मुंबई,19 सितंबर (युआईटीवी)- आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में पुलिस ने दुर्घटनावश हुई मौत की रिपोर्ट यानी एडीआर दर्ज की है। शुक्रवार शाम पवई स्थित आईआईटी परिसर में छात्र मृत पाया गया था। घटना के बाद पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है और फिलहाल किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक,मृत छात्र के परिवार को घटना की जानकारी दे दी गई है और शनिवार सुबह परिवार के सदस्य मुंबई के पवई पुलिस थाने पहुँचे,जहाँ उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज होने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला लिया जाएगा। जाँच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि घटना के लिए किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी बनती है या नहीं और यदि बनती है,तो किन धाराओं के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि परिसर में मौजूद अन्य छात्रों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए छात्रों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
मृत छात्र की पहचान साहिल वाकोडे के रूप में हुई है। वह ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग में द्वितीय वर्ष में पढ़ाई कर रहा था और महाराष्ट्र के यवतमाल का रहने वाला था। घटना के बाद उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिवार के बयानों समेत जाँच से जुड़े अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय करेगी। फिलहाल पुलिस की ओर से किसी व्यक्ति पर आरोप नहीं लगाया गया है।
यह मामला परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल से जुड़ा बताया जा रहा है। संस्थान के अनुसार,वाकोडे को परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पाया गया था और उसने सवाल का जवाब तलाशने के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया था। घटना के बाद परीक्षा प्रशिक्षक और संबंधित विभाग के प्रमुख ने छात्र से इस विषय पर बातचीत की थी। संस्थान का कहना है कि इस बातचीत का उद्देश्य छात्र को स्थिति समझाना था।
आईआईटी बॉम्बे की ओर से बताया गया कि छात्र के खिलाफ घटना के बाद कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। संस्थान के अनुसार,बातचीत के दौरान छात्र को समझाया गया और उसे यह भरोसा दिलाया गया कि परीक्षा से जुड़ी इस घटना का उसके शैक्षणिक या पेशेवर भविष्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। बातचीत समाप्त होने के बाद वाकोडे अपने छात्रावास के कमरे में लौट गया था। बाद में उसी शाम वह अपने कमरे में मृत पाया गया।
हालाँकि,छात्र की मौत के बाद आईआईटी बॉम्बे परिसर में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया। प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने प्रशासन से घटना से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की माँग की। कुछ छात्रों ने दावा किया कि परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर वाकोडे पर एक वर्ष के निलंबन की कार्रवाई किए जाने की बात कही गई थी। प्रदर्शनकारियों के अनुसार,इस तरह की कार्रवाई होने पर छात्र को छात्रावास खाली कर परिसर के बाहर रहने के लिए मजबूर होना पड़ सकता था।
वहीं,संस्थान के आधिकारिक पक्ष में कहा गया है कि वाकोडे के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी और उसे उसके करियर पर किसी नकारात्मक प्रभाव की आशंका न रखने के लिए आश्वस्त किया गया था। इस तरह घटना को लेकर छात्रों के दावों और संस्थान के बयान में अंतर सामने आया है। पुलिस अब इसी सहित मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जाँच कर रही है। किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले सभी पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की जाँच की जा रही है।
छात्र की मौत के बाद कैंपस में सुरक्षा और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे हैं। छात्रों की ओर से यह माँग की गई है कि घटना से जुड़े घटनाक्रम को स्पष्ट किया जाए और यह बताया जाए कि परीक्षा के दौरान सामने आई घटना के बाद छात्र के साथ किस तरह की बातचीत हुई थी। दूसरी ओर,पुलिस की जाँच का दायरा केवल परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम तक सीमित नहीं है,बल्कि वह परिवार और परिसर में मौजूद छात्रों से मिली जानकारी के आधार पर पूरे मामले की परिस्थितियों को समझने का प्रयास कर रही है।
फिलहाल पुलिस ने इसे एडीआर के रूप में दर्ज किया है और किसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। परिवार के बयान, छात्रों की गवाही, संस्थान से प्राप्त जानकारी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट जाँच के महत्वपूर्ण हिस्से होंगे। इन सभी तथ्यों के सामने आने के बाद ही पुलिस यह तय करेगी कि मामले में आगे किसी तरह की कानूनी कार्रवाई आवश्यक है या नहीं।
साहिल वाकोडे की मौत ने आईआईटी बॉम्बे परिसर में परीक्षा व्यवस्था,अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं और छात्रों के साथ संवाद से जुड़े सवालों को भी सामने ला दिया है। हालाँकि, घटना के कारणों को लेकर अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पुलिस की जाँच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा और इसके लिए किसी की कानूनी जिम्मेदारी बनती है या नहीं।
