फ्लाईदुबई विमान (तस्वीर क्रेडिट@AviationAll_)

इजरायल जाने वाली उड़ानों में क्रू की तैनाती पर सख्ती,एयर फ्रांस ने पाकिस्तानी कर्मचारियों को ड्यूटी से रोका

यरूशलम,15 अक्टूबर (युआईटीवी)- इजरायल आने-जाने वाली अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों में पायलटों और केबिन क्रू की तैनाती को लेकर नियमों का पालन अब अधिक सख्ती से किया जा रहा है। इसी कड़ी में फ्रांस की विमानन कंपनी एयर फ्रांस ने कथित तौर पर पाकिस्तानी नागरिकता रखने वाले पायलटों और केबिन क्रू सदस्यों को इजरायल जाने वाली और वहाँ से आने वाली उड़ानों में ड्यूटी देने से रोक दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार,इजरायल के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं रखने वाले देशों के नागरिकों को इन उड़ानों में काम करने की अनुमति नहीं है। इस व्यवस्था के तहत संबंधित देशों के नागरिकों की तैनाती पर रोक लगाई जा रही है।

रिपोर्टों में कहा गया है कि केवल एयर फ्रांस ही नहीं,बल्कि अमेरिका की यूनाइटेड एयरलाइंस और चेक गणराज्य की स्मार्टविंग्स जैसी विमानन कंपनियाँ भी इन नियमों के अनुरूप अपने क्रू प्रबंधन में बदलाव कर रही हैं। एयरलाइंस के लिए अब यह सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है कि इजरायल के लिए निर्धारित उड़ानों में ऐसे कर्मचारी तैनात न हों, जिनकी नागरिकता संबंधित प्रतिबंधों के दायरे में आती है। इस बदलाव से अंतर्राष्ट्रीय विमानन क्षेत्र में क्रू की नियुक्ति,उड़ानों की योजना और कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर नई चुनौतियाँ सामने आने की आशंका है।

इस मामले ने उस समय अधिक ध्यान खींचा, जब 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की एक उड़ान में कथित तौर पर गंभीर घटना हुई। आरोप है कि विमान में मौजूद ओमान के सह-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की और भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला किया। हालाँकि,घटना से जुड़ी परिस्थितियों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इसे अंतिम रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। इस घटना के बाद इजरायल जाने वाली उड़ानों में क्रू सदस्यों की राष्ट्रीयता की जाँच और नियमों के पालन को लेकर चर्चा तेज हो गई।

ओमान उन देशों में शामिल है,जिनके इजरायल के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। इसी वजह से ओमानी नागरिक भी संबंधित प्रतिबंधों के दायरे में आते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक,इजरायल की ओर से लागू व्यवस्था के तहत विदेशी एयरलाइंस को यह सुनिश्चित करना होता है कि प्रतिबंधित देशों के नागरिक इजरायल आने-जाने वाली उड़ानों में पायलट या केबिन क्रू के रूप में तैनात न हों।

फ्रांसीसी खोजी समाचार मंच मीडियापार्ट और विमानन क्षेत्र से जुड़ी खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने वाली कंपनी सीएच-एविएशन की 13 अक्टूबर की रिपोर्टों में कहा गया कि एयर फ्रांस और यूनाइटेड एयरलाइंस ने अपने कर्मचारियों को इन नियमों के बारे में जानकारी दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इजरायल के लिए उड़ान संचालित करने से पहले क्रू की नागरिकता और पात्रता संबंधी आवश्यकताओं की जांच की जाए।

रिपोर्टों के अनुसार,एयर फ्रांस ने पुष्टि की है कि वह इजरायल की ओर से निर्धारित आवश्यकताओं का पालन कर रही है। वहीं,यूनाइटेड एयरलाइंस ने अपने क्रू प्रबंधन तंत्र में भी संबंधित नियमों को शामिल किया है। इससे प्रतिबंधित देशों की नागरिकता रखने वाले कर्मचारियों को इजरायल रूट पर तैनात करने से बचा जा सकेगा।

इस व्यवस्था का असर केवल उड़ान के संचालन के समय होने वाली जाँच तक सीमित नहीं है। एयरलाइंस को कर्मचारियों की ड्यूटी तय करते समय ही यह देखना पड़ सकता है कि कौन-सा पायलट या केबिन क्रू सदस्य किसी विशेष मार्ग पर काम करने के लिए पात्र है। यदि किसी कर्मचारी की नागरिकता नियमों के तहत प्रतिबंधित श्रेणी में आती है,तो उसे दूसरी उड़ान पर भेजना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में कर्मचारियों की उपलब्धता,ड्यूटी रोस्टर और उड़ानों के समय पर भी असर पड़ने की संभावना है।

हालाँकि,अलग-अलग विमानन कंपनियों ने नियमों को लागू करने के लिए किस तरह की आंतरिक प्रक्रिया अपनाई है,इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं है। फिर भी रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि कंपनियाँ अब इस विषय को अधिक गंभीरता से ले रही हैं और क्रू की तैनाती से पहले अतिरिक्त सावधानी बरत रही हैं।

इन नियमों के सख्त पालन का एक उदाहरण मंगलवार को सामने आया,जब इजरायली अधिकारियों ने इथियोपियन एयरलाइंस की एक उड़ान को वापस लौटने का निर्देश दिया। रिपोर्टों के मुताबिक,अधिकारियों को पता चला कि विमान में इंडोनेशिया की नागरिकता रखने वाला एक पायलट मौजूद था। इसके बाद विमान को इजरायल की ओर आगे बढ़ने के बजाय वापस भेजने का फैसला किया गया।

द यरूशलम पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार,विमान लगभग एक घंटे से उड़ान में था और उस समय भी इथियोपिया के हवाई क्षेत्र में ही मौजूद था। अधिकारियों के निर्देश के बाद उसे इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा लौटाया गया। वहाँ संबंधित पायलट को बदलने की प्रक्रिया पूरी की गई। क्रू में बदलाव के बाद विमान ने दोबारा इजरायल के लिए उड़ान भरी और अंततः तेल अवीव पहुँच गया।

इस घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि नियमों का पालन न होने पर उड़ान को बीच रास्ते से लौटाने जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है,भले ही विमान अभी संबंधित देश के हवाई क्षेत्र से बाहर न निकला हो। ऐसे फैसलों से यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ सकता है और एयरलाइंस को अतिरिक्त परिचालन व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

इंडोनेशिया मुस्लिम बहुल देश है और उसके इजरायल के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। इस कारण वहाँ की नागरिकता रखने वाले कर्मचारी भी संबंधित प्रतिबंधों के दायरे में आते हैं। इथियोपियन एयरलाइंस ने इस घटना को गलती बताते हुए कहा कि उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि संबंधित पायलट को इजरायल जाने वाली उड़ान संचालित करने की अनुमति नहीं है। कंपनी की ओर से दिए गए इस स्पष्टीकरण से संकेत मिलता है कि नियमों की जानकारी और उनका सही ढंग से पालन करना अंतर्राष्ट्रीय विमानन कंपनियों के लिए अहम चुनौती बन गया है।

मीडियापार्ट और इजरायली मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार,ये प्रतिबंध 31 मुस्लिम बहुल देशों के नागरिकों पर लागू होते हैं। इस सूची में पाकिस्तान,ईरान, ओमान, सऊदी अरब, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, इराक, लेबनान और नाइजर सहित कई देश शामिल बताए गए हैं। हालाँकि, सभी देशों की पूरी सूची और प्रत्येक मामले में लागू होने वाली शर्तों को लेकर उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी सीमित है।

इन नियमों की एक अहम बात यह है कि प्रतिबंध केवल विमान के संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाले पायलटों तक सीमित नहीं बताए गए हैं। केबिन क्रू के सदस्यों पर भी ये लागू होते हैं। इसका अर्थ है कि किसी उड़ान में यात्रियों की सुरक्षा और सेवा से संबंधित जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों की नागरिकता भी तैनाती के फैसले को प्रभावित कर सकती है।

रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि दोहरी नागरिकता रखने वाले लोगों को इन प्रतिबंधों से स्वतः छूट नहीं मिलती। ऐसे कर्मचारियों की पात्रता का निर्धारण संबंधित नियमों के आधार पर किया जा सकता है। इस वजह से एयरलाइंस के लिए केवल कर्मचारियों की नियुक्ति संबंधी सामान्य जानकारी पर्याप्त नहीं हो सकती,बल्कि उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इजरायल रूट के लिए लागू विशिष्ट शर्तों का पालन किया गया है।

इजरायली टीवी चैनल एन12 के अनुसार, देश के परिवहन और सड़क सुरक्षा मंत्रालय ने 1 अक्टूबर को विदेशी विमानन कंपनियों को इन नियमों के बारे में जानकारी देते हुए निर्देश जारी किए थे। रिपोर्टों के मुताबिक,प्रतिबंध 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की उड़ान में हुई कथित घटना से पहले भी मौजूद थे। हालाँकि,पहले इनके पालन की निगरानी और क्रियान्वयन उतनी सख्ती से नहीं किया जाता था।

बताया जाता है कि पहले इजरायली अधिकारी मुख्य रूप से विदेशी एयरलाइंस पर निर्भर रहते थे कि वे अपने कर्मचारियों की पात्रता की जाँच करें और प्रतिबंधित देशों के नागरिकों को संबंधित उड़ानों में तैनात न करें। अब सामने आई घटनाओं के बाद यह व्यवस्था अधिक सख्त होती दिखाई दे रही है। विमान को वापस लौटाने के मामले ने यह भी दिखाया है कि यदि क्रू की तैनाती में नियमों का उल्लंघन सामने आता है,तो उड़ान के संचालन के दौरान भी कार्रवाई की जा सकती है।

इजरायल आने-जाने वाली उड़ानों में नागरिकता के आधार पर क्रू की तैनाती पर रोक लगाए जाने से अंतर्राष्ट्रीय विमानन क्षेत्र में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। एयरलाइंस को अलग-अलग देशों के नियमों के साथ तालमेल बैठाते हुए कर्मचारियों की ड्यूटी तय करनी होगी। इसके लिए क्रू की नागरिकता संबंधी जानकारी का सत्यापन,उड़ान से पहले पात्रता की जांच और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक कर्मचारियों की व्यवस्था करना महत्वपूर्ण होगा।

यदि किसी पायलट या केबिन क्रू सदस्य को अंतिम समय में किसी मार्ग के लिए अयोग्य पाया जाता है,तो एयरलाइन को उसकी जगह दूसरे कर्मचारी की व्यवस्था करनी पड़ सकती है। ऐसा नहीं हो पाने पर उड़ान में देरी या परिचालन संबंधी बदलाव की स्थिति भी बन सकती है। लंबी दूरी की अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों में यह चुनौती और जटिल हो सकती है, क्योंकि वहाँ कर्मचारियों के कार्य समय,विश्राम अवधि और उपलब्धता का ध्यान रखना आवश्यक होता है।

दूसरी ओर,एयरलाइंस के सामने यह भी सवाल है कि अलग-अलग देशों के नियमों को अपने वैश्विक संचालन में किस तरह लागू किया जाए। किसी एक मार्ग पर लागू प्रतिबंध का असर कर्मचारियों की नियुक्ति और अन्य उड़ानों के ड्यूटी रोस्टर पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से कंपनियाँ क्रू प्रबंधन की प्रक्रिया में नियमों को शामिल कर रही हैं।

फिलहाल,रिपोर्टों से यही संकेत मिलता है कि इजरायल जाने वाली उड़ानों में प्रतिबंधित देशों के नागरिकों की तैनाती को लेकर निगरानी बढ़ाई गई है। एयर फ्रांस,यूनाइटेड एयरलाइंस और अन्य कंपनियों के कदम इस बदलाव को दर्शाते हैं। आने वाले समय में इन नियमों का व्यावहारिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इजरायली अधिकारी इन्हें किस तरह लागू करते हैं और अंतर्राष्ट्रीय एयरलाइंस अपने क्रू प्रबंधन में इनके अनुरूप कितनी प्रभावी व्यवस्था बनाती हैं।