दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग (तस्वीर क्रेडिट@KoreansWithIL)

डीएमजेड में बारूदी सुरंग विस्फोट के बाद दक्षिण कोरिया में हलचल,राष्ट्रपति ली ने दिए पारदर्शी जाँच के आदेश

सोल,29 सितंबर (युआईटीवी)- दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच तनाव वाले डिमिलिटराइज्ड जोन यानी डीएमजेड में हुए बारूदी सुरंग विस्फोट को लेकर अब दक्षिण कोरिया ने विस्तृत और पारदर्शी जाँच का फैसला किया है। घटना में दक्षिण कोरियाई सेना के तीन जवान घायल हुए हैं। इनमें दो सैनिकों की स्थिति गंभीर बताई गई,जबकि तीसरे को मामूली चोट आई। मामले की गंभीरता को देखते हुए दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने सैन्य अधिकारियों को संयुक्त राष्ट्र कमान के साथ मिलकर घटना की पूरी सच्चाई सामने लाने के निर्देश दिए हैं।

राष्ट्रपति ली ने मंगलवार को चेओंग वा डे में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान कहा कि घटना की जाँच जल्द-से-जल्द पूरी की जानी चाहिए और उसके निष्कर्षों के आधार पर सरकार आवश्यक कदम उठाएगी। उन्होंने सैन्य अधिकारियों से संयुक्त राष्ट्र कमान के साथ सहयोग करते हुए घटनास्थल से जुड़े सभी तथ्यों की बारीकी से जांच करने को कहा। राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम जाँच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष को अंतिम सत्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

यह घटना ऐसे समय हुई है,जब कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य गतिविधियों और सीमा सुरक्षा को लेकर संवेदनशीलता बनी हुई है। 21 सितंबर को डीएमजेड के भीतर दक्षिण कोरियाई सेना और संयुक्त राष्ट्र कमान की एक संयुक्त टीम संभावित बारूदी सुरंगों की जाँच के लिए इलाके में रास्ता साफ करने का अभियान चला रही थी। इसी दौरान अचानक विस्फोट हो गया। घटना के बाद तीन दक्षिण कोरियाई सैनिक घायल हो गए और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े हो गए।

दक्षिण कोरियाई सेना ने सोमवार को अपनी प्रारंभिक जाँच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए थे। सेना के मुताबिक घटनास्थल से मिले सुरंगों के टुकड़ों और अन्य अवशेषों में टीएनटी तथा भूरे रंग की सिंथेटिक सामग्री के निशान मिले हैं। सेना ने कहा कि इन विशेषताओं का मिलान उत्तर कोरिया द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली एंटी-पर्सनल बारूदी सुरंगों से होता है। उपलब्ध सबूतों के आधार पर सेना ने कहा था कि इस बात की काफी संभावना है कि विस्फोट उत्तर कोरिया की ओर से बिछाई गई बारूदी सुरंगों के कारण हुआ हो।

हालाँकि, दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जाँच अभी अंतिम चरण तक नहीं पहुँची है। सेना और संयुक्त राष्ट्र कमान की ओर से घटनास्थल की संयुक्त जाँच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा। इसलिए फिलहाल विस्फोट के लिए उत्तर कोरिया को जिम्मेदार ठहराने वाली बात प्रारंभिक जाँच के आधार पर कही जा रही है और इसे अंतिम रूप से पुष्ट निष्कर्ष नहीं माना गया है।

सेना के मुताबिक विस्फोट वाला स्थान सैन्य सीमांकन रेखा से करीब 10 मीटर दक्षिण की ओर था। घटनास्थल पर कुल तीन बारूदी सुरंगें दबे होने की आशंका जताई गई है। इनमें से दो में विस्फोट हुआ,जबकि सैनिकों के पीछे हटते समय एक अन्य बिना फटी बारूदी सुरंग दिखाई देने की जानकारी मिली। इस घटनाक्रम ने यह चिंता बढ़ा दी है कि इलाके में अभी भी अन्य विस्फोटक उपकरण मौजूद हो सकते हैं और वहाँ किसी भी तरह का अभियान बेहद सावधानी से चलाने की जरूरत है।

विस्फोट में घायल तीनों सैनिकों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। दक्षिण कोरियाई सेना के अनुसार दो जवानों को गंभीर चोटें आईं, =जबकि तीसरे सैनिक को अपेक्षाकृत मामूली चोट लगी। राष्ट्रपति ली ने घायल सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की तथा उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटना से जुड़े तथ्यों की जाँच जिम्मेदारी के साथ की जानी चाहिए।

राष्ट्रपति ली ने घटना के बाद बिना आधार के साजिश संबंधी सिद्धांत फैलाने से भी लोगों को बचने की सलाह दी। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर तथ्य सामने आने से पहले अटकलों को बढ़ावा नहीं देने की अपील की। उनका कहना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों को राजनीतिक विभाजन का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए और इस तरह की परिस्थितियों में सत्ता पक्ष तथा विपक्ष को व्यापक राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए काम करना चाहिए।

दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री कांग शिन-चुल ने भी मामले पर सरकार का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि यदि अंतिम जाँच में यह पुष्टि होती है कि विस्फोट उत्तर कोरिया द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों के कारण हुआ,तो दक्षिण कोरिया की ओर से उचित जवाबी कदम उठाए जाएँगे। हालाँकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि किसी भी कार्रवाई का आधार अंतिम जाँच के निष्कर्ष होंगे। इसका मतलब है कि दक्षिण कोरिया फिलहाल जाँच पूरी होने का इंतजार कर रहा है और उसके बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।

डीएमजेड को दुनिया की सबसे संवेदनशील सैन्य सीमाओं में से एक माना जाता है। कोरियाई युद्ध के बाद स्थापित इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में सैन्य प्रतिष्ठान और सुरक्षा व्यवस्थाएँ मौजूद हैं। दोनों कोरियाई देशों के बीच सैन्य सीमांकन रेखा के आसपास किसी भी तरह की गतिविधि को अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। बारूदी सुरंगों की मौजूदगी इस इलाके में सैनिकों और वहाँ चलने वाले किसी भी अभियान के लिए बड़ा खतरा पैदा करती है।

दक्षिण कोरिया का आरोप रहा है कि उत्तर कोरिया ने हाल के समय में सैन्य सीमांकन रेखा के आसपास अतिरिक्त बारूदी सुरंगें बिछाई हैं। इन आरोपों की पुष्टि के लिए ही संबंधित इलाकों में जाँच और रास्ता साफ करने का अभियान चलाया जा रहा था। इसी अभियान के दौरान हुआ विस्फोट इस पूरे मुद्दे को और संवेदनशील बना गया है। अब संयुक्त राष्ट्र कमान के साथ होने वाली जाँच से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि विस्फोट में इस्तेमाल हुई बारूदी सुरंगों का स्रोत क्या था और उन्हें वहाँ कब तथा किसने रखा।

इस घटना के बीच राष्ट्रपति ली ने दक्षिण कोरिया की रक्षा क्षमता मजबूत करने पर भी जोर दिया है। कैबिनेट बैठक में उन्होंने उन्नत हथियार प्रणालियों पर आधारित आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था विकसित करने के प्रयास तेज करने का निर्देश दिया। उन्होंने विशेष रूप से परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों और हाइपरसोनिक मिसाइलों के निर्माण से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाने की बात कही। यह निर्देश ऐसे समय आया है,जब दक्षिण कोरिया अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए अत्याधुनिक सैन्य तकनीक और रणनीतिक क्षमताओं को विकसित करने पर जोर दे रहा है।

राष्ट्रपति ली के निर्देशों से यह भी संकेत मिलता है कि दक्षिण कोरिया सीमा पर सुरक्षा चुनौतियों के साथ-साथ अपनी दीर्घकालिक सैन्य क्षमता को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों को लंबे समय तक समुद्र में संचालन की क्षमता के कारण रणनीतिक महत्व दिया जाता है,जबकि हाइपरसोनिक मिसाइलों को तेज गति और उन्नत रक्षा प्रणालियों को चुनौती देने की क्षमता के कारण आधुनिक युद्ध प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

फिलहाल डीएमजेड में हुए विस्फोट की जाँच जारी है। दक्षिण कोरियाई सेना और संयुक्त राष्ट्र कमान घटनास्थल से मिले सुरंग के अवशेषों और अन्य सबूतों का अध्ययन कर रहे हैं। प्रारंभिक जाँच में उत्तर कोरिया की बारूदी सुरंगों की ओर संकेत जरूर किया गया है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष अभी सामने आना बाकी है। राष्ट्रपति ली ने भी स्पष्ट किया है कि सरकार जांच के नतीजों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा स्थिति और डीएमजेड की संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। दक्षिण कोरिया के लिए अब दोहरी चुनौती है—एक ओर घटना की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जाँच पूरी करना और दूसरी ओर सीमा क्षेत्र में अपने सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना। आने वाले दिनों में संयुक्त जाँच के निष्कर्ष इस मामले की दिशा तय करेंगे। यदि अंतिम जाँच में उत्तर कोरिया की भूमिका की पुष्टि होती है, तो दक्षिण कोरिया की ओर से संभावित जवाबी कदमों पर भी नजर रहेगी। फिलहाल सरकार ने संकेत दिया है कि वह किसी भी निर्णय को जाँच के ठोस निष्कर्षों से जोड़कर ही आगे बढ़ाएगी।