ग्रेटर नोएडा,10 अक्टूबर (युआईटीवी)- दिल्ली में जंतर-मंतर पर शनिवार, 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा रोकने तथा हाउस अरेस्ट करने के प्रयास का मामला सामने आया है। किसान नेताओं ने पुलिस की इस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए इसे किसानों की आवाज दबाने की कोशिश बताया है। यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि किसान अपने अधिकारों, सम्मान और मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और प्रशासन की रोकथाम के बावजूद आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।
इस घटनाक्रम के बीच भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रवक्ता पवन खटाना को हाउस अरेस्ट किए जाने की जानकारी सामने आई है। किसान नेताओं के मुताबिक, संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर कार्यकर्ता दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे धरने में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें उनके घरों पर रोकने की कार्रवाई की। यूनियन ने इस कदम का विरोध करते हुए कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होना किसानों का लोकतांत्रिक अधिकार है।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के राष्ट्रीय महामंत्री और प्रदेश प्रवक्ता पवन खटाना ने पुलिस की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर किसान कार्यकर्ता दिल्ली पहुँचकर धरने में शामिल होना चाहते थे। हालाँकि,उनके अनुसार,पुलिस ने किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए उनके घरों पर ही कार्रवाई शुरू कर दी।
पवन खटाना ने आरोप लगाया कि इस तरह की रोकथाम से किसानों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान अपनी समस्याओं और मांगों को सरकार के सामने रखने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने से रोकना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस की कार्रवाई से किसानों का संघर्ष समाप्त नहीं होगा और संगठन अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगा।
उन्होंने यूनियन के कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे 10 अक्टूबर को यमुना एक्सप्रेसवे के नजदीक चपरगढ़ स्थित संगठन के कैंप कार्यालय पर एकत्रित हों। इसके बाद वहां से आगे की रणनीति के अनुसार कदम उठाए जाएँ। इस अपील के जरिए संगठन ने कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने और नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ने का संदेश दिया।
पवन खटाना ने कहा कि किसानों की लड़ाई केवल किसी एक व्यक्ति या क्षेत्र की समस्या तक सीमित नहीं है,बल्कि यह उनके अधिकारों और सम्मान से जुड़ा विषय है। उनके मुताबिक,किसान अपनी मांगों को सरकार तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और किसी भी परिस्थिति में अपनी आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
दूसरी ओर, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिला अध्यक्ष मनोज मावी के नेतृत्व में गांव बिरौंडी स्थित यूनियन कार्यालय पर किसानों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में संगठन के पदाधिकारियों के साथ आसपास के गांवों से आए सैकड़ों किसानों ने भाग लिया। इसमें दिल्ली कूच की तैयारियों,पुलिस की कार्रवाई और आंदोलन की आगामी रणनीति पर चर्चा की गई।
बैठक के दौरान किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने और संगठन के अगले कदमों को लेकर विचार-विमर्श किया गया। किसान नेताओं ने कहा कि उनकी मांगों को संबंधित अधिकारियों और केंद्र सरकार तक पहुँचाना जरूरी है। इसके लिए संगठन के स्तर पर एकजुटता बनाए रखने और आगे की गतिविधियों को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने पर जोर दिया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष मनोज मावी ने आरोप लगाया कि देश में किसानों की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) किसानों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में संघर्ष करती रहेगी।
मनोज मावी के अनुसार,दिल्ली कूच का प्रमुख उद्देश्य किसानों की मांगों को केंद्र सरकार के सामने रखना और उनके हित में ठोस निर्णय लेने की माँग करना है। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल आश्वासनों से नहीं होगा,बल्कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करके आवश्यक कदम उठाने होंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूनियन का संघर्ष किसी राजनीतिक दल के विरोध में नहीं है। संगठन का उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करना,उनकी समस्याओं को सामने लाना और सरकार तक उनकी बात पहुँचाना है। उनके मुताबिक, किसान संगठन अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाना चाहता है।
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन और पुलिस ने किसानों को दिल्ली जाने से रोकने का प्रयास किया। उनके मुताबिक,जिला अध्यक्ष मनोज मावी और यूनियन के अन्य पदाधिकारियों को भी हाउस अरेस्ट करने की कोशिश की गई। इस घटनाक्रम से संगठन के कार्यकर्ताओं और किसानों में नाराजगी देखी गई।
यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि किसान अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करना चाहते हैं। ऐसे में उन्हें दिल्ली पहुँचने से रोकने की कार्रवाई उनके अधिकारों को प्रभावित करती है। किसान नेताओं ने प्रशासन से अपील की कि वह संगठन के सदस्यों के साथ ऐसा व्यवहार न करे,जिससे उनके शांतिपूर्ण आंदोलन में बाधा उत्पन्न हो।
हालाँकि,पुलिस की कार्रवाई को लेकर किसान नेताओं की ओर से लगाए गए आरोपों के संबंध में प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए हाउस अरेस्ट और दिल्ली जाने से रोकने की कार्रवाई से जुड़ी परिस्थितियों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।
बैठक में शामिल किसानों ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को सरकार के सामने रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। उनका कहना है कि किसी भी संगठन को अपनी समस्याएँ और मांगें शांतिपूर्ण ढंग से रखने का अवसर मिलना चाहिए। किसानों ने प्रशासन से अपील की कि उनके संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान किया जाए तथा उन्हें शांतिपूर्ण धरने और प्रदर्शन में शामिल होने दिया जाए।
किसान नेताओं ने यह भी कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों को सामने लाना है। उनका दावा है कि संगठन किसी राजनीतिक उद्देश्य के बजाय किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए आवाज उठा रहा है। इसलिए सरकार और प्रशासन को किसानों की मांगों पर बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के पदाधिकारियों के अनुसार,किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने के पक्ष में हैं। दिल्ली कूच की तैयारियों के बीच पुलिस की रोकथाम संबंधी कार्रवाई ने संगठन की गतिविधियों को और तेज कर दिया है। चपरगढ़ स्थित कैंप कार्यालय पर कार्यकर्ताओं को एकत्रित होने के लिए कहा गया है,जहाँ से आगे की रणनीति के अनुसार कदम उठाने की बात कही गई है।
जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर किसान संगठनों और पुलिस प्रशासन के बीच पैदा हुई स्थिति के बाद अब आंदोलन की अगली रणनीति पर नजर बनी हुई है। एक ओर किसान नेता अपनी मांगों को सरकार तक पहुँचाने के लिए दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे थे,वहीं दूसरी ओर पुलिस की रोकथाम संबंधी कार्रवाई को लेकर संगठन ने विरोध दर्ज कराया है।
पवन खटाना की कार्यकर्ताओं से एकत्रित होने की अपील और बिरौंडी गाँव में आयोजित बैठक से संकेत मिलता है कि यूनियन अपने सदस्यों के साथ आगे की गतिविधियों पर समन्वय बनाए रखना चाहती है। हालाँकि,दिल्ली कूच के संबंध में आगे क्या कदम उठाए जाएँगे,यह संगठन की रणनीति और संबंधित परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल,भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने किसानों के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई जारी रखने की बात कही है। संगठन के नेताओं ने प्रशासन से शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने और किसानों की मांगों को गंभीरता से सुनने की अपील की है। वहीं,पुलिस की कार्रवाई को लेकर लगाए गए आरोपों पर प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद घटनाक्रम की पूरी स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
