उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण पर दक्षिण कोरिया,अमेरिका और जापान की फिर बनी सहमति (तस्वीर क्रेडिट@TheKoreaHerald)

उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण पर दक्षिण कोरिया,अमेरिका और जापान की फिर बनी सहमति,प्योंगयांग से बातचीत की अपील

वाशिंगटन/सोल,22 सितंबर (युआईटीवी)- दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान ने उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को लेकर अपनी साझा रणनीति को दोहराते हुए प्योंगयांग से बातचीत की मेज पर लौटने का आह्वान किया है। तीनों देशों ने कहा है कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए कूटनीतिक बातचीत का रास्ता खुला हुआ है। साथ ही उन्होंने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है। तीनों देशों के शीर्ष राजनयिकों की यह बैठक ऐसे समय में हुई है,जब उत्तर कोरिया लगातार अपने सैन्य और हथियार कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के संकेत दे रहा है।

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने 21 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह से इतर त्रिपक्षीय बैठक की। बैठक में उत्तर कोरिया की परमाणु एवं मिसाइल गतिविधियों के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, ताइवान जलडमरूमध्य की स्थिति, आर्थिक सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा और उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। जापान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, जुलाई में हुई दो बैठकों के बाद यह तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की इस वर्ष की अगली महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय बैठक थी।

बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में तीनों देशों ने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों के अनुरूप उत्तर कोरिया के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों के लिए आय जुटाने में किसी भी तरह के समर्थन को रोकने की बात कही। तीनों देशों ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतिबंधों को लागू करने और उत्तर कोरिया की उन गतिविधियों पर नजर रखने की दिशा में उनका समन्वय जारी रहेगा,जिनसे उसके हथियार कार्यक्रमों को आर्थिक सहायता मिल सकती है।

संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि बातचीत का रास्ता बंद नहीं हुआ है और उत्तर कोरिया को संवाद की प्रक्रिया में वापस आना चाहिए। तीनों देशों ने कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखने की बात कही। यह संदेश ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर कोरिया की ओर से लगातार अपनी सैन्य क्षमताओं के विस्तार के संकेत मिल रहे हैं और अमेरिका तथा उसके सहयोगियों के साथ उसकी बातचीत लंबे समय से ठहरी हुई है।

बैठक से ठीक पहले उत्तर कोरिया ने एक नए हथियार तंत्र के परीक्षण की जानकारी दी थी। उत्तर कोरियाई सरकारी मीडिया के अनुसार,रविवार को नेता किम जोंग-उन की मौजूदगी में नए हथियार का परीक्षण किया गया। प्योंगयांग ने इस हथियार की पूरी तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की,लेकिन इसे अपनी सैन्य तकनीक को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में पेश किया। इसी दौरान दक्षिण कोरियाई सेना के अनुसार उत्तर कोरिया ने पूर्वी तट से समुद्र की ओर दो कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें भी दागीं।

उत्तर कोरिया की इन गतिविधियों के बीच न्यूयॉर्क में हुई त्रिपक्षीय बैठक को क्षेत्रीय सुरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तीनों देशों ने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों के अलावा साइबर गतिविधियों पर भी सहयोग बढ़ाने की बात कही। उनका कहना है कि उत्तर कोरिया से जुड़े साइबर खतरों और उसके सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों की गतिविधियों पर विभिन्न देशों की ओर से जारी चेतावनियों का समन्वय जरूरी है। तीनों देशों ने जून में हुई त्रिपक्षीय कार्य समूह की बैठक के दौरान साइबर खतरों से निपटने में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया।

उत्तर कोरिया पर लगाए गए संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों के पालन और उनसे बचने की कोशिशों की निगरानी करने वाले बहुपक्षीय प्रतिबंध निगरानी दल के काम का भी तीनों विदेश मंत्रियों ने स्वागत किया। उनका जोर इस बात पर रहा कि उत्तर कोरिया की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं के विस्तार के लिए आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जानी चाहिए। साथ ही साइबर गतिविधियों के जरिए होने वाली अवैध आय को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर भी सहमति बनी। जापान के विदेश मंत्रालय ने भी बैठक के बाद उत्तर कोरिया के साइबर अपराधों और उसके परमाणु तथा मिसाइल कार्यक्रमों के बीच संबंधों को लेकर सहयोग जारी रखने की पुष्टि की।

बैठक में अमेरिका ने दक्षिण कोरिया और जापान की सुरक्षा के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई। संयुक्त बयान के अनुसार, अमेरिका ने दोनों सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए अपनी सैन्य और परमाणु क्षमताओं पर आधारित प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। यह संदेश ऐसे समय में आया है,जब उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षणों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर दक्षिण कोरिया और जापान की सुरक्षा चिंताएँ लगातार बनी हुई हैं। तीनों देशों ने सुरक्षा सहयोग, संयुक्त अभ्यास और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में चल रहे समन्वय को आगे बढ़ाने की बात कही।

उत्तर कोरिया के साथ बातचीत को लेकर अमेरिका की नीति में भी कूटनीतिक रास्ते को खुला रखने पर जोर दिखाई देता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के साथ दोबारा मुलाकात की इच्छा व्यक्त की है। ऐसे में न्यूयॉर्क में हुई बैठक में बातचीत की अपील को अमेरिका की व्यापक कूटनीतिक कोशिशों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालाँकि,प्योंगयांग की ओर से अभी तक बातचीत की दिशा में कोई स्पष्ट सकारात्मक कदम सामने नहीं आया है। उत्तर कोरिया लंबे समय से अपनी परमाणु क्षमता को अपनी सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताता रहा है और अमेरिका की सैन्य गतिविधियों को लेकर भी आपत्ति जताता रहा है।

तीनों विदेश मंत्रियों ने ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने ताइवान से जुड़े मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया और किसी भी पक्ष द्वारा बल या दबाव के जरिए यथास्थिति को एकतरफा बदलने के प्रयासों का विरोध किया। बैठक के दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता तथा निर्बाध और वैध व्यापार को बनाए रखने के महत्व पर भी चर्चा हुई। तीनों देशों ने इन गतिविधियों को अंतर्राष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के अनुरूप बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

ताइवान जलडमरूमध्य का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच उच्चस्तरीय वार्ता प्रस्तावित है। ऐसे समय में दक्षिण कोरिया,अमेरिका और जापान का ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता पर जोर देना हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उनकी साझा सुरक्षा चिंताओं को दर्शाता है। तीनों देशों ने क्षेत्रीय परिस्थितियों में किसी भी एकतरफा बदलाव के खिलाफ समन्वय बनाए रखने की बात कही है।

बैठक में आर्थिक सुरक्षा को भी सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया। तीनों देशों ने आर्थिक दबाव,गैर-बाजार आधारित नीतियों और ऐसी गतिविधियों का विरोध करने की बात कही,जिनसे वैश्विक बाजार में असंतुलन पैदा हो सकता है या महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित हो सकती हैं। उन्होंने महत्वपूर्ण वस्तुओं और तकनीकों से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित बनाने तथा स्वतंत्र और पारदर्शी व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई।

इस दिशा में तीनों देशों ने त्रिपक्षीय आपूर्ति श्रृंखला प्रारंभिक चेतावनी व्यवस्था को मजबूत करने और आर्थिक सुरक्षा पर नई त्रिपक्षीय बातचीत शुरू करने का स्वागत किया। इसका उद्देश्य संभावित आपूर्ति बाधाओं,रणनीतिक वस्तुओं की कमी और वैश्विक बाजार में अचानक पैदा होने वाले जोखिमों को लेकर पहले से समन्वय स्थापित करना है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और अन्य रणनीतिक वस्तुओं की आपूर्ति को लेकर देशों की निर्भरता बढ़ी है। ऐसे में आर्थिक सुरक्षा को विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।

ऊर्जा सुरक्षा भी बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल रही। तीनों देशों ने क्षेत्रीय स्तर पर ऊर्जा सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता जताई। इसके तहत तेल भंडार को मजबूत करने तथा तेल उत्पादक और उपभोक्ता देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की बात कही गई। ऊर्जा बाजार में अस्थिरता या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में रणनीतिक भंडार और अंतर्राष्ट्रीय समन्वय को महत्वपूर्ण माना गया।

परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी तीनों देशों ने सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। विदेश मंत्रियों ने सात जुलाई को हुए त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन को लागू करने की योजना पर आगे बढ़ने की बात कही। इस समझौते का उद्देश्य छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों की तैनाती में तेजी लाना है। तीनों देशों ने स्पष्ट किया कि इस दिशा में सहयोग परमाणु सुरक्षा,सुरक्षा मानकों और परमाणु अप्रसार से जुड़े उच्चतम मानकों के अनुरूप होना चाहिए। छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों को भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए एक उभरती तकनीक के रूप में देखा जा रहा है और तीनों देश इसके विकास तथा तैनाती में अपनी तकनीकी और औद्योगिक क्षमताओं के बीच तालमेल बढ़ाना चाहते हैं।

इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, डिजिटल बुनियादी ढाँचे और जैव प्रौद्योगिकी जैसी उभरती तकनीकों पर भी चर्चा हुई। तीनों देशों ने इन क्षेत्रों में अनुसंधान, विकास और सुरक्षा से जुड़े सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता जताई। वैश्विक स्तर पर इन तकनीकों का आर्थिक और रणनीतिक महत्व बढ़ने के साथ इनके सुरक्षित इस्तेमाल,महत्वपूर्ण डिजिटल ढाँचे की सुरक्षा और तकनीकी आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

दक्षिण कोरिया,अमेरिका और जापान के विदेश मंत्रियों ने पूर्वोत्तर एशिया के अलावा पश्चिम एशिया और दुनिया के अन्य हिस्सों में चल रहे घटनाक्रम पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने बदलती अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों और बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच आपसी संपर्क तथा समन्वय को मजबूत करने पर सहमति जताई। तीनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय संवाद को क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर साझा रुख तैयार करने के एक माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।

यह बैठक जुलाई में हुई दो त्रिपक्षीय बैठकों के बाद हुई। इससे पहले सात जुलाई को तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान और 22 जुलाई को फिलीपींस में आसियान से जुड़े क्षेत्रीय मंच के दौरान तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी। लगातार हो रही इन बैठकों से यह संकेत मिलता है कि दक्षिण कोरिया,अमेरिका और जापान सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक और तकनीकी मुद्दों पर भी अपने समन्वय को संस्थागत रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। जापान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, तीनों देशों ने सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्रों में सहयोग में हुई प्रगति का स्वागत किया।

हालाँकि,उत्तर कोरिया के साथ संवाद बहाल करना अभी भी एक चुनौतीपूर्ण विषय बना हुआ है। एक तरफ अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान परमाणु निरस्त्रीकरण के अपने घोषित लक्ष्य को दोहरा रहे हैं, वहीं प्योंगयांग अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के संकेत दे रहा है। हालिया मिसाइल परीक्षण और नए हथियार तंत्र का परीक्षण इसी व्यापक सुरक्षा परिस्थिति का हिस्सा है। ऐसे में तीनों देशों के लिए एक साथ दो मोर्चों पर काम करना जरूरी हो गया है—एक ओर संभावित सुरक्षा खतरों के खिलाफ समन्वय और दूसरी ओर बातचीत तथा कूटनीति का रास्ता खुला रखना।

न्यूयॉर्क बैठक का संदेश इसी दोहरी रणनीति को दर्शाता है। दक्षिण कोरिया,अमेरिका और जापान ने उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण के लक्ष्य को दोहराने के साथ ही प्योंगयांग को बातचीत में लौटने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने प्रतिबंधों के क्रियान्वयन, साइबर गतिविधियों पर निगरानी और सुरक्षा सहयोग को जारी रखने की बात कही। इस तरह तीनों देशों ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए कूटनीति को अवसर दिया जाना चाहिए,लेकिन इसके साथ सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को भी बनाए रखा जाएगा।

आने वाले समय में उत्तर कोरिया इस संयुक्त अपील पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है,यह क्षेत्रीय कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल तीनों देशों के बीच बातचीत और समन्वय जारी रखने पर सहमति है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है,जब कोरियाई प्रायद्वीप,ताइवान जलडमरूमध्य और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़े व्यापक रणनीतिक मुद्दों के रूप में सामने आ रही है। ऐसे में दक्षिण कोरिया,अमेरिका और जापान के बीच नियमित संवाद आने वाले महीनों में क्षेत्रीय सुरक्षा,आर्थिक सहयोग और कूटनीतिक प्रयासों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।