रधानमंत्री केरल भी जाएँगे,जहाँ उनकी भारत के ग्रैंड मुफ्ती से मुलाकात प्रस्तावित है। उनकी यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेना है, जिसकी मेजबानी भारत 2026 में समूह के अध्यक्ष के रूप में कर रहा है।
नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य और साझेदार देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं। वर्तमान में ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। वहीं बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम साझेदार देशों के रूप में समूह से जुड़े हैं।
ब्रिक्स सम्मेलन भारत के लिए वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर प्रमुख देशों के साथ संवाद बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है। मलेशिया की साझेदार देश के रूप में भागीदारी और मोदी-अनवर इब्राहिम की द्विपक्षीय बैठक से भारत तथा मलेशिया के संबंधों को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है। रक्षा और सुरक्षा से लेकर डिजिटल अर्थव्यवस्था, सेमीकंडक्टर, व्यापार और निवेश तक सहयोग का विस्तार दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को आने वाले समय में और मजबूत कर सकता है।
