वाशिंगटन,23 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ग्रीनलैंड को लेकर एक बड़े रणनीतिक समझौते की घोषणा की। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड में दो बड़े सैन्य अड्डे बनाएगा और इस समझौते के तहत उसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आर्कटिक द्वीप की सुरक्षा से जुड़े मामलों में स्थायी नियंत्रण प्राप्त होगा। उन्होंने इस समझौते को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि इससे अमेरिका को उत्तरी अमेरिका और यूरोप की सुरक्षा के लिए अपनी सैन्य क्षमता का विस्तार करने का व्यापक अधिकार मिलेगा।
ट्रंप के अनुसार,यह समझौता डेनमार्क साम्राज्य और ग्रीनलैंड की जनता के साथ बातचीत के बाद तैयार हुआ है। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से अमेरिका को ग्रीनलैंड की सुरक्षा और उससे जुड़ी अन्य आवश्यकताओं के संबंध में व्यापक अधिकार हासिल होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य उपस्थिति को काफी बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। उन्होंने बताया कि द्वीप पर उपयुक्त स्थानों की पहचान कर वहाँ दो बड़े सैन्य अड्डे स्थापित किए जाएँगे। ट्रंप ने कहा कि इन ठिकानों के निर्माण के जरिए अमेरिका को अपनी क्षेत्रीय रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी और उत्तरी अमेरिका तथा यूरोप की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सैन्य विकल्प उपलब्ध होंगे।
ट्रंप ने ग्रीनलैंड में दूसरे देशों की सैन्य और रणनीतिक गतिविधियों पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जिन देशों को अमेरिका अपने लिए विरोधी मानता है, उन्हें ग्रीनलैंड में सैन्य उपस्थिति स्थापित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, ऐसे देशों को अमेरिका की लिखित स्वीकृति के बिना संवेदनशील निवेश करने से भी रोका जाएगा। हालाँकि,अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन-किन देशों पर इस तरह के प्रतिबंध लागू होंगे।
अमेरिका लंबे समय से आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करता रहा है। बर्फीले क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों,समुद्री मार्गों की बढ़ती अहमियत और सैन्य गतिविधियों के विस्तार के कारण आर्कटिक को वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का विस्तार इस व्यापक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा से भी जुड़ा हुआ है।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की स्पष्ट लिखित अनुमति के बिना किसी भी अमेरिकी विरोधी को ग्रीनलैंड में सैन्य ठिकाना स्थापित करने या संवेदनशील निवेश करने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने इसे अमेरिका की क्षेत्रीय सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनके मुताबिक,नए समझौते से वाशिंगटन को ग्रीनलैंड के साथ सुरक्षा सहयोग को अधिक व्यवस्थित और स्थायी रूप देने में मदद मिलेगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि समझौते को लेकर हुई बातचीत ने अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच संबंधों को और करीब लाने में मदद की है। उन्होंने कहा कि समझौते पर मंगलवार को बाद में हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है। ट्रंप ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों तथा सरकारों के साथ आगे भी काम करने की इच्छा जताई।
ग्रीनलैंड भौगोलिक और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बीच स्थित है तथा आर्कटिक क्षेत्र में इसकी स्थिति इसे सैन्य और सुरक्षा संबंधी गतिविधियों के लिए अहम बनाती है। अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड का महत्व केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है,बल्कि उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक क्षेत्र में निगरानी तथा रक्षा क्षमता के विस्तार से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में वहाँ दो बड़े सैन्य अड्डे स्थापित करने की घोषणा अमेरिकी रणनीति में संभावित बड़े बदलाव का संकेत देती है।
ट्रंप ने अपने संबोधन में इस समझौते को नाटो की व्यापक सैन्य मजबूती से भी जोड़ा। उन्होंने नाटो महासचिव मार्क रुट्टे की प्रशंसा करते हुए गठबंधन के रक्षा खर्च को बढ़ाने की दिशा में उठाए गए कदमों का उल्लेख किया। ट्रंप ने कहा कि यूरोप और उत्तरी अमेरिका की सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सैन्य क्षमता में बढ़ोतरी आवश्यक है।
ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की घोषणा ऐसे समय हुई है,जब आर्कटिक क्षेत्र को लेकर वैश्विक शक्तियों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ संभावित बाहरी सैन्य गतिविधियों पर भी नजर रखना चाहता है। ट्रंप के अनुसार,नए समझौते के बाद अमेरिका को ग्रीनलैंड में अपनी सुरक्षा संबंधी गतिविधियों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने का अधिकार मिलेगा।
इस समझौते के लागू होने के बाद ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य ढाँचे का विस्तार क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। दो बड़े सैन्य अड्डों की स्थापना से अमेरिका की निगरानी,रक्षा और सैन्य तैनाती की क्षमता बढ़ने की संभावना है। वहीं,इस समझौते के तहत संवेदनशील निवेश और विदेशी सैन्य गतिविधियों पर प्रस्तावित प्रतिबंध ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट करते हैं।
ट्रंप ने अपने संबोधन में बार-बार इस बात पर जोर दिया कि ग्रीनलैंड में अमेरिकी उपस्थिति का विस्तार केवल अमेरिका की सुरक्षा के लिए नहीं,बल्कि यूरोप और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसे अमेरिका और उसके सहयोगियों की सामूहिक रक्षा क्षमता मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया। अब समझौते पर हस्ताक्षर और उसके बाद की प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि ग्रीनलैंड में प्रस्तावित सैन्य विस्तार किस तरह लागू किया जाता है और इसका आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर क्या असर पड़ता है।
