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विदेशी मुद्रा भंडार 780.78 अरब डॉलर पर स्थिर,मजबूत भंडार से अर्थव्यवस्था को मिला सहारा

मुंबई,19 सितंबर (युआईटीवी)- भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में हाल के सप्ताहों में तेज बढ़ोतरी के बाद अब स्थिरता देखने को मिली है। 11 सितंबर को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 780.78 अरब डॉलर पर रहा। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी आँकड़ों के मुताबिक,इससे पिछले सप्ताह यानी 4 सितंबर को विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 785.71 अरब डॉलर के स्तर पर पहुँच गया था। उस सप्ताह भंडार में करीब 44.90 अरब डॉलर की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई थी। हालाँकि,इसके बाद इसमें मामूली कमी आई है,लेकिन कुल भंडार अब भी बेहद मजबूत स्थिति में बना हुआ है।

विदेशी मुद्रा भंडार में हालिया उतार-चढ़ाव को देखा जाए तो 28 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भी इसमें उल्लेखनीय वृद्धि हुई थी। उस दौरान देश का भंडार 11.47 अरब डॉलर बढ़कर 740.80 अरब डॉलर हो गया था। इसके बाद 4 सितंबर वाले सप्ताह में इसमें एक साथ लगभग 44.90 अरब डॉलर की वृद्धि हुई और यह अब तक के रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच गया। 11 सितंबर को समाप्त सप्ताह में भंडार 780.78 अरब डॉलर रहा। इसका मतलब है कि रिकॉर्ड ऊंचाई से इसमें कुछ कमी आई,लेकिन यह अभी भी 780 अरब डॉलर से ऊपर बना हुआ है।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ा योगदान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का होता है। 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का स्तर 648.17 अरब डॉलर दर्ज किया गया था। इस दौरान इसमें 47.498 अरब डॉलर की जबरदस्त वृद्धि हुई थी। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में विदेशी मुद्राओं में रखी गई परिसंपत्तियाँ शामिल होती हैं और इनके स्तर में होने वाला बदलाव देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार को सीधे प्रभावित करता है।

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का मौजूदा स्तर भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। 4 सितंबर तक विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ मार्च के अंत की तुलना में 95.886 अरब डॉलर अधिक थीं। वहीं एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में इनमें 63.692 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी। इससे संकेत मिलता है कि बीते महीनों के दौरान देश की विदेशी मुद्रा स्थिति में उल्लेखनीय मजबूती आई है।

विदेशी मुद्रा भंडार का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा भारत का स्वर्ण भंडार है। 4 सितंबर तक देश का स्वर्ण भंडार 113.816 अरब डॉलर रहा। सप्ताह के दौरान इसमें कुछ उतार-चढ़ाव जरूर दर्ज किया गया,लेकिन लंबी अवधि के आधार पर इसमें मजबूत वृद्धि हुई है। एक साल पहले की तुलना में भारत का स्वर्ण भंडार 23.517 अरब डॉलर अधिक था। हालाँकि,मार्च के अंत के स्तर से इसकी तुलना करने पर इसमें 1.580 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई। इसके बावजूद कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की महत्वपूर्ण भूमिका बनी हुई है।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ रखी गई विशेष आहरण अधिकार यानी एसडीआर होल्डिंग भी शामिल होती है। 4 सितंबर तक देश की एसडीआर होल्डिंग 18.806 अरब डॉलर रही। यह मार्च के अंत की तुलना में 184 मिलियन डॉलर अधिक थी। वहीं एक साल पहले की तुलना में इसमें 64 मिलियन डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई। एसडीआर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की एक अंतर्राष्ट्रीय आरक्षित परिसंपत्ति है,जिसका उपयोग सदस्य देशों की आधिकारिक विदेशी मुद्रा जरूरतों के संदर्भ में किया जाता है।

इसी तरह अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ भारत की रिजर्व पोजीशन भी विदेशी मुद्रा भंडार का एक हिस्सा है। 4 सितंबर तक यह 4.916 अरब डॉलर रही। मार्च के अंत की तुलना में इसमें 108 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई थी,जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले यह 168 मिलियन डॉलर अधिक थी। इस तरह विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों,स्वर्ण भंडार,एसडीआर और आईएमएफ के साथ रिजर्व पोजीशन को मिलाकर भारत की कुल बाहरी वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है।

आँकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर तक भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार मार्च के अंत की तुलना में 94.599 अरब डॉलर बढ़ चुका था। वहीं पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में इसमें 87.438 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई। इस बढ़ोतरी से देश के पास अंतर्राष्ट्रीय भुगतान और बाहरी वित्तीय दबावों से निपटने के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच मौजूद है।

विदेशी मुद्रा भंडार का ऊँचा स्तर किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण होता है। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों, कच्चे तेल की कीमतों,मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से जुड़े जोखिमों के बीच पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार देश को बाहरी झटकों का सामना करने में मदद करता है। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए यह स्थिति विशेष रूप से अहम है,क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा और अन्य आवश्यक वस्तुओं के भुगतान के लिए विदेशी मुद्रा की जरूरत होती है।

हाल के आँकड़े यह भी बताते हैं कि रिकॉर्ड स्तर तक पहुँचने के बाद विदेशी मुद्रा भंडार में कुछ उतार-चढ़ाव के बावजूद इसकी समग्र स्थिति मजबूत बनी हुई है। 11 सितंबर को समाप्त सप्ताह में 780.78 अरब डॉलर का भंडार भारत को वैश्विक वित्तीय बाजारों में आने वाले बदलावों के बीच पर्याप्त बाहरी सुरक्षा प्रदान करता है। आने वाले समय में विदेशी मुद्रा प्रवाह,वैश्विक बाजार की परिस्थितियों और मुद्रा विनिमय दरों में बदलाव के आधार पर भंडार के स्तर में उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है। फिलहाल देश का विदेशी मुद्रा भंडार एक मजबूत वित्तीय आधार के रूप में बना हुआ है।