डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

संयुक्त राष्ट्र में ट्रंप की ईरान को खुली धमकी,बोले- समझौता करो या पूरी तरह नष्ट कर दूँगा

संयुक्त राष्ट्र,23 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर तेहरान अमेरिका के साथ समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो उसके सामने गंभीर परिणाम होंगे। मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने ईरान के सामने बातचीत और सैन्य कार्रवाई के बीच विकल्प रखा। उन्होंने कहा कि ईरान चाहे तो ऐसा समझौता कर सकता है, जिससे उसे दोबारा खड़ा होने और एक समृद्ध देश बनने का अवसर मिलेगा, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है,तो अमेरिका आगे की सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है।

ट्रंप ने अपने भाषण में बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि उनके सामने यह बड़ा फैसला है कि ईरान के साथ ऐसा समझौता किया जाए जिससे वह पुनर्निर्माण कर सके या फिर इस्लामी गणराज्य को पूरी तरह नष्ट करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। ट्रंप के मुताबिक,वाशिंगटन ने तेहरान को समझौते का विकल्प दिया है,लेकिन ईरान की ओर से अब तक अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान के साथ समझौता हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि तेहरान अमेरिकी चुनाव के नतीजों का इंतजार कर रहा है। हालाँकि,ट्रंप ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि ईरान के साथ आगे की नीति तय करते समय मध्यावधि चुनाव उनके निर्णय का आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव तीन नवंबर को होने हैं।

ट्रंप ने अपने संबोधन में दूसरे देशों से भी ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब तक तेहरान वाणिज्यिक जहाजों पर हमले बंद नहीं करता,परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिशों को त्यागने की दिशा में कदम नहीं उठाता और आतंकवादी गतिविधियों के समर्थन से पीछे नहीं हटता,तब तक उसके खिलाफ आर्थिक अलगाव जारी रहना चाहिए। उन्होंने ईरान पर परमाणु मुद्दे पर बातचीत के लिए हुए संघर्षविराम का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया। ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की निंदा करने वाला प्रस्ताव पारित किए जाने का स्वागत किया।

अपने भाषण में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान ईरान की नौसेना,वायु सेना, रडार और वायु रक्षा प्रणालियों को भारी नुकसान पहुँचा है। उनके अनुसार,ईरान की मिसाइल और ड्रोन निर्माण क्षमता भी बड़े स्तर पर प्रभावित हुई है। ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर कई आंकड़े और दावे पेश किए,हालाँकि,ये उनके भाषण में किए गए अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे हैं।

ट्रंप ने ईरान की आर्थिक स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से ईरान की सैन्य और आर्थिक क्षमता को नुकसान पहुँचा है,लेकिन उनके मुताबिक वहाँ महँगाई अभी भी गंभीर समस्या बनी हुई है। ट्रंप ने ईरान में महंगाई के 300 प्रतिशत से अधिक होने का दावा किया। इस आँकड़े का उल्लेख उन्होंने अपने संबोधन में ईरान की मौजूदा आर्थिक स्थिति को रेखांकित करने के लिए किया।

होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा भी ट्रंप के भाषण में प्रमुखता से सामने आया। उन्होंने कहा कि संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिकी नौसेना ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से एक अरब बैरल से अधिक तेल की ढुलाई को एस्कॉर्ट किया है। उन्होंने दावा किया कि युद्ध शुरू होने के बाद अब इस जलमार्ग से पहले की तुलना में अधिक तेल गुजर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, इसलिए यहां किसी भी तरह का व्यवधान अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकता है। ट्रंप ने अपने भाषण में अमेरिकी नौसेना की भूमिका को भी इसी संदर्भ में रेखांकित किया।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने उन अटकलों को भी खारिज किया कि ईरान के साथ लंबे सैन्य संघर्ष के कारण अमेरिका के हथियारों और गोला-बारूद के भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के पास इस्तेमाल किए जा रहे हथियारों की तुलना में पर्याप्त मात्रा में अधिक गोला-बारूद मौजूद है और देश अपने सैन्य भंडार को पहले से कहीं अधिक तेज गति से दोबारा भर रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है,जब ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिकी सैन्य संसाधनों के इस्तेमाल और भविष्य की जरूरतों को लेकर चर्चा जारी है।

ट्रंप के संबोधन के दौरान ईरान का परमाणु कार्यक्रम और पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव मुख्य विषयों में रहा। उन्होंने एक ओर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना खुली रखी,वहीं दूसरी ओर बातचीत और समझौते का रास्ता भी बंद नहीं किया। बाद में ट्रंप ने बताया कि उनके प्रतिनिधियों और ईरानी अधिकारियों के बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान करीब तीन घंटे की बातचीत हुई। उन्होंने इस बैठक को सकारात्मक बताया और संकेत दिया कि कूटनीतिक रास्ते की संभावना अभी बनी हुई है।

ईरान की ओर से भी होर्मुज जलडमरूमध्य और बातचीत को लेकर संकेत सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार,एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि यदि अमेरिका उसकी कुछ मांगें स्वीकार करता है तो तेहरान कुछ दिनों में खाड़ी के समुद्री यातायात के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल सकता है। वहीं ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ने कहा कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे आत्मसमर्पण नहीं करेगा। इससे स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना मौजूद होने के बावजूद उनके रुख में महत्वपूर्ण अंतर बना हुआ है।

ट्रंप का यह संबोधन ऐसे समय हुआ है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में पश्चिम एशिया की स्थिति, ईरान के परमाणु कार्यक्रम, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चर्चा तेज है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने सैन्य दबाव और आर्थिक प्रतिबंधों को बातचीत के साथ जोड़ते हुए तेहरान को समझौते के लिए तैयार करने की रणनीति पर जोर दिया। दूसरी ओर, ईरान लगातार अमेरिकी मांगों और सैन्य दबाव का विरोध कर रहा है। ऐसे में आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष परमाणु कार्यक्रम, समुद्री सुरक्षा, आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय गतिविधियों जैसे मुद्दों पर किसी साझा समझौते तक पहुँच पाते हैं या नहीं।