अमित शाह

ओडिशा के छात्रसंघ चुनावों में एबीवीपी की बड़ी जीत, अमित शाह बोले- युवाओं ने ‘राष्ट्र प्रथम’ को चुना

नई दिल्ली,17 अक्टूबर (युआईटीवी)- ओडिशा के छात्रसंघ चुनावों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के शानदार प्रदर्शन के बाद राजनीतिक और छात्र संगठनों के बीच चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस जीत पर परिषद के कार्यकर्ताओं को बधाई दी और इसे युवाओं के जनादेश से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि ओडिशा के विश्वविद्यालयों में मिली सफलता यह संदेश देती है कि युवा झूठ, भ्रम और अराजकता फैलाने वाली ताकतों के बजाय ‘राष्ट्र प्रथम’ की विचारधारा के साथ खड़े हैं। शाह ने अपने बयान में एबीवीपी की जीत को देशविरोधी ताकतों के लिए युवाओं का जवाब भी बताया।

अमित शाह ने शनिवार सुबह सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा कर एबीवीपी के कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने अपने संदेश में पंजाब विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय के बाद ओडिशा के विश्वविद्यालयों में संगठन की सफलता का उल्लेख किया। शाह के अनुसार,अलग-अलग शिक्षण संस्थानों में एबीवीपी की जीत युवाओं के बीच संगठन की विचारधारा के समर्थन को दर्शाती है। हालांकि, छात्रसंघ चुनावों के नतीजे संबंधित संस्थानों में छात्र मतदाताओं की पसंद को सामने लाते हैं और इन्हें व्यापक युवा आबादी की एकमात्र राजनीतिक राय के रूप में नहीं देखा जा सकता।

ओडिशा में हुए छात्रसंघ चुनावों में एबीवीपी ने कई महत्वपूर्ण पदों पर जीत हासिल की है। संगठन के अनुसार,राज्य के 13 विश्वविद्यालयों में उसे आठ अध्यक्ष और 11 महासचिव पदों पर सफलता मिली। इसके अलावा छह विश्वविद्यालयों में संगठन ने सभी प्रमुख पदों पर जीत दर्ज करते हुए क्लीन स्वीप किया। इन नतीजों ने राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में परिषद की चुनावी मौजूदगी को मजबूत किया है।

एबीवीपी ने जीत के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ओडिशा के छात्रों का जनादेश उसके पक्ष में है। संगठन ने दावा किया कि विश्वविद्यालय परिसरों के विद्यार्थियों ने छात्र नेतृत्व और सेवा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर भरोसा जताया है। परिषद ने चुनाव परिणामों को छात्रों के समर्थन का संकेत बताया और इसे संगठन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया।

छात्रसंघ चुनावों में अध्यक्ष और महासचिव जैसे पदों पर जीत किसी भी छात्र संगठन के लिए अहम मानी जाती है। इन पदों के माध्यम से चुने गए प्रतिनिधि विद्यार्थियों की समस्याओं,शैक्षणिक सुविधाओं,छात्रावास,परीक्षा व्यवस्था और परिसर से जुड़े अन्य मुद्दों को प्रशासन के सामने उठाते हैं। ऐसे में चुनावी सफलता के बाद संबंधित संगठनों से छात्रों की अपेक्षाएँ भी बढ़ जाती हैं।

ओडिशा के उच्च शिक्षा विभाग के मुताबिक,गुरुवार को राज्य के कुल 332 उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान कराया गया। इनमें लगभग 320 कॉलेज और 13 विश्वविद्यालय शामिल थे। मतदान सुबह आठ बजे शुरू हुआ और दोपहर दो बजे तक चला। बड़ी संख्या में संस्थानों में एक साथ चुनाव आयोजित किए जाने के कारण यह राज्य के उच्च शिक्षा परिसरों में एक महत्वपूर्ण चुनावी प्रक्रिया रही।

इन चुनावों में कुल 6,696 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई। कॉलेजों में 6,358 उम्मीदवार मैदान में थे,जबकि विश्वविद्यालयों में 338 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। इतने बड़े स्तर पर उम्मीदवारों की भागीदारी से छात्र राजनीति में प्रतिस्पर्धा का अंदाजा लगाया जा सकता है। विभिन्न पदों के लिए हुए मुकाबलों में छात्र संगठनों ने अपने उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार किया और विद्यार्थियों से समर्थन माँगा।

चुनाव प्रक्रिया के दौरान राज्य के अधिकांश कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। हालाँकि,कुछ स्थानों से हिंसा की छोटी-मोटी घटनाओं की जानकारी भी सामने आई। इसके बावजूद व्यापक स्तर पर मतदान प्रक्रिया पूरी की गई। चुनावों के संचालन में संबंधित संस्थानों और प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

अमित शाह ने अपने संदेश में एबीवीपी की लगातार चुनावी सफलताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय,दिल्ली विश्वविद्यालय और अब ओडिशा के 13 विश्वविद्यालयों में मिली जीत युवाओं के रुख का संकेत है। उन्होंने इसे ऐसी ताकतों के खिलाफ संदेश बताया,जिन पर उनके अनुसार झूठ और भ्रम फैलाने का आरोप है। शाह ने परिषद की सफलता को राष्ट्र प्रथम की विचारधारा के प्रति समर्थन के रूप में प्रस्तुत किया।

उनके बयान से स्पष्ट है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता ने छात्रसंघ चुनावों के परिणामों को केवल विश्वविद्यालयों तक सीमित संगठनात्मक उपलब्धि के रूप में नहीं,बल्कि वैचारिक समर्थन के संकेत के तौर पर भी देखा है। दूसरी ओर,इन चुनावों का सीधा परिणाम अलग-अलग संस्थानों के छात्र मतदाताओं के फैसले को दर्शाता है। विभिन्न विश्वविद्यालयों में छात्रों की प्राथमिकताएँ स्थानीय मुद्दों,शैक्षणिक परिस्थितियों और उम्मीदवारों के प्रदर्शन से भी प्रभावित हो सकती हैं।

ओडिशा में एबीवीपी की सफलता के बाद अब संगठन के सामने अपने चुनावी वादों को पूरा करने की चुनौती होगी। विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी ढंग से काम करना और विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ संवाद बनाए रखना निर्वाचित प्रतिनिधियों की प्रमुख जिम्मेदारी होगी। छात्रसंघों की भूमिका केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं रहती,बल्कि छात्रों की शिकायतों और मांगों को संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाना भी उसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कुल मिलाकर,ओडिशा के छात्रसंघ चुनावों में एबीवीपी के प्रदर्शन ने राज्य के विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति को नई चर्चा दी है। आठ अध्यक्ष और 11 महासचिव पदों पर जीत के साथ छह विश्वविद्यालयों में क्लीन स्वीप संगठन के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है। अमित शाह की बधाई और उनकी वैचारिक टिप्पणी ने इन नतीजों को राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श से भी जोड़ दिया है। अब देखना होगा कि निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि परिसर से जुड़े मुद्दों पर किस तरह काम करते हैं और छात्रों के भरोसे पर कितना खरा उतरते हैं।