मुंबई में निर्मला सीतारमण से मिले जेमी डिमोन (तस्वीर क्रेडिट@Agni_Yatra)

मुंबई में निर्मला सीतारमण से मिले जेमी डिमोन,भारत के निवेश अवसरों और आर्थिक संभावनाओं पर हुई चर्चा

मुंबई,22 सितंबर (युआईटीवी)- केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को मुंबई में आयोजित जेपीमॉर्गन इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस के 11वें संस्करण के दौरान जेपीमॉर्गन चेस एंड कंपनी के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेमी डिमोन से मुलाकात की। दोनों के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब वैश्विक निवेशकों की नजर भारत की आर्थिक वृद्धि, घरेलू माँग,पूँजी बाजार और निवेश के बदलते अवसरों पर बनी हुई है। दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन 21 और 22 सितंबर को मुंबई में किया जा रहा है,जिसमें वैश्विक निवेशकों, कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों, नीति निर्माताओं और अन्य विशेषज्ञों की भागीदारी हो रही है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार,जेमी डिमोन ने सम्मेलन से इतर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बातचीत की। हालाँकि,दोनों के बीच हुई चर्चा के विस्तृत बिंदुओं को सार्वजनिक नहीं किया गया है। वित्त मंत्री ने सम्मेलन को संबोधित करने के साथ-साथ जेपीमॉर्गन के एशिया इकोनॉमिक्स प्रमुख सज्जिद चिनॉय के साथ विशेष संवाद सत्र में भी हिस्सा लिया। इस दौरान भारत की आर्थिक स्थिति,निवेश परिदृश्य और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया मंच पर मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए बताया कि जेमी डिमोन ने मुंबई में आयोजित जेपीमॉर्गन इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे बातचीत की। उन्होंने सम्मेलन में मौजूद निवेशकों और प्रतिनिधियों को संबोधित करने के अलावा सज्जिद चिनॉय के साथ विशेष संवाद में हिस्सा लेने की जानकारी भी दी। जेपीमॉर्गन के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार,इस सम्मेलन में भारत की विकास संभावनाओं और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर निवेशकों और उद्योग जगत के नेताओं के बीच संवाद हो रहा है।

जेमी डिमोन की भारत यात्रा ऐसे समय में हुई है,जब जेपीमॉर्गन भारत को वैश्विक निवेश के महत्वपूर्ण बाजारों में से एक के रूप में देख रहा है। सम्मेलन में एक हजार से अधिक वैश्विक निवेशकों,कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों,नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। सम्मेलन का उद्देश्य भारत की अर्थव्यवस्था की संभावनाओं, कंपनियों के प्रदर्शन, निवेश के अवसरों और वैश्विक बाजार में भारत की भूमिका पर चर्चा करना है।

वित्त मंत्री और जेमी डिमोन की मुलाकात की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि भारत में वैश्विक वित्तीय संस्थानों की दिलचस्पी लगातार बनी हुई है। भारतीय कंपनियों का वैश्विक विस्तार,देश में विनिर्माण गतिविधियों का विस्तार,प्रौद्योगिकी और नवाचार से जुड़े अवसर तथा वित्तीय सेवाओं का बढ़ता बाजार विदेशी वित्तीय संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुके हैं। जेपीमॉर्गन भी भारत में निवेश बैंकिंग और भुगतान समाधान समेत विभिन्न क्षेत्रों में अपनी टीमों और सेवाओं का विस्तार कर रहा है।

हाल के वर्षों में भारत के पूँजी बाजार में घरेलू निवेशकों की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण हुई है। जेपीमॉर्गन की हालिया बाजार रिपोर्ट में कहा गया है कि कर सुधारों और नियामकीय बदलावों ने भारतीय शेयर बाजार को घरेलू निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक बनाया है। रिपोर्ट में दीर्घकालिक पूँजीगत लाभ,डेट म्यूचुअल फंड और कुछ बीमा उत्पादों से जुड़े कर ढाँचे में हुए बदलावों का उल्लेख किया गया है। इन बदलावों ने अलग-अलग वित्तीय साधनों की तुलना में शेयरों के प्रति निवेशकों की रुचि को प्रभावित किया है।

रिपोर्ट में व्यवस्थित निवेश योजना यानी एसआईपी के माध्यम से निवेश में बढ़ोतरी को भी महत्वपूर्ण कारक बताया गया है। एसआईपी के जरिए बड़ी संख्या में निवेशक नियमित रूप से म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों में पैसा लगा रहे हैं। इससे घरेलू बचत का एक हिस्सा पारंपरिक साधनों से आगे बढ़कर वित्तीय बाजारों की ओर स्थानांतरित हो रहा है। जेपीमॉर्गन के आकलन के मुताबिक,यह बदलाव भारतीय निवेश व्यवहार में एक व्यापक और दीर्घकालिक परिवर्तन की ओर संकेत करता है।

घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी का असर शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की गतिविधियों के बीच भी देखा गया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव के दौरान घरेलू संस्थागत तथा खुदरा निवेशकों की खरीदारी ने बाजार में पूँजी का प्रवाह बनाए रखने में भूमिका निभाई है। जेपीमॉर्गन के अनुसार,घरेलू निवेशक अब भारतीय बाजार के लिए स्थिरता प्रदान करने वाली एक महत्वपूर्ण ताकत के रूप में उभरे हैं। खास बात यह है कि बेंचमार्क सूचकांकों से सीमित रिटर्न मिलने वाले दौर में भी खुदरा निवेशकों की भागीदारी मजबूत बनी रही है।

जेपीमॉर्गन की हालिया बाजार समीक्षा में भी भारतीय बाजार की घरेलू माँग और कंपनियों के आय प्रदर्शन पर ध्यान दिया गया है। बैंक के अनुसार,वैश्विक स्तर पर अनिश्चित परिस्थितियों के बावजूद भारत में घरेलू माँग ने अर्थव्यवस्था को समर्थन दिया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाल के महीनों में विदेशी निवेशकों की गतिविधियों में बदलाव देखने को मिला है,जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक लगातार बाजार में खरीदारी करते रहे हैं।

इस पृष्ठभूमि में मुंबई में आयोजित निवेशक सम्मेलन भारत की आर्थिक संभावनाओं को लेकर वैश्विक पूँजी के नजरिए को समझने के लिए महत्वपूर्ण मंच बनकर सामने आया है। सम्मेलन में निवेशकों और कंपनियों के प्रतिनिधियों के बीच भारत में पूँजी निवेश, आर्थिक वृद्धि और विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों में अवसरों पर चर्चा हो रही है। भारत के बड़े बाजार, बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था, घरेलू उपभोग और विनिर्माण क्षमता को वैश्विक कंपनियाँ अपने निवेश निर्णयों में महत्वपूर्ण कारकों के रूप में देख रही हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहले भी वैश्विक निवेशकों से भारत में विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और नवाचार केंद्र स्थापित करने का आह्वान कर चुकी हैं। सरकार की ओर से भारत को केवल एक बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में नहीं,बल्कि वैश्विक स्तर पर उत्पाद और सेवाएँ विकसित करने के केंद्र के रूप में पेश किया जा रहा है। ऐसे में वैश्विक वित्तीय संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वित्त मंत्री की बातचीत भारत में निवेश और आर्थिक सहयोग के व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

भारत के पूँजी बाजार में घरेलू निवेशकों की बढ़ती हिस्सेदारी के साथ-साथ वैश्विक पूँजी की भूमिका भी बनी हुई है। विदेशी निवेशक भारतीय कंपनियों की आय वृद्धि, ब्याज दरों, तेल की कीमतों,वैश्विक व्यापार परिस्थितियों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम जैसे विभिन्न कारकों को ध्यान में रखते हैं। वहीं घरेलू निवेशकों की नियमित भागीदारी बाजार में लंबी अवधि की पूँजी उपलब्ध कराने में मदद करती है। इस बदलाव ने भारतीय शेयर बाजार की संरचना में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन किया है।

जेमी डिमोन और निर्मला सीतारमण की मुलाकात ऐसे समय में हुई है,जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई स्तरों पर बदलाव के दौर से गुजर रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव के कारण निवेश के नए अवसर और जोखिम दोनों सामने आए हैं। भारत की अर्थव्यवस्था इन वैश्विक बदलावों के बीच अपनी भूमिका को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

मुंबई में हुई यह बैठक इसी व्यापक आर्थिक और निवेश परिदृश्य का हिस्सा है। सम्मेलन के माध्यम से वैश्विक निवेशकों और भारतीय नीति निर्माताओं के बीच संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर मिला है। वहीं,वित्त मंत्री और जेपीमॉर्गन के शीर्ष अधिकारी की मुलाकात ने भारत की आर्थिक संभावनाओं, घरेलू निवेश की बढ़ती भूमिका और वैश्विक पूँजी के लिए देश में मौजूद अवसरों पर चर्चा को और महत्वपूर्ण बना दिया है।