अदन,12 सितंबर (युआईटीवी)- यमन में हूती विद्रोहियों ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के भीतर स्थित मायून द्वीप पर कब्जा कर लिया है। शुक्रवार तड़के हुई इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों को लेकर चिंता बढ़ गई है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार,हूती लड़ाके कई नावों के जरिए मायून द्वीप पहुँचे और वहाँ तैनात सरकारी सैनिकों के पीछे हटने के बाद बिना किसी बड़े सैन्य प्रतिरोध के द्वीप पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। इसके बाद हूतियों ने द्वीप और उसके आसपास के तटीय क्षेत्र में बख्तरबंद वाहनों तथा अन्य सैन्य उपकरणों की तैनाती भी शुरू कर दी।
मायून द्वीप, जिसे पेरिम के नाम से भी जाना जाता है,बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के बीच स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह संकरे जलमार्ग को दो अलग-अलग समुद्री चैनलों में विभाजित करता है। यही वजह है कि द्वीप पर नियंत्रण को केवल यमन के भीतर चल रहे संघर्ष से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है,बल्कि इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री परिवहन पर भी पड़ सकता है। बाब अल-मंदब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और इसके जरिए यूरोप,एशिया तथा मध्य पूर्व के बीच बड़ी मात्रा में व्यापारिक और ऊर्जा आपूर्ति होती है।
सरकारी अधिकारी के मुताबिक,हूती विद्रोही शुक्रवार सुबह कई नावों से मायून द्वीप पहुँचे। उस समय वहाँ मौजूद सरकारी सैनिक पीछे हट चुके थे, जिसके चलते हूतियों को द्वीप पर कब्जा करने में किसी खास सैन्य प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ा। द्वीप पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद उन्होंने वहाँ सैन्य संसाधनों की मौजूदगी बढ़ाई। इससे आशंका पैदा हुई है कि हूती अब इस रणनीतिक स्थान का इस्तेमाल लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच आने-जाने वाले समुद्री मार्गों पर निगरानी और दबाव बढ़ाने के लिए कर सकते हैं।
मायून द्वीप पर कब्जे से पहले हूती विद्रोहियों ने यमन के पश्चिमी तट पर अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी थीं। गुरुवार को उन्होंने लाल सागर के महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मोचा पर भी नियंत्रण हासिल किया। बताया गया है कि भीषण लड़ाई के बाद हूती लड़ाकों ने मोचा के रणनीतिक बंदरगाह,हवाई अड्डे और कई प्रमुख सरकारी सुविधाओं पर कब्जा कर लिया। इसके बाद सरकारी सैनिक दक्षिण दिशा की ओर पीछे हटे। इसी दौरान हूतियों ने बाब अल-मंदब के नजदीक स्थित धुबाब जिले में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा दी।
पिछले सप्ताह बड़े सैन्य हमले की शुरुआत के बाद से हूती विद्रोहियों ने यमन के पश्चिमी तटीय इलाकों में तेजी से अपनी स्थिति मजबूत की है। पश्चिमी तट का यह क्षेत्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे लाल सागर और बाब अल-मंदब के समुद्री मार्ग से जुड़ा हुआ है। मोचा और मायून जैसे रणनीतिक स्थानों पर नियंत्रण से हूतियों की सैन्य और भौगोलिक स्थिति पहले की तुलना में काफी मजबूत हो सकती है।
बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य की अहमियत केवल यमन और आसपास के देशों तक सीमित नहीं है। यह दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार गलियारों में शामिल है। लाल सागर और स्वेज नहर के रास्ते यूरोप तक पहुँचने वाले जहाजों के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर, यह अदन की खाड़ी और आगे अरब सागर से भी जुड़ा है। इस समुद्री रास्ते से बड़ी मात्रा में माल और ऊर्जा संसाधनों का परिवहन होता है। इसलिए यहाँ किसी भी तरह की अस्थिरता का असर अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग,ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार की लागत पर पड़ सकता है।
यमन में तेजी से बदलते घटनाक्रम पर संयुक्त राष्ट्र भी चिंता जता चुका है। यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रंडबर्ग ने गुरुवार को चेतावनी दी कि देश में फिर से तेज होती लड़ाई यमन को एक बड़े और अब तक अनसुलझे क्षेत्रीय टकराव में खींच सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि इसका असर केवल यमन तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि इसके वैश्विक परिणाम भी सामने आ सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को दी गई जानकारी में ग्रंडबर्ग ने कहा कि पिछले 24 घंटों के दौरान यमन में कई मोर्चों पर संघर्ष तेज हुआ है। खासकर देश के रणनीतिक पश्चिमी तट पर स्थिति तेजी से बदल रही है। उन्होंने बताया कि हूती विद्रोहियों ने मोखा सहित कई स्थानों पर बड़ा हमला किया है। उनके मुताबिक,मोखा पर नियंत्रण हासिल करने के बाद हूतियों की दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य में से एक के रास्तों के नजदीक सीधी मौजूदगी हो गई है। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र में लड़ाई जारी है और हालात अभी लगातार बदल रहे हैं।
ग्रंडबर्ग ने समुद्री आवाजाही को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बाब अल-मंदब के आसपास हूतियों की बढ़ती मौजूदगी से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बीच नौवहन की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएँ पैदा हो रही हैं। इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पहले से ही क्षेत्रीय तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। ऐसे में मायून द्वीप और उसके आसपास हूतियों की सैन्य मौजूदगी बढ़ने से यह चिंता और गहरा सकती है।
यमन में जारी संघर्ष का एक लंबा इतिहास है और हूती विद्रोही देश के बड़े हिस्से में प्रभाव रखते हैं। पिछले कुछ समय में क्षेत्रीय तनाव और समुद्री मार्गों से जुड़े घटनाक्रमों ने यमन के संघर्ष को और जटिल बना दिया है। पश्चिमी तट पर हूतियों की हालिया सैन्य बढ़त ऐसे समय में हुई है,जब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय यमन में स्थायी राजनीतिक समाधान और संघर्षविराम की कोशिशों पर जोर देता रहा है।
मायून द्वीप पर कब्जे के बाद अब सबसे बड़ी चिंता यह है कि हूती इस रणनीतिक स्थिति का आगे किस तरह इस्तेमाल करते हैं। द्वीप की भौगोलिक स्थिति उन्हें बाब अल-मंदब के दोनों समुद्री चैनलों के करीब रखती है। यदि यहाँ सैन्य गतिविधियाँ बढ़ती हैं या समुद्री यातायात प्रभावित होता है,तो इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल यमन के पश्चिमी तट पर सैन्य स्थिति तेजी से बदल रही है और कई इलाकों में संघर्ष जारी है। मोचा और मायून जैसे रणनीतिक स्थानों पर हूतियों की बढ़त ने लाल सागर और बाब अल-मंदब क्षेत्र में तनाव को एक नया आयाम दे दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकारी बल और उनके सहयोगी हूतियों की इस बढ़त का किस तरह जवाब देते हैं और क्या अंतर्राष्ट्रीय समुदाय महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई अतिरिक्त कदम उठाता है। फिलहाल मायून द्वीप पर हूतियों का कब्जा यमन के संघर्ष के साथ-साथ वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए भी एक गंभीर घटनाक्रम बनकर उभरा है।
