अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (तस्वीर क्रेडिट@AmirMCH5)

ट्रंप का दावा- चीन से अब अमेरिका कमा रहा है खूब पैसा,एआई को ‘सुपरइंटेलिजेंस’ नाम देने की घोषणा

वाशिंगटन,15 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की व्हाइट हाउस में मेजबानी का बचाव करते हुए कहा है कि अमेरिका अब चीन के साथ व्यापार से काफी पैसा कमा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पहले चीन के साथ व्यापार में अमेरिका को नुकसान होता था,लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। ट्रंप ने दोनों देशों के बीच बेहतर होते संबंधों का श्रेय अपने और शी जिनपिंग के अच्छे व्यक्तिगत रिश्तों को भी दिया। इसके साथ ही उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अब ‘सुपरइंटेलिजेंस’ कहने की घोषणा की। उनका दावा है कि इस तकनीकी क्षेत्र में अमेरिका चीन समेत दुनिया के अन्य देशों से आगे है।

ट्रंप ने बुधवार को स्थानीय समय के अनुसार एरिजोना के बुलहेड सिटी में आयोजित एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। अपने संबोधन में उन्होंने चीन के साथ व्यापारिक संबंधों, शी जिनपिंग की हालिया अमेरिका यात्रा, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और आगामी चुनावों से जुड़े मुद्दों पर बात की। उन्होंने कहा कि चीन के साथ अमेरिका के संबंध पहले की तुलना में बेहतर हुए हैं और अब वाशिंगटन को इस व्यापार से आर्थिक लाभ मिल रहा है।

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग की मेजबानी का बचाव करते हुए कहा कि चीनी राष्ट्रपति की अमेरिका यात्रा दोनों नेताओं के बीच अच्छे व्यक्तिगत संबंधों को दर्शाती है। उन्होंने दावा किया कि चीन अब अमेरिका का सम्मान करता है और दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब चीन के साथ व्यापार में काफी पैसा कमा रहा है। उनके मुताबिक,पहले दोनों देशों के बीच व्यापार के कारण अमेरिका को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था,लेकिन अब स्थिति बदल गई है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका चीन के साथ अच्छा कारोबार कर रहा है और इससे देश को लाभ हो रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने शी जिनपिंग की लंबी हवाई यात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चीनी राष्ट्रपति करीब 21 घंटे की उड़ान भरकर अमेरिका आए, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण संकेत है। ट्रंप के अनुसार, कोई भी नेता इतनी लंबी यात्रा तब तक नहीं करता, जब तक वह संबंधित देश या उसके राष्ट्रपति को महत्व और सम्मान न देता हो।

उन्होंने अपनी और शी जिनपिंग की बैठक को शानदार बताया। हालाँकि,ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस मुलाकात के दौरान किन मुद्दों पर ठोस सहमति बनी,क्या कोई नया व्यापारिक समझौता हुआ या चीन के साथ व्यापार से अमेरिका को होने वाले कथित लाभ का आकलन किस आधार पर किया गया है।

इसलिए चीन के साथ व्यापार में अमेरिका को अधिक फायदा होने का ट्रंप का दावा फिलहाल उनके बयान के रूप में ही सामने आया है। रैली में उन्होंने इस दावे के समर्थन में विस्तृत आर्थिक आँकड़े या समझौतों का ब्योरा साझा नहीं किया।

अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने तकनीकी प्रतिस्पर्धा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में दुनिया के सभी देशों से आगे है और चीन भी इस मामले में उससे पीछे है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए इस्तेमाल होने वाला मौजूदा नाम इस तकनीक की क्षमताओं को पूरी तरह व्यक्त नहीं करता।

ट्रंप ने कहा कि लोग इस तकनीक को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहते हैं,लेकिन उनके विचार में इसे ‘सुपरइंटेलिजेंस’ कहना अधिक उपयुक्त होगा। उन्होंने तर्क दिया कि यह तकनीक केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक सीमित नहीं है,बल्कि इसकी क्षमताएँ उससे कहीं अधिक हो सकती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि कभी-कभी यह तकनीक जरूरत से ज्यादा शक्तिशाली साबित हो सकती है,इसलिए इसके विकास और इस्तेमाल पर नजर रखना जरूरी है। इस टिप्पणी के जरिए ट्रंप ने तकनीकी प्रगति के साथ उससे जुड़े संभावित जोखिमों की ओर भी संकेत किया।

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने हाल ही में कई प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों के अधिकारियों को व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया था। इनमें से कुछ अधिकारी शी जिनपिंग के सम्मान में आयोजित रात्रिभोज में भी शामिल हुए थे। हालाँकि,उन्होंने इन कंपनियों या उनके अधिकारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए।

अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक,तकनीकी कंपनियों के प्रतिनिधि भी इस बात से सहमत हैं कि ‘सुपरइंटेलिजेंस’ शब्द इस क्षेत्र की क्षमताओं को बेहतर तरीके से व्यक्त कर सकता है। उन्होंने घोषणा की कि अब वह इस तकनीक के लिए इसी शब्द का इस्तेमाल करेंगे।

हालाँकि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता को ‘सुपरइंटेलिजेंस’ कहने की ट्रंप की घोषणा अपने आप में तकनीकी क्षेत्र की आधिकारिक शब्दावली में बदलाव नहीं है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सुपरइंटेलिजेंस अलग-अलग अवधारणाएँ हैं। सुपरइंटेलिजेंस का इस्तेमाल आम तौर पर ऐसी काल्पनिक या संभावित बुद्धिमत्ता के लिए किया जाता है,जो मानव की बौद्धिक क्षमताओं से व्यापक रूप से आगे निकल जाए। ट्रंप का बयान इस विषय पर उनका नजरिया दर्शाता है।

अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, उन्नत कंप्यूटिंग और डिजिटल तकनीकों में दोनों देश अपनी क्षमताएँ बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में ट्रंप का यह दावा कि अमेरिका इस क्षेत्र में सबसे आगे है,दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

हालाँकि,उन्होंने अपने संबोधन में यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका की बढ़त को मापने के लिए किन मानकों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में शोध, कंप्यूटिंग क्षमता, निवेश,तकनीकी उत्पादों और उनके व्यावहारिक इस्तेमाल जैसे कई पहलुओं के आधार पर देशों की स्थिति का आकलन किया जाता है।

ट्रंप ने तकनीक को लेकर अपनी बात रखते हुए यह संकेत दिया कि उनका प्रशासन अमेरिका की तकनीकी बढ़त को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उपलब्धि के रूप में देखता है। उनके बयान में चीन के साथ आर्थिक संबंधों और तकनीकी प्रतिस्पर्धा,दोनों को अमेरिकी हितों के नजरिये से प्रस्तुत किया गया।

रैली के दौरान ट्रंप ने आगामी तीन नवंबर को होने वाले चुनावों का भी उल्लेख किया और रिपब्लिकन पार्टी के समर्थन में अपील की। उन्होंने अपनी उस योजना का जिक्र किया, जिसके तहत यदि कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी अपना नियंत्रण बरकरार रखती है,तो अमेरिकियों को पाँच हजार डॉलर देने का प्रस्ताव है।

ट्रंप ने कहा कि इस योजना के तहत मिलने वाली रकम अमेरिका के भीतर ही खर्च की जानी चाहिए। हालाँकि,उनके संबोधन में इस प्रस्ताव को लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया, पात्र लोगों की संख्या या इसके वित्तपोषण से जुड़ी पूरी जानकारी सामने नहीं आई।

कुल मिलाकर,ट्रंप के संबोधन में चीन के साथ व्यापारिक संबंधों को लेकर सकारात्मक दावे,कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अमेरिकी बढ़त पर जोर और चुनावी वादे प्रमुख रहे। उन्होंने शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा को दोनों नेताओं के बीच बेहतर संबंधों का संकेत बताया, लेकिन व्यापार से होने वाले लाभ के समर्थन में विस्तृत आँकड़े नहीं दिए। वहीं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता को ‘सुपरइंटेलिजेंस’ कहने की उनकी घोषणा ने तकनीक के नामकरण और भविष्य की क्षमताओं को लेकर एक नई बहस को सामने रखा है।