नई दिल्ली,26 सितंबर (युआईटीवी)- कांग्रेस ने शुक्रवार को कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की माँग करते हुए विभिन्न राज्यों में मार्च निकाला और चुनाव आयोग के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई,जबकि कुछ जगहों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया।
कांग्रेस का कहना है कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक उसका आंदोलन जारी रहेगा। पार्टी ने पिछले कुछ समय से मतदाता सूचियों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अपने आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बनाया हुआ है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के कारण लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालाँकि,इन आरोपों पर चुनाव आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है और किसी भी दावे को अंतिम तथ्य के रूप में स्थापित करने के लिए आधिकारिक जांच और प्रमाण जरूरी हैं।
शुक्रवार को हुए प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट भी रही। रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर एसआईआर को लेकर कथित मतभेद होने का दावा किया गया था। इसके बाद कांग्रेस ने अपने आरोपों को और तेज करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। पार्टी नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में युवा कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग को लेकर मार्च निकाला। प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ नारे लगाए और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग की। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि पार्टी की माँग स्पष्ट है और मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मतदाताओं के वोटों को प्रभावित किया जाता है या मतदाता सूची में अनियमितता होती है,तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था के आधार पर असर पड़ता है।
देवेंद्र यादव ने यह भी कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान हुए चुनावों की समीक्षा की जानी चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि चुनावों से जुड़े मामलों में सामने आई शिकायतों की निष्पक्ष तरीके से जाँच होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त की गिरफ्तारी की माँग भी उठाई है।
महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा ने कहा कि कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पिछले कई महीनों से कथित ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस विषय को केवल एक दिन के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखना चाहती,बल्कि इसे लगातार उठाती रहेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग करने की अपील की।
अलका लांबा ने मुख्य चुनाव आयुक्त की गिरफ्तारी और उनके कथित गैरकानूनी फैसलों को वापस लेने की माँग भी रखी। कांग्रेस की ओर से इससे पहले 14 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट चोर गद्दी छोड़ो’ नाम से रैली आयोजित की गई थी। पार्टी नेताओं के अनुसार, मतदाता सूची से जुड़े आरोपों और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता के सवाल को लेकर उनका अभियान आगे भी जारी रहेगा।
चंडीगढ़ में भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगाए थे। इस दौरान पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए वहां वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया गया।
हिरासत में लिए जाने के दौरान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रही है। उन्होंने एसआईआर का विरोध करते हुए दावा किया कि पंजाब में 20 लाख वोट हटाए गए हैं। उनका कहना था कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को रद्द किया जाना चाहिए। उनके द्वारा लगाए गए इन आँकड़ों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित आधिकारिक आँकड़ों और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड को देखना आवश्यक होगा।
चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लक्की ने भी कहा कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद कांग्रेस का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक पार्टी विरोध प्रदर्शन करती रहेगी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तनाव की स्थिति भी बनी रही।
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने विरोध मार्च का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि पार्टी का आंदोलन कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ है और मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी द्वारा पहले उठाए गए मतदाता सूची से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए मतदाता सूची और चुनाव प्रबंधन से संबंधित सभी सवालों का पारदर्शी तरीके से जवाब दिया जाना चाहिए।
बिहार की राजधानी पटना में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया। प्रदर्शन का नेतृत्व बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सचिवालय के पास बैरिकेडिंग की थी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की,जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
प्रदर्शन के दौरान राजेश राम ने कहा कि कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना विरोध जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है। प्रदर्शन में पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव भी शामिल हुए। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि पश्चिम बंगाल,बिहार और असम में बड़ी संख्या में लोगों के साथ अन्याय हुआ है। हालाँकि,इन राजनीतिक दावों की पुष्टि के लिए आधिकारिक मतदाता आँकड़ों और संबंधित चुनावी रिकॉर्ड का परीक्षण जरूरी है।
देहरादून में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने कहा कि पार्टी देशभर में प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर सामने आई जानकारी का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आयोग की निष्पक्षता को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि चुनावी प्रक्रिया में लोगों का विश्वास बनाए रखना जरूरी है।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने राहुल गांधी के कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी को चुनावों में गड़बड़ियों को लेकर गंभीर आशंकाएँ हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी स्थिति बनी रहती है,तो इसका असर संवैधानिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।
असम में भी कांग्रेस का प्रदर्शन हुआ। गुवाहाटी में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई समेत पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए थे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की,जिसके बाद पुलिस ने गौरव गोगोई समेत कई लोगों को हिरासत में ले लिया।
देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए इन प्रदर्शनों के दौरान कांग्रेस नेताओं ने एक समान मुद्दा उठाया। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और गिरफ्तारी की माँग को अपने आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया है। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती,तब तक विरोध जारी रहेगा।
इस पूरे विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ‘वोट चोरी’ जैसे आरोप सीधे चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची की विश्वसनीयता से जुड़े हैं। इसलिए राजनीतिक आरोपों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने,हटाने या संशोधित करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत होती है और इस संबंध में चुनाव आयोग की ओर से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी ही किसी दावे की पुष्टि का आधार बन सकती है।
कांग्रेस के देशव्यापी प्रदर्शन ने एक बार फिर चुनाव आयोग की भूमिका,मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी पारदर्शिता को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। पार्टी ने अपने आरोपों की जाँच और जिम्मेदारी तय करने की माँग की है,जबकि इस विवाद में चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष और उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड महत्वपूर्ण रहेंगे। फिलहाल कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर अपना अभियान जारी रखेगी। विभिन्न राज्यों में हुए प्रदर्शनों और हिरासत की घटनाओं ने इस राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है।
