मीराबाई चानू (तस्वीर क्रेडिट@BabusRathore_)

एशियन गेम्स 2026: मीराबाई चानू ने रचा इतिहास, 28 साल बाद एशियन गेम्स में भारत को वेटलिफ्टिंग का सिल्वर

नागोया,23 सितंबर (युआईटीवी)- एशियन गेम्स 2026 में भारत की स्टार महिला वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है। उन्होंने महिलाओं के 49 किलोग्राम भार वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर एशियन गेम्स में अपने पदक का इंतजार खत्म कर दिया। इसके साथ ही भारत का वेटलिफ्टिंग में 28 साल से चला आ रहा पदक का सूखा भी समाप्त हो गया। मीराबाई ने कुल 198 किलोग्राम वजन उठाकर दूसरा स्थान हासिल किया। उनके प्रदर्शन ने भारतीय वेटलिफ्टिंग में एक लंबे अंतराल के बाद फिर से एशियन गेम्स के मंच पर पदक की वापसी कराई है।

मीराबाई के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि एशियन गेम्स में पदक जीतने का उनका सपना लंबे समय से अधूरा था। वह इससे पहले तीन बार एशियन गेम्स में हिस्सा ले चुकी थीं, लेकिन पदक हासिल नहीं कर सकी थीं। वर्ष 2014 में हुए एशियन गेम्स में वह नौवें स्थान पर रही थीं। इसके बाद जकार्ता में आयोजित एशियन गेम्स में चोट के कारण वह प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले पाई थीं। हांगझोऊ एशियन गेम्स में उन्होंने 49 किलोग्राम वर्ग में जोरदार चुनौती पेश की,लेकिन 194 किलोग्राम के कुल प्रयास के साथ चौथे स्थान पर रहने के कारण पदक से मामूली अंतर से चूक गई थीं। ऐसे में इस बार उनके लिए पोडियम पर पहुँचना एक बड़ी उपलब्धि बन गया।

मीराबाई ने प्रतियोगिता की शुरुआत स्नैच राउंड में आत्मविश्वास के साथ की। अपने पहले प्रयास में उन्होंने 83 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद उन्होंने दूसरे प्रयास में 85 किलोग्राम का भार उठाकर अपना प्रदर्शन और बेहतर किया। तीसरे प्रयास में मीराबाई ने 87 किलोग्राम वजन उठाने में सफलता हासिल की। स्नैच में उनके लगातार सफल प्रयासों ने उन्हें पदक की दौड़ में मजबूत स्थिति में बनाए रखा।

इसके बाद क्लीन एंड जर्क राउंड में भी मीराबाई ने अपनी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने पहले प्रयास में 107 किलोग्राम वजन आसानी से उठाया। दूसरे प्रयास में उन्होंने अपने प्रदर्शन को और आगे बढ़ाते हुए 111 किलोग्राम का भार सफलतापूर्वक उठाया। स्नैच और क्लीन एंड जर्क में उनके सफल प्रयासों को मिलाकर उनका कुल स्कोर 198 किलोग्राम रहा। यह प्रदर्शन उन्हें सिल्वर मेडल दिलाने के लिए पर्याप्त साबित हुआ।

हालाँकि,मीराबाई का गोल्ड मेडल जीतने का सपना इस बार भी पूरा नहीं हो सका। उत्तर कोरिया की खिलाड़ी री सोंग-गम ने उनसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके बावजूद मीराबाई का सिल्वर भारतीय वेटलिफ्टिंग के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि लंबे समय के बाद एशियन गेम्स में भारत को इस खेल में पदक मिला है।

भारत को एशियन गेम्स में वेटलिफ्टिंग का पिछला पदक वर्ष 1998 में मिला था। उस समय दिग्गज वेटलिफ्टर कर्णम मल्लेश्वरी ने देश के लिए पदक जीता था। उसके बाद कई भारतीय वेटलिफ्टरों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया,लेकिन एशियन गेम्स में देश को पदक दिलाने में सफलता नहीं मिल सकी। करीब 28 वर्षों के इंतजार के बाद मीराबाई ने इस सिलसिले को खत्म कर दिया है।

मीराबाई चानू का अंतर्राष्ट्रीय करियर पहले से ही उपलब्धियों से भरा रहा है। वह ओलंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स और विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर भारत के लिए पदक जीत चुकी हैं। उनकी सफलता ने भारतीय महिला वेटलिफ्टिंग को नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भी उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। ऐसे में एशियन गेम्स का यह सिल्वर उनके पदकों के संग्रह में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में जुड़ गया है।

मीराबाई के लिए इस बार की चुनौती आसान नहीं थी। पिछले एशिया कप में वह पदक जीतने से चूक गई थीं और चौथे स्थान पर रही थीं। इसके बाद एशियन गेम्स में वापसी करते हुए उन्होंने दबाव के बीच जिस तरह अपने प्रयासों को अंजाम दिया,वह उनके अनुभव और तैयारी को दर्शाता है। स्नैच में तीनों प्रयास सफल करना और फिर क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम का भार उठाना उनके प्रदर्शन की मजबूती को दिखाता है।

मीराबाई की इस उपलब्धि से भारतीय वेटलिफ्टिंग को भी नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच पर 28 साल बाद पदक जीतना इस खेल के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मीराबाई ने न सिर्फ अपना पहला एशियन गेम्स पदक जीता,बल्कि उस इंतजार को भी समाप्त किया जो भारतीय वेटलिफ्टिंग के लिए लंबे समय से चला आ रहा था। स्वर्ण पदक भले ही उनके नाम नहीं रहा,लेकिन सिल्वर के साथ उन्होंने एशियन गेम्स में अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया।