मुंबई,16 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारतीय महिला क्रिकेट की अनुभवी बल्लेबाज पूनम राउत ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। गुरुवार को लिए गए इस फैसले के साथ ही उनके लंबे अंतर्राष्ट्रीय करियर का अंत हो गया। मुंबई की रहने वाली पूनम ने अपने करियर में भारतीय टीम के लिए कई अहम पारियां खेलीं और देश के लिए तीनों प्रारूपों में प्रतिनिधित्व किया। वह आखिरी बार वर्ष 2021 में भारतीय टीम की ओर से मैदान पर उतरी थीं। लगभग पाँच साल तक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहने के बाद अब उन्होंने अपने करियर को औपचारिक रूप से विराम देने का फैसला किया है।
37 वर्षीय पूनम ने सोशल मीडिया पर जारी एक भावुक संदेश के जरिए अपने संन्यास की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि काफी सोच-विचार करने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का निर्णय किया है। उनके लिए भारत का प्रतिनिधित्व करना जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है। पूनम ने क्रिकेट को केवल एक खेल नहीं,बल्कि अपने व्यक्तित्व को गढ़ने वाला अनुभव बताया। उनके मुताबिक,इस खेल ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में डटे रहना सिखाया और ऐसी यादें दीं,जिन्हें वह जीवनभर अपने साथ रखेंगी।
उन्होंने कहा कि जब भी उन्होंने भारतीय जर्सी पहनी,उसे गर्व और कृतज्ञता की भावना के साथ पहना। देश के लिए खेलने का सपना पूरा होना उनके जीवन की सबसे खास उपलब्धियों में से एक रहा। पूनम के संन्यास के साथ भारतीय महिला क्रिकेट की उस पीढ़ी की एक और खिलाड़ी ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर से विदाई ली है, जिसने सीमित संसाधनों और बदलते दौर के बीच खेलते हुए महिला क्रिकेट को आगे बढ़ते देखा।
पूनम राउत ने मार्च 2009 में वेस्टइंडीज के खिलाफ एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। यह उनके अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरुआत थी,जिसके बाद उन्होंने भारतीय टीम में अपनी जगह मजबूत करने के लिए लगातार मेहनत की। शीर्ष क्रम की बल्लेबाज के रूप में उनकी पहचान ऐसी खिलाड़ी की रही,जो पारी को सँभालने के साथ जरूरत पड़ने पर रन गति बढ़ाने की क्षमता भी रखती थीं।
एकदिवसीय क्रिकेट में पूनम ने भारत के लिए कुल 73 मुकाबले खेले और 34.83 की औसत से 2,299 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से तीन शतक और 15 अर्धशतक निकले। उनके आँकड़े बताते हैं कि उन्होंने लंबे समय तक टीम के लिए उपयोगी योगदान दिया और कई मौकों पर अपनी बल्लेबाजी से भारतीय पारी को मजबूती प्रदान की।
टी20 अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में भी पूनम ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस प्रारूप में उन्होंने 35 मुकाबलों में 719 रन बनाए। वहीं,टेस्ट क्रिकेट में उन्हें चार मैच खेलने का अवसर मिला, जिनमें उन्होंने कुल 264 रन जोड़े। तीनों प्रारूपों में खेलने का अनुभव उनके करियर की विशेषताओं में शामिल रहा। हालाँकि,उनकी सबसे ज्यादा पहचान एकदिवसीय क्रिकेट में बल्लेबाजी के कारण बनी,जहाँ उन्होंने कई महत्वपूर्ण पारियाँ खेलीं।
पूनम का करियर ऐसे समय में आगे बढ़ा,जब भारतीय महिला क्रिकेट अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा था। उस दौर में महिला खिलाड़ियों के सामने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करने के साथ-साथ खेल को अधिक लोकप्रिय बनाने की चुनौती भी थी। ऐसे माहौल में पूनम जैसी खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से टीम को योगदान दिया और महिला क्रिकेट की बढ़ती प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बनीं।
पूनम राउत के अंतरराष्ट्रीय करियर की चर्चा वर्ष 2017 के महिला एकदिवसीय विश्व कप के बिना अधूरी रहेगी। इंग्लैंड में आयोजित इस प्रतियोगिता में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया था। हालाँकि,खिताबी मुकाबले में भारत को जीत नहीं मिली,लेकिन टूर्नामेंट में टीम के प्रदर्शन ने देश में महिला क्रिकेट को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पूनम भी उस भारतीय टीम का हिस्सा थीं,जिसने विश्व कप के फाइनल में जगह बनाई थी। उन्होंने इस उपलब्धि को अपने करियर के सबसे अहम पलों में से एक बताया। उनके अनुसार,भले ही भारतीय टीम ट्रॉफी जीतने से चूक गई,लेकिन इस टूर्नामेंट ने देश में महिला क्रिकेट की तस्वीर बदलने में मदद की।
पूनम ने अपने संदेश में कहा कि वर्ष 2017 का विश्व कप हमेशा उनके करियर की खास यादों में शामिल रहेगा। उन्होंने माना कि उस प्रतियोगिता ने युवा लड़कियों की एक पूरी पीढ़ी को क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया और भारतीय महिला क्रिकेट के भविष्य को नई दिशा देने में योगदान दिया। उनके लिए उस ऐतिहासिक टीम का हिस्सा होना गर्व की बात है।
विश्व कप में भारतीय टीम के प्रदर्शन के बाद महिला क्रिकेट को लेकर चर्चा का दायरा व्यापक हुआ। खिलाड़ियों की उपलब्धियों को अधिक पहचान मिलने लगी और युवा प्रतिभाओं के लिए राष्ट्रीय टीम तक पहुँचने का सपना पहले से अधिक वास्तविक दिखाई देने लगा। पूनम के मुताबिक,इस बदलाव का हिस्सा बनना उनके लिए विशेष अनुभव रहा।
अपने करियर के दौरान वह तीन एकदिवसीय विश्व कप और चार टी20 विश्व कप प्रतियोगिताओं में भी खेलीं। इतने बड़े अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों में हिस्सा लेना उनके अनुभव और लंबे करियर को दर्शाता है। इन प्रतियोगिताओं में खेलने से उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में प्रदर्शन करने और उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा का सामना करने का अवसर मिला।
संन्यास की घोषणा करते हुए पूनम ने उन संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया,जिन्होंने उनके क्रिकेट सफर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का धन्यवाद करते हुए कहा कि बोर्ड ने उन्हें सर्वोच्च स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया। उनके लिए भारतीय जर्सी पहनना एक सपना पूरा होने जैसा था।
पूनम ने कहा कि उन्हें अपने पूरे करियर के दौरान जो भरोसा और समर्थन मिला, उसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगी। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में जगह बनाना किसी भी खिलाड़ी के लिए लंबी मेहनत,अनुशासन और लगातार अच्छे प्रदर्शन की माँग करता है। ऐसे सफर में परिवार, प्रशिक्षकों, टीम प्रबंधन और क्रिकेट संस्थाओं का सहयोग महत्वपूर्ण होता है। पूनम ने अपने संदेश में इन सभी योगदानों को याद किया।
उन्होंने मुंबई क्रिकेट संघ का भी विशेष रूप से धन्यवाद किया। पूनम ने कहा कि उनके शुरुआती दिनों में उन पर विश्वास जताने और उन्हें मौके देने के लिए वह संघ की आभारी हैं। वहाँ से मिला मार्गदर्शन उनके क्रिकेट करियर की नींव बना। घरेलू क्रिकेट में शुरुआती अवसर किसी खिलाड़ी के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं,क्योंकि इसी स्तर पर उसकी तकनीक, अनुशासन और प्रतिस्पर्धा से निपटने की क्षमता विकसित होती है।
पूनम ने भारतीय रेलवे को अपना दूसरा परिवार बताते हुए उसका भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि रेलवे ने पूरे करियर में उनका साथ दिया और उन्हें एक मजबूत तथा अनुशासित क्रिकेटर के रूप में ढालने में मदद की। भारतीय महिला क्रिकेट में रेलवे की टीम लंबे समय से घरेलू प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों को अवसर देती रही है। पूनम के लिए इस व्यवस्था से जुड़ाव उनके खेल जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
पूनम ने अपने संदेश में पूर्व भारतीय कप्तान मिताली राज का विशेष उल्लेख किया। मिताली की कप्तानी में उन्होंने भारत और रेलवे, दोनों के लिए क्रिकेट खेला था। पूनम ने कहा कि उनकी कप्तानी में खेलने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात थी। उन्होंने मिताली के नेतृत्व और खेल के प्रति समर्पण को अपने लिए प्रेरणादायक बताया।
एक टीम में कप्तान की भूमिका केवल मैदान पर रणनीति बनाने तक सीमित नहीं होती। कप्तान का अनुभव,निर्णय लेने की क्षमता और खिलाड़ियों के साथ संवाद भी टीम के प्रदर्शन को प्रभावित करता है। पूनम के संदेश से स्पष्ट हुआ कि मिताली के साथ खेलने का अनुभव उनके क्रिकेट जीवन की महत्वपूर्ण यादों में शामिल है।
उन्होंने अपने सभी प्रशिक्षकों का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने करियर के उतार-चढ़ाव के दौरान उन पर भरोसा बनाए रखा। किसी खिलाड़ी का सफर हमेशा एक जैसा नहीं रहता। अच्छे प्रदर्शन के दौर के साथ ऐसे समय भी आते हैं,जब फॉर्म, चयन और प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पूनम ने उन सभी लोगों को याद किया,जिन्होंने ऐसे दौर में उनका साथ दिया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
इसके साथ ही उन्होंने अपनी साथी खिलाड़ियों को भी धन्यवाद दिया। पूनम ने कहा कि ड्रेसिंग रूम में साथ बिताए गए पल,दोस्ती, हँसी-मजाक, चुनौतियाँ और यादें उनके लिए हमेशा खास रहेंगी। लंबे समय तक किसी टीम का हिस्सा रहने पर खिलाड़ियों के बीच ऐसे रिश्ते बनते हैं,जो मैदान के प्रदर्शन से कहीं आगे तक जाते हैं। उनके लिए यह सफर केवल मैचों और रनों तक सीमित नहीं रहा,बल्कि इसमें कई व्यक्तिगत अनुभव और मजबूत संबंध भी शामिल रहे।
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई लेने के बावजूद पूनम राउत ने खेल से पूरी तरह दूर होने का संकेत नहीं दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्रिकेट के प्रति उनका लगाव पहले की तरह बना रहेगा और वह भविष्य में इस खेल के विकास के लिए योगदान देना चाहती हैं। उन्होंने कोचिंग प्रमाणन भी पूरा कर लिया है,जिससे उनके लिए क्रिकेट से जुड़े रहने के नए रास्ते खुल सकते हैं।
पूनम ने कहा कि अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर के इस अध्याय को समाप्त करते समय उनका दिल कृतज्ञता से भरा हुआ है। क्रिकेट ने उन्हें जीवनभर के दोस्त,अनमोल सीख और ऐसी यादें दी हैं, जिन्हें वह हमेशा संजोकर रखेंगी। उन्होंने उन प्रशंसकों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने उनकी सफलताओं और मुश्किल समय में उनका समर्थन किया।
खिलाड़ियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय करियर का अंत एक बड़ा बदलाव होता है। मैदान पर देश का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी से आगे बढ़कर उन्हें अपने अनुभवों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के अवसर मिल सकते हैं। पूनम के कोचिंग प्रमाणन पूरा करने की जानकारी से संकेत मिलता है कि वह अपने अनुभव को भविष्य के खिलाड़ियों के काम में लाना चाहती हैं। हालाँकि,उन्होंने आगे की भूमिका को लेकर किसी विशेष योजना का विस्तृत खुलासा नहीं किया है।
पूनम का मानना है कि एक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर के रूप में उनका सफर भले ही समाप्त हो रहा है,लेकिन खेल के प्रति उनका प्यार कभी खत्म नहीं होगा। वह क्रिकेट को कुछ वापस देना चाहती हैं और इसके विकास में अपनी भूमिका निभाना चाहती हैं। उनके लंबे अनुभव से युवा खिलाड़ियों को तकनीक, धैर्य, अनुशासन और बड़े मुकाबलों के दबाव को समझने में मदद मिल सकती है।
अपने संदेश के अंत में पूनम ने इस सफर का हिस्सा रहे सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका संन्यास एक ऐसे करियर का समापन है,जिसमें भारतीय टीम के लिए खेलने का गौरव,विश्व कप फाइनल तक पहुँचने का अनुभव और तीनों प्रारूपों में देश का प्रतिनिधित्व करने की उपलब्धि शामिल रही। अब उनके सामने क्रिकेट से जुड़ी एक नई भूमिका की संभावना है,जहाँ वह मैदान पर खिलाड़ी के रूप में नहीं,बल्कि अपने अनुभव और सीख के माध्यम से खेल को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकती हैं।
पूनम राउत ने अपने संदेश का समापन क्रिकेट के प्रति आभार और देश के लिए सम्मान व्यक्त करते हुए किया। उनके लिए भारतीय जर्सी पहनना जीवन का सपना था,जिसे उन्होंने वर्षों तक पूरे गर्व के साथ जिया। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से उनकी विदाई के साथ एक अध्याय समाप्त हुआ है,लेकिन क्रिकेट से उनका रिश्ता आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।
