वाशिंगटन,10 अक्टूबर (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को लेकर बड़ा बयान दिया है। न्यूयॉर्क में एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ युद्ध अब अपने अंतिम चरण में पहुँच चुका है और यह बहुत जल्द समाप्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि संघर्ष का अंत या तो अमेरिकी सेना की निर्णायक कार्रवाई से होगा या फिर ईरान अमेरिकी शर्तों को स्वीकार करते हुए समझौते पर हस्ताक्षर करेगा। ट्रंप ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी भी परिस्थिति में ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा।
ट्रंप के इस बयान को मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव और संभावित कूटनीतिक समाधान के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालाँकि, संघर्ष जल्द समाप्त होने के उनके दावे की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। क्षेत्र में आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्षों के बीच सैन्य गतिविधियों और बातचीत को लेकर क्या निर्णय लिए जाते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के कारण ईरान को व्यापक नुकसान हुआ है। उनके मुताबिक,ईरान की नौसेना और वायुसेना की क्षमताओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के रडार और मिसाइलों को रोकने वाली रक्षा प्रणालियों को नष्ट कर दिया गया है,जिससे उसकी सैन्य ताकत कमजोर हुई है।
ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई में कई बड़े नेताओं के मारे जाने के बाद वहाँ नेतृत्व में बदलाव आया है। उनके अनुसार,मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिका के सामने यह चुनौती है कि बातचीत के लिए ईरान की ओर से किससे संपर्क किया जाए।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसके बावजूद दावा किया कि परिस्थितियों पर नियंत्रण अमेरिका के हाथ में है। हालाँकि,ईरान की सैन्य क्षमताओं, नेतृत्व में बदलाव और युद्ध के परिणामों को लेकर किए गए इन दावों का आकलन स्वतंत्र रूप से उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर किया जाना जरूरी है।
ट्रंप ने अपने संबोधन में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की नीति दोहराई। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके मुताबिक, यदि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने में सफल होता है,तो इससे अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों से लैस ईरान के परिणाम केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेंगे,बल्कि इसका असर व्यापक स्तर पर पड़ सकता है। इसी आधार पर उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई को उचित ठहराने की कोशिश की।
अपने बयान के दौरान ट्रंप ने पूर्व अमेरिकी सरकारों की नीतियों की भी आलोचना की। उन्होंने विशेष रूप से पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने ईरान को बड़ी मात्रा में धन उपलब्ध कराया,लेकिन इसका इस्तेमाल परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में किया गया।
ट्रंप की यह टिप्पणी अमेरिका में ईरान की परमाणु नीति को लेकर लंबे समय से जारी राजनीतिक बहस को भी सामने लाती है। हालाँकि,पिछली सरकारों के साथ हुए समझौतों और वित्तीय लेन-देन को लेकर उनके आरोपों का मूल्यांकन संबंधित समझौतों तथा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
ईरान के साथ संघर्ष पर चर्चा के दौरान ट्रंप ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने रूस से अमेरिका को तेल और डीजल की आपूर्ति को लेकर बातचीत तथा प्रक्रिया आगे बढ़ने का दावा किया। ट्रंप के अनुसार,रूस से बड़ी मात्रा में तेल और डीजल अमेरिका पहुँच रहा है।
उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऊर्जा आपूर्ति से संबंधित घटनाक्रम का बाजार पर असर पड़ सकता है। हालाँकि,रूस से अमेरिका को लाखों बैरल तेल और डीजल भेजे जाने के दावे की मात्रा,समयसीमा और वास्तविक आपूर्ति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतें केवल आपूर्ति पर निर्भर नहीं करतीं। भू-राजनीतिक तनाव,परिवहन मार्गों की सुरक्षा,उत्पादन का स्तर और वैश्विक माँग भी ईंधन की कीमतों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में रूस से संभावित आपूर्ति बढ़ने का असर बाजार की अन्य परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।
ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्व का भी उल्लेख किया। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है,क्योंकि इसके जरिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचते हैं। इस क्षेत्र में सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही बाधित होने से तेल की आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि क्षेत्रीय परिस्थितियों और रूस से ऊर्जा आपूर्ति के कारण आने वाले दिनों में अमेरिका सहित अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें नीचे आ सकती हैं। हालाँकि,कीमतों में गिरावट की संभावना को लेकर फिलहाल निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
कुल मिलाकर, ट्रंप के बयान में ईरान के साथ संघर्ष समाप्त करने,उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अमेरिका की प्राथमिकताएँ सामने आई हैं। अब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या सैन्य दबाव के बीच कोई समझौता हो पाता है और क्या इससे मध्य पूर्व में तनाव कम होने के साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी राहत मिलती है।
