सना,18 सितंबर (युआईटीवी)- यमन में हूती आंदोलन और सऊदी अरब के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। मक्का के पास ड्रोन भेजे जाने के सऊदी अरब के आरोपों को हूती नेता अब्दुल-मलिक अल-हूती ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठा बताते हुए कहा कि हूती बलों ने मक्का को निशाना बनाने की कोई कोशिश नहीं की। उनके मुताबिक,इस तरह के आरोपों का इस्तेमाल यमन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
अब्दुल-मलिक अल-हूती ने गुरुवार को दिए अपने संबोधन में कहा कि मक्का पर हमले की कोशिश से जुड़ा दावा वास्तविकता से परे है। उन्होंने सऊदी अरब पर आरोप लगाया कि वह हूती नियंत्रित इलाकों के खिलाफ दबाव बढ़ाने के लिए इस घटना को एक बड़े सुरक्षा मुद्दे के तौर पर पेश कर रहा है। हूती नेतृत्व का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में इस तरह के आरोप क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकते हैं और यमन में जारी राजनीतिक प्रक्रिया को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
यह विवाद उस समय सामने आया है जब सऊदी अरब ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को नष्ट कर दिया। सऊदी पक्ष के अनुसार, ड्रोन को प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही रोक दिया गया। इस घटना के बाद सऊदी अधिकारियों ने पवित्र स्थलों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया और कहा कि मक्का तथा मदीना की सुरक्षा के मामले में किसी भी खतरे को गंभीरता से लिया जाएगा।
सऊदी अरब की ओर से यह भी कहा गया कि मक्का की दिशा में ड्रोन भेजे जाने की यह पहली कथित घटना नहीं है। इससे पहले जुलाई 2017 में भी एक बैलिस्टिक मिसाइल को मक्का की ओर दागे जाने का दावा किया गया था। उस समय भी सऊदी अरब ने इसे पवित्र शहर की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया था। हालाँकि,मौजूदा घटना में हूती नेतृत्व ने स्पष्ट रूप से किसी भी तरह के मक्का-लक्षित अभियान से इनकार किया है।
अब्दुल-मलिक अल-हूती ने अपने संबोधन में सऊदी अरब की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कुछ समय से सैन्य गतिविधियों में अपेक्षाकृत कमी के बावजूद राजनीतिक समाधान की दिशा में ठोस प्रगति नहीं हुई। इसके विपरीत,उनके अनुसार हूती नियंत्रण वाले क्षेत्रों पर कई तरह के प्रतिबंधों और दबाव को बनाए रखा गया है। इनमें हवाई संपर्क, हवाई अड्डों के संचालन और आवश्यक वस्तुओं के आयात से जुड़े प्रतिबंध भी शामिल हैं।
हूती नेता ने अपने समर्थकों से शुक्रवार को यमन के अलग-अलग हिस्सों में बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने की अपील भी की। उन्होंने इन प्रदर्शनों का उद्देश्य सऊदी अरब की ओर से लगाए गए आरोपों के खिलाफ आवाज उठाना बताया। हूती नेतृत्व का कहना है कि उसके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों का जवाब राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर दिया जाना जरूरी है।
मक्का से जुड़ा यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है,जब यमन के युद्ध की स्थिति में एक बार फिर बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल के दिनों में हूती लड़ाकों ने लाल सागर के तटीय इलाकों और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के आसपास अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाई हैं। इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि बाब अल-मंदब लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला प्रमुख समुद्री मार्ग है। यहां होने वाली किसी भी सैन्य गतिविधि का असर केवल यमन और सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहता,बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री यातायात पर भी पड़ सकता है।
हूती पक्ष का आरोप है कि उसकी गतिविधियों के जवाब में सऊदी लड़ाकू विमानों ने यमन के विभिन्न इलाकों में हवाई हमले तेज किए हैं। दूसरी ओर,सऊदी अरब हूती गतिविधियों को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताता रहा है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप लंबे समय से जारी हैं और कई घटनाओं के बारे में उनके दावे एक-दूसरे से पूरी तरह अलग रहे हैं।
यमन में मौजूदा संघर्ष की जड़ें वर्ष 2014 के अंत की घटनाओं से जुड़ी हैं। उस दौरान हूती आंदोलन ने राजधानी सना पर नियंत्रण स्थापित कर लिया और देश के उत्तरी तथा पश्चिमी हिस्सों में उसका प्रभाव तेजी से बढ़ा। इसके बाद यमन की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और हूती बलों के बीच संघर्ष तेज हो गया। मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व में गठबंधन ने यमन की सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया। इसके बाद संघर्ष ने व्यापक क्षेत्रीय रूप ले लिया।
समय के साथ यमन का संघर्ष केवल घरेलू राजनीतिक सत्ता की लड़ाई तक सीमित नहीं रहा। इसमें क्षेत्रीय शक्तियों के हित, समुद्री सुरक्षा, मिसाइल और ड्रोन हमले तथा ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए। हूती बलों की सैन्य क्षमताओं में वृद्धि के साथ सऊदी अरब और अन्य क्षेत्रीय देशों के लिए सुरक्षा चिंताएँ बढ़ीं। वहीं हूती नेतृत्व लगातार यह दावा करता रहा है कि वह यमन पर बाहरी हस्तक्षेप और सैन्य दबाव के खिलाफ संघर्ष कर रहा है।
मक्का को लेकर सामने आया ताजा विवाद इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि यह इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। सऊदी अरब हर साल बड़ी संख्या में आने वाले तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को लेकर विशेष सुरक्षा व्यवस्था करता है। ऐसे में मक्का की दिशा में किसी ड्रोन या मिसाइल के पहुँचने की खबर से स्वाभाविक रूप से सुरक्षा संबंधी चिंताएँ पैदा होती हैं। सऊदी अधिकारियों ने भी इसी संवेदनशीलता को देखते हुए पवित्र स्थलों की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बताया है।
हालाँकि,हूती नेता का कहना है कि मक्का को निशाना बनाने का आरोप वास्तविक घटना को गलत तरीके से पेश करने की कोशिश है। उनका दावा है कि हूती बलों की कार्रवाई को लेकर अलग-अलग घटनाओं को जोड़कर सऊदी अरब अपने सैन्य अभियानों के लिए राजनीतिक आधार मजबूत करना चाहता है। दूसरी ओर,सऊदी पक्ष का कहना है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने जिस ड्रोन को रोका,वह प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ रहा था।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ी चिंता यह है कि यमन में सैन्य तनाव दोबारा बढ़ने से क्षेत्र में पहले से मौजूद अस्थिरता और गहरी हो सकती है। लाल सागर और बाब अल-मंदब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के आसपास सैन्य गतिविधियाँ बढ़ने का असर व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों और सैन्य ठिकानों को लेकर सुरक्षा चिंताएँ भी बढ़ सकती हैं।
फिलहाल मक्का को निशाना बनाए जाने के आरोप और हूती नेतृत्व के इनकार के बीच दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। घटना को लेकर सऊदी अरब ने सुरक्षा खतरे की बात कही है, जबकि अब्दुल-मलिक अल-हूती ने इसे झूठा आरोप बताया है। ऐसे में इस विवाद ने यमन संघर्ष में राजनीतिक समाधान की संभावनाओं,क्षेत्रीय सुरक्षा और पवित्र स्थलों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएँ पैदा कर दी हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पक्षों के बीच सैन्य तनाव कम करने और राजनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।
