पाकिस्तान पर बयान देकर घिरे मदन राठौर ने दी सफाई (तस्वीर क्रेडिट@LawyerSoni)

पाकिस्तान पर बयान देकर घिरे मदन राठौर ने दी सफाई,बोले- क्रिकेट मैच के संदर्भ में कही थी बात,विपक्ष ने बीजेपी को घेरा

नई दिल्ली,16 अक्टूबर (युआईटीवी)- राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौर अपने पाकिस्तान से जुड़े एक बयान को लेकर राजनीतिक विवाद में घिर गए हैं। बयान पर सवाल उठने और विपक्ष की ओर से आलोचना किए जाने के बाद राठौर ने सफाई देते हुए कहा है कि उनकी टिप्पणी भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच के संदर्भ में थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बयान का एक छोटा हिस्सा निकालकर इस तरह प्रसारित किया गया,जिससे उनके कहने का अर्थ बदल गया। राठौर का कहना है कि उनका पूरा बयान सुनने पर वास्तविक संदर्भ स्पष्ट हो जाएगा। वहीं,कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इस मामले को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है। इससे राजस्थान की राजनीति में बयान को लेकर बहस तेज हो गई है।

समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान मदन राठौर ने अपने बयान को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में वह देशभक्ति के विषय पर अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच का उदाहरण दिया था।

राठौर के मुताबिक,यदि भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच में भारतीय टीम हार जाती है और कोई व्यक्ति पटाखे जलाकर जश्न मनाता है,तो उसके इस व्यवहार को देशभक्ति नहीं कहा जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि क्रिकेट के मुकाबले को युद्ध की तरह देखना उचित नहीं है। उनका दावा है कि इसी संदर्भ में कही गई बात को गलत अर्थ में पेश किया गया।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि उनके बयान की दो से लेकर आठ-दस सेकंड तक की छोटी क्लिप निकालकर प्रसारित की गई। उनके अनुसार,इस तरह के अधूरे वीडियो से लोगों के सामने पूरी बात नहीं पहुँचती और वक्ता की मंशा को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है। उन्होंने इसे अपनी छवि खराब करने की कोशिश बताया।

राठौर ने अपनी सफाई में यह भी कहा कि पाकिस्तान के साथ भारत के संबंधों को लेकर उनका रुख स्पष्ट है। उन्होंने पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और भारत के खिलाफ हमलों की साजिश रचने के आरोप लगाए। उन्होंने युद्ध का समर्थन करने से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए दोहराया कि उनकी टिप्पणी क्रिकेट मैच और देशभक्ति के संदर्भ में थी।

इस पूरे विवाद की शुरुआत गुरुवार को जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। कार्यक्रम में मदन राठौर ने अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संभावित संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा था कि ऐसी स्थिति में भारत पाकिस्तान के साथ खड़ा होगा, क्योंकि वह उसका पड़ोसी देश है। हालाँकि,उन्होंने यह भी कहा था कि यदि संघर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच होता है,तो भारत को अपने देश के साथ खड़ा होना चाहिए।

इसी टिप्पणी के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे। बयान के पहले हिस्से को लेकर विपक्ष ने बीजेपी की राष्ट्रवाद संबंधी राजनीति पर निशाना साधा। आलोचकों ने सवाल किया कि पाकिस्तान के साथ भारत के तनावपूर्ण संबंधों और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों के बीच उसके पक्ष में खड़े होने की बात किस संदर्भ में कही गई थी।

विवाद बढ़ने के बाद राठौर ने अपने बयान की व्याख्या करते हुए क्रिकेट मैच का उदाहरण दिया। उनका कहना है कि उनकी बात को मूल संदर्भ से अलग करके देखा जा रहा है। इस तरह अब विवाद केवल उनके शुरुआती बयान तक सीमित नहीं है,बल्कि इस बात पर भी केंद्रित हो गया है कि उनकी टिप्पणी का सही अर्थ क्या था और उसे किस संदर्भ में समझा जाना चाहिए।

मदन राठौर के बयान को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर हमला बोला। कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर टिप्पणी करते हुए उनके बयान की आलोचना की। उन्होंने पाकिस्तान के समर्थन में दिखाई देने वाली ऐसी टिप्पणी पर सवाल उठाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से पूछा कि इस मामले में क्या कदम उठाया जाएगा।

कांग्रेस की आलोचना का मुख्य आधार राठौर का वह बयान रहा,जिसमें उन्होंने अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संघर्ष की स्थिति में भारत के पाकिस्तान के साथ खड़े होने की बात कही थी। विपक्ष का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी को लेकर बीजेपी को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

हालाँकि,राठौर अब अपनी बात को क्रिकेट से जुड़े उदाहरण के रूप में समझा रहे हैं। उनका दावा है कि बयान के एक हिस्से को अलग करके दिखाने से गलत संदेश गया। ऐसे में राजनीतिक विवाद में दो अलग-अलग व्याख्याएँ सामने आ रही हैं। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष जहाँ अपनी टिप्पणी को संदर्भ से काटकर पेश किए जाने की बात कह रहे हैं,वहीं कांग्रेस उनके शुरुआती बयान को लेकर सवाल उठा रही है।

इस मामले में आम आदमी पार्टी ने भी बीजेपी पर निशाना साधा। पार्टी ने सवाल किया कि जब आम नागरिक सरकार की नीतियों की आलोचना करते हैं या उनसे सवाल पूछते हैं, तो कई बार उन्हें देशविरोधी क्यों कहा जाता है। पार्टी ने राठौर की टिप्पणी को लेकर बीजेपी के राष्ट्रवाद संबंधी दावों पर सवाल उठाए।

आम आदमी पार्टी की ओर से उठाया गया मुद्दा राजनीतिक बहस को और व्यापक बनाता है। पार्टी का सवाल है कि देशभक्ति और राष्ट्रवाद के मानदंड सभी के लिए एक समान होने चाहिए। जब किसी आम व्यक्ति की टिप्पणी को लेकर उसकी देश के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाए जाते हैं,तो राजनीतिक पद पर बैठे नेताओं के बयानों को भी उसी कसौटी पर परखा जाना चाहिए।

विपक्ष की आलोचना के बीच बीजेपी के सामने अपने प्रदेश अध्यक्ष के बयान का संदर्भ स्पष्ट करने की चुनौती भी सामने आई। हालाँकि,राठौर ने खुद सफाई देते हुए कहा है कि उनका आशय पाकिस्तान के साथ युद्ध की स्थिति में खड़े होने से नहीं,बल्कि क्रिकेट मैच और देशभक्ति से जुड़ी बात समझाने से था।

विवाद बढ़ने के बाद राजस्थान बीजेपी इकाई ने भी मदन राठौर का बचाव किया। पार्टी का कहना है कि उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। बीजेपी के अनुसार, राठौर की टिप्पणी भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच को लेकर थी,न कि किसी युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान का समर्थन करने के बारे में।

पार्टी के इस रुख से स्पष्ट है कि बीजेपी फिलहाल इस विवाद को बयान के संदर्भ से जुड़ा मामला मान रही है। वहीं,विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर लगातार सवाल उठा रहा है। इस बीच राठौर ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा है कि उनकी बात का पूरा हिस्सा सुना जाना चाहिए,ताकि उनके विचारों को सही तरीके से समझा जा सके।

भारत और पाकिस्तान के संबंध लंबे समय से सुरक्षा और आतंकवाद जैसे मुद्दों के कारण संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में दोनों देशों को लेकर राजनीतिक नेताओं की टिप्पणियाँ अक्सर व्यापक चर्चा का विषय बन जाती हैं। खासकर तब,जब बयान में किसी संभावित संघर्ष या किसी देश के साथ खड़े होने की बात कही जाए।

मदन राठौर के बयान को लेकर फिलहाल विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। एक तरफ बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी इकाई इसे संदर्भ से अलग करके पेश किए जाने का मामला बता रहे हैं,वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी उनके शुरुआती बयान के आधार पर सवाल उठा रही हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल बयान के संदर्भ और उसकी व्याख्या का है। राठौर का कहना है कि उन्होंने क्रिकेट मैच के उदाहरण के जरिए देशभक्ति की बात समझाई थी और उनकी टिप्पणी को युद्ध से जोड़ना गलत है। दूसरी ओर,विपक्ष का ध्यान उनके उस कथन पर है,जिसमें अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संघर्ष की स्थिति में भारत के पाकिस्तान के साथ खड़े होने की बात कही गई थी।

फिलहाल,दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें सामने रख रहे हैं। आने वाले समय में यह विवाद राजस्थान की राजनीति में कितना प्रभाव डालता है, यह देखना होगा। इतना जरूर है कि एक बयान ने देशभक्ति,राजनीतिक जवाबदेही और सार्वजनिक टिप्पणियों के संदर्भ को लेकर नई बहस छेड़ दी है।