मानसा में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या (तस्वीर क्रेडिट@RvVerma6484)

मानसा में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या, मेडिकल स्टोर संचालक पर आरोप; इलाके में तनाव

मानसा,13 अक्टूबर (युआईटीवी)- पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले एंटी ड्रग टास्क फोर्स के संचालक परविंदर सिंह झोटा की मंगलवार सुबह गोली मारकर हत्या कर दी गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक,एक मेडिकल स्टोर पर नशीले पदार्थों की बिक्री को लेकर हुए विवाद के बाद उन पर फायरिंग की गई। घटना में झोटा के साथ मौजूद एक अन्य व्यक्ति के भी गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। वारदात के बाद इलाके में तनाव फैल गया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार,परविंदर सिंह झोटा मंगलवार सुबह एक मेडिकल स्टोर पर पहुँचे थे। वहाँ उनकी दुकान के संचालक अश्वनी कुमार से बातचीत हुई। बताया जा रहा है कि झोटा ने दुकानदार से सवाल किया कि सुबह दुकान से नशीला पदार्थ किस व्यक्ति ने खरीदा था और उसे किसने बेचा। इसी मुद्दे पर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर मेडिकल स्टोर संचालक ने झोटा पर गोलियाँ चला दीं।

फायरिंग में झोटा गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मौत हो गई। उनके साथ मौजूद एक व्यक्ति भी गोली लगने से गंभीर रूप से घायल बताया जा रहा है। घटना के बाद आरोपी मेडिकल स्टोर बंद करके मौके से फरार हो गया। हालाँकि,घटनाक्रम की पूरी जानकारी और गोलीबारी के पीछे की परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि जाँच के बाद ही हो सकेगी।

प्रारंभिक जानकारी में इस घटना के पीछे नशीले पदार्थों की कथित बिक्री को लेकर हुआ विवाद सामने आया है। बताया जा रहा है कि परविंदर सिंह झोटा नशे की बिक्री पर रोक लगाने के लिए सक्रिय रहते थे। इसी सिलसिले में वह मेडिकल स्टोर संचालक से सवाल करने पहुँचे थे। बातचीत के दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि गोलीबारी हो गई।

घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आने की जानकारी है। दावा किया जा रहा है कि इसमें झोटा और मेडिकल स्टोर संचालक के बीच बहस दिखाई देती है। इसके बाद फायरिंग की घटना भी वीडियो में नजर आने की बात कही जा रही है। हालाँकि,वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसके आधार पर घटनाक्रम के सभी पहलुओं को अंतिम रूप से स्पष्ट नहीं माना जा सकता।

बताया जाता है कि परविंदर सिंह झोटा और संबंधित मेडिकल स्टोर संचालक के बीच पहले भी विवाद हो चुका था। जानकारी के मुताबिक,झोटा ने इससे पहले दुकानदार को जूतों की माला पहनाकर घुमाया था। इस पुरानी घटना को मौजूदा वारदात से जोड़कर देखा जा रहा है। हालाँकि,दोनों घटनाओं के बीच वास्तविक संबंध क्या है और क्या पुरानी रंजिश हत्या की वजह बनी,इसका पता पुलिस जाँच के बाद ही चल सकेगा।

गोलीबारी की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। घटना की खबर फैलने के बाद परविंदर सिंह झोटा के समर्थक उनके घर पर जुटने लगे। इससे मानसा में तनावपूर्ण माहौल बन गया।

स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले व्यक्ति की हत्या की खबर सामने आने के बाद उनके समर्थकों और क्षेत्र के लोगों में चिंता बढ़ गई है। पुलिस के सामने फिलहाल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ वारदात के कारणों का पता लगाने की चुनौती है।

घटना के बाद आरोपी के फरार होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में पुलिस की जाँच में उसकी तलाश,गोलीबारी की परिस्थितियों और विवाद की पृष्ठभूमि से जुड़े पहलुओं की अहम भूमिका होगी। घायल व्यक्ति की स्थिति और घटना में इस्तेमाल किए गए हथियार से संबंधित जानकारी भी जाँच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल,हत्या के पीछे के कारणों को लेकर सामने आ रही जानकारियाँ शुरुआती हैं और किसी निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए आधिकारिक जाँच का इंतजार करना होगा।

परविंदर सिंह झोटा मानसा में लंबे समय से नशे के खिलाफ अभियान चला रहे थे। वह एंटी ड्रग टास्क फोर्स के संचालक के रूप में क्षेत्र में नशे की बिक्री रोकने के लिए सक्रिय रहते थे। बताया जाता है कि वह नशीले पदार्थों की कथित बिक्री की जानकारी मिलने पर संबंधित लोगों से सवाल करते थे और नशा बेचने वालों को पकड़ने की कोशिश भी करते थे।

उनकी इस सक्रियता के कारण कई बार विवाद होने की बात सामने आई थी। नशे के खिलाफ स्थानीय स्तर पर चलाए जा रहे अभियान में उनकी भूमिका के चलते क्षेत्र के कुछ लोगों का उन्हें समर्थन भी प्राप्त था। उनके प्रयासों के बाद इलाके की कई पंचायतों ने नशे के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए थे। इससे पता चलता है कि क्षेत्र में नशे की समस्या को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही थी।

पंजाब में नशीले पदार्थों की समस्या लंबे समय से सामाजिक और प्रशासनिक चिंता का विषय रही है। नशे की बिक्री रोकने के लिए सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ स्थानीय संगठनों और समुदायों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालाँकि,नशे के खिलाफ काम करने वाले लोगों और कथित तौर पर नशे की बिक्री में शामिल व्यक्तियों के बीच विवाद होने की स्थिति में कानून के तहत कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता भी सामने आती है।

परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद अब पुलिस जाँच के जरिए कई सवालों के जवाब तलाशे जाने हैं। इनमें मेडिकल स्टोर पर हुई बहस की वास्तविक वजह,गोलीबारी की परिस्थितियाँ,पुराना विवाद और आरोपी के फरार होने से जुड़े पहलू शामिल हैं। साथ ही, सामने आए वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई देने वाले घटनाक्रम की भी पुष्टि आवश्यक होगी।

फिलहाल, शुरुआती जानकारी में नशीले पदार्थों की बिक्री को लेकर विवाद को वारदात की संभावित वजह बताया जा रहा है,लेकिन इसे अंतिम कारण नहीं माना जा सकता। पुलिस की जाँच और आधिकारिक बयान से ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

मानसा में हुई इस हत्या ने नशे के खिलाफ स्थानीय स्तर पर चलाए जा रहे अभियानों और उनसे जुड़े विवादों को फिर चर्चा में ला दिया है। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है। अब लोगों की निगाहें आरोपी की गिरफ्तारी,घायल व्यक्ति की स्थिति और जाँच में सामने आने वाले तथ्यों पर टिकी हैं।