जयशंकर-तजानी की वार्ता में खाड़ी और आईएमईसी पर चर्चा (तस्वीर क्रेडिट@Antonio_Tajani)

भारत-इटली के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर,जयशंकर-तजानी की वार्ता में खाड़ी और आईएमईसी पर चर्चा

संयुक्त राष्ट्र,23 सितंबर (युआईटीवी)- भारत और इटली ने अपनी विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा व्यापार, रक्षा, सुरक्षा और महत्वपूर्ण तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। इटली के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने मंगलवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ मुलाकात के बाद कहा कि दोनों देश रणनीतिक साझेदारी के तहत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लगातार सहयोग बढ़ा रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में खाड़ी क्षेत्र की स्थिति,भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे और यूक्रेन संघर्ष समेत कई अहम अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।

मुलाकात के बाद एंटोनियो तजानी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि इटली और भारत विशेष रणनीतिक साझेदारी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश रक्षा और सुरक्षा से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष, महत्वपूर्ण तकनीकों और ऊर्जा तक सहयोग को लगातार व्यापक बना रहे हैं। तजानी ने इस दौरान समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व पर भी जोर दिया।

तजानी के मुताबिक,दोनों देशों के बीच इस बात को लेकर सहमति है कि नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है। सुरक्षित समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार,बेहतर संपर्क और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक हैं। भारत और इटली के बीच बढ़ते सहयोग के संदर्भ में समुद्री संपर्क को विशेष महत्व दिया जा रहा है,क्योंकि दोनों देश यूरोप और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के बीच व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी मुलाकात के बाद बताया कि उनकी बातचीत मुख्य रूप से खाड़ी क्षेत्र की स्थिति, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे और यूक्रेन संघर्ष पर केंद्रित रही। खाड़ी क्षेत्र में बदलते घटनाक्रम के बीच भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। वहीं, यूरोप के साथ संपर्क और व्यापार को बढ़ाने के लिहाज से भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा भी दोनों देशों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे की योजना वर्ष 2023 में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान सामने आई थी। इसका उद्देश्य भारत और यूरोप के बीच समुद्री और भूमि मार्गों के जरिए व्यापारिक संपर्क को मजबूत करना है। प्रस्तावित गलियारा भारत को मध्य पूर्व के विभिन्न हिस्सों से जोड़ते हुए यूरोप तक पहुँच बनाने में मदद करेगा। इस मार्ग में सऊदी अरब, जॉर्डन और इजरायल के जरिए ग्रीस और इटली तक संपर्क विकसित करने की परिकल्पना की गई है।

एंटोनियो तजानी ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे को एक रणनीतिक विकास बताते हुए कहा कि इससे दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है। उनके अनुसार, यह गलियारा यूरोप और भारत के बीच आर्थिक संपर्क को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि इटली इस परियोजना को भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखता है।

तजानी ने भारत के साथ व्यापार बढ़ाने की इटली की प्राथमिकता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत निर्यात कार्ययोजना के लिए एक प्रमुख देश है और दोनों देश वर्ष 2029 तक 20 अरब यूरो के व्यापारिक आदान-प्रदान के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मिलकर काम करना चाहते हैं। उन्होंने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा इस व्यापारिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए अतिरिक्त अवसर उपलब्ध करा सकता है।

भारत और इटली के बीच सहयोग का दायरा केवल व्यापार और संपर्क परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में भी संबंधों को मजबूत किया है। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष, ऊर्जा और महत्वपूर्ण तकनीकों जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। दोनों पक्षों के बीच बढ़ता सहयोग वैश्विक स्तर पर बदलते आर्थिक और रणनीतिक समीकरणों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसी दौरान युगांडा के विदेश मंत्री एडोनिया अयेबारे से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत और युगांडा के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। अयेबारे ने बताया कि उन्होंने भारत की मेजबानी में आयोजित वैश्विक दक्षिण के समान विचार वाले देशों और मित्र देशों की उच्चस्तरीय बैठक में हिस्सा लिया।

जयशंकर ने मुलाकात के बाद कहा कि दोनों पक्षों ने विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण, रक्षा प्रशिक्षण और कृषि के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। भारत और युगांडा के बीच विकास सहयोग लंबे समय से विभिन्न क्षेत्रों में जारी है और दोनों देश क्षमता निर्माण तथा प्रशिक्षण के जरिए द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

भारत की विदेश नीति में वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ संबंधों को मजबूत करना भी एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता रही है। युगांडा के साथ बातचीत इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा रही। विकास साझेदारी और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के साथ भारत अफ्रीकी देशों के साथ अपने संबंधों को और व्यापक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

एक ओर भारत और इटली के बीच बातचीत में व्यापार, समुद्री सुरक्षा और यूरोप के साथ संपर्क को मजबूत करने पर जोर दिया गया, वहीं दूसरी ओर युगांडा के साथ विकास और क्षमता निर्माण के मुद्दे प्रमुख रहे। इन बैठकों से स्पष्ट है कि भारत यूरोप और अफ्रीका दोनों क्षेत्रों के साथ आर्थिक, रणनीतिक और विकास संबंधी सहयोग को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।