नई दिल्ली,23 सितंबर (युआईटीवी)- भारत के घरेलू विमानन क्षेत्र में अगस्त के दौरान यात्री यातायात में सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई। नागर विमानन महानिदेशालय द्वारा बुधवार को जारी आँकड़ों के अनुसार, अगस्त में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या सालाना आधार पर 6.34 प्रतिशत घटकर करीब 1.21 करोड़ रह गई। इस दौरान कई प्रमुख एयरलाइनों की बाजार हिस्सेदारी में बदलाव देखने को मिला। परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही स्पाइसजेट की बाजार हिस्सेदारी जुलाई के 1.6 प्रतिशत से घटकर अगस्त में 1.2 प्रतिशत रह गई।
अगस्त में घरेलू विमानन बाजार में इंडिगो का दबदबा बरकरार रहा,हालाँकि उसकी बाजार हिस्सेदारी में मामूली कमी दर्ज की गई। जुलाई में 67.4 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी रखने वाली इंडिगो की हिस्सेदारी अगस्त में घटकर 65 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद एयरलाइन घरेलू विमानन बाजार में सबसे बड़ी हिस्सेदारी वाली कंपनी बनी रही। अगस्त में इंडिगो से 78.87 लाख यात्रियों ने हवाई यात्रा की।
दूसरी ओर,एयर इंडिया समूह की बाजार हिस्सेदारी में वृद्धि हुई। जुलाई में 24 प्रतिशत हिस्सेदारी के मुकाबले अगस्त में एयर इंडिया समूह की हिस्सेदारी बढ़कर 26.7 प्रतिशत हो गई। इस दौरान समूह की एयरलाइनों से करीब 32.32 लाख यात्रियों ने यात्रा की। बाजार हिस्सेदारी के लिहाज से एयर इंडिया समूह दूसरे स्थान पर रहा।
अकासा एयर ने अगस्त में 5.5 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ अपना तीसरा स्थान बनाए रखा। एयरलाइन से इस महीने करीब 6.68 लाख यात्रियों ने यात्रा की। जुलाई की तुलना में उसकी बाजार हिस्सेदारी में कोई बदलाव नहीं हुआ। इस तरह प्रमुख घरेलू एयरलाइनों के बीच अकासा एयर ने अपनी स्थिति स्थिर बनाए रखी।
स्पाइसजेट के लिए अगस्त का महीना चुनौतीपूर्ण रहा। एयरलाइन की बाजार हिस्सेदारी जुलाई के 1.6 प्रतिशत से घटकर अगस्त में 1.2 प्रतिशत हो गई। आँकड़ों के अनुसार, अगस्त में स्पाइसजेट से करीब 1.40 लाख यात्रियों ने यात्रा की। इस दौरान एयरलाइन को परिचालन संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ा,जिसके कारण उसकी कुछ उड़ानों में देरी हुई। परिचालन से जुड़ी इन चुनौतियों का असर एयरलाइन की यात्री संख्या और बाजार हिस्सेदारी पर भी दिखाई दिया।
यात्रियों की संख्या और बाजार हिस्सेदारी के अलावा अगस्त में एयरलाइनों के समय पर उड़ान संचालन के प्रदर्शन में भी अंतर देखने को मिला। नागर विमानन महानिदेशालय के आँकड़ों के मुताबिक,प्रमुख एयरलाइनों में इंडिगो का ऑन-टाइम परफॉरमेंस सबसे बेहतर रहा। अगस्त में इंडिगो की 91 प्रतिशत उड़ानें निर्धारित समय के आसपास संचालित हुईं। अकासा एयर 90.5 प्रतिशत ऑन-टाइम परफॉरमेंस के साथ दूसरे स्थान पर रही।
एयर इंडिया समूह का ऑन-टाइम परफॉरमेंस अगस्त में 83.9 प्रतिशत रहा और वह प्रमुख एयरलाइनों के बीच तीसरे स्थान पर रहा। वहीं,अलायंस एयर का ऑन-टाइम परफॉरमेंस 71.8 प्रतिशत दर्ज किया गया। उड़ानों का समय पर संचालन यात्रियों के अनुभव के साथ-साथ एयरलाइनों की परिचालन क्षमता का भी महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।
घरेलू हवाई यात्री यातायात में सालाना गिरावट के बीच विमानन क्षेत्र की परिचालन स्थिति पर भी नजर बनी हुई है। स्पाइसजेट की मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए विमानन नियामक की निगरानी बढ़ी है। इससे पहले नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को कहा था कि नागर विमानन महानिदेशालय स्पाइसजेट के वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन पर करीबी नजर रख रहा है।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार,नियामक को एयरलाइन की परिचालन और वित्तीय स्थिति दोनों की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एयरलाइन की मौजूदा चुनौतियों के बीच विमानन सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता न हो। नियामक की निगरानी में एयरलाइन के संचालन,विमानों की उपलब्धता और वित्तीय स्थिति जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
घरेलू विमानन बाजार में अगस्त के आंकड़े बताते हैं कि प्रमुख एयरलाइनों के बीच प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ परिचालन प्रदर्शन भी बाजार हिस्सेदारी को प्रभावित कर रहा है। इंडिगो की हिस्सेदारी में कमी के बावजूद वह सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन बनी हुई है। एयर इंडिया समूह की हिस्सेदारी में वृद्धि हुई है,जबकि अकासा एयर ने अपनी स्थिति बरकरार रखी है। वहीं,स्पाइसजेट की हिस्सेदारी में गिरावट उसके सामने मौजूद परिचालन चुनौतियों को दर्शाती है।
घरेलू हवाई यात्री यातायात में सालाना 6.34 प्रतिशत की गिरावट भी विमानन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। हालाँकि,अगस्त के आँकड़ों में अलग-अलग एयरलाइनों के प्रदर्शन में अंतर रहा। यात्री संख्या,बाजार हिस्सेदारी और समय पर उड़ानों के संचालन के आँकड़े बताते हैं कि विमानन कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा केवल यात्रियों की संख्या तक सीमित नहीं है,बल्कि नियमित और भरोसेमंद परिचालन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आने वाले समय में स्पाइसजेट की परिचालन और वित्तीय स्थिति पर नियामक की निगरानी महत्वपूर्ण होगी। वहीं,घरेलू बाजार में एयर इंडिया समूह अपनी बढ़ती हिस्सेदारी को बनाए रखने की कोशिश करेगा और इंडिगो अपनी मजबूत स्थिति बरकरार रखने पर ध्यान देगी। दूसरी ओर,अकासा एयर के लिए भी अपनी स्थिर बाजार हिस्सेदारी को आगे बढ़ाना एक महत्वपूर्ण लक्ष्य होगा। विमानन क्षेत्र के आगामी आँकड़ों से यह पता चलेगा कि अगस्त में दर्ज बदलाव अस्थायी रहे या आने वाले महीनों में घरेलू बाजार की प्रतिस्पर्धा की दिशा को प्रभावित करते हैं।
