शेफाली वर्मा (तस्वीर क्रेडिट@manishmahiya07)

जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी 20 मैच में क्रिकेट उपकरणों के साथ दुर्व्यवहार करने पर आईसीसी ने शेफाली वर्मा को फटकार लगाई।

नई दिल्ली,21 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ओपनर और उप-कप्तान शेफाली वर्मा को 18 अक्टूबर, 2026 को रायपुर में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले गए दूसरे महिला टी20 इंटरनेशनल मैच के दौरान ‘आचार संहिता’ का उल्लंघन करने के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी ) की ओर से आधिकारिक तौर पर फटकार लगाई गई है। मैदान पर उनके इस बर्ताव के लिए उन्हें एक ‘डिमेरिट पॉइंट’ भी दिया गया है।

यह घटना जिम्बाब्वे की पारी के दौरान हुई, जब शेफाली वर्मा ने एक कैच छोड़ दिया और झुंझलाहट में गेंद को जमीन पर फेंक दिया। हालाँकि,भारत ने इस मैच में शानदार जीत दर्ज की,लेकिन इस घटना के कारण आईसीसी ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।

यह घटना जिम्बाब्वे की पारी के 12वें ओवर में हुई। वर्मा मिड-ऑफ पर फील्डिंग कर रही थीं,तभी श्री चरानी की गेंदबाजी पर चिपों मुगेरी-तिरिपानो ने कैच लेने का मौका दिया। वर्मा कैच नहीं पकड़ सकीं और निराशा में उन्होंने गेंद को जमीन पर दे मारा।

आईसीसी ने माना कि उनका यह बर्ताव ‘खिलाड़ियों और खिलाड़ी सहायता कर्मियों के लिए आईसीसी आचार संहिता’ के अनुच्छेद 2.2 का उल्लंघन है। यह नियम अंतर्राष्ट्रीय मैच के दौरान क्रिकेट के उपकरणों,कपड़ों, मैदान के साजो-सामान या अन्य फिटिंग और फिक्स्चर के गलत इस्तेमाल से जुड़ा है।

यह आरोप मैच अधिकारियों ने लगाया था, जिनमें ऑन-फील्ड अंपायर वृंदा राठी और गायत्री वेणुगोपालन,थर्ड अंपायर अन्ना हैरिस और फोर्थ अंपायर जननी नारायणन शामिल थीं।

वर्मा ने अपनी गलती मान ली और मैच रेफरी जी.एस. लक्ष्मी (जो एमिरेट्स आईसीसी इंटरनेशनल पैनल ऑफ मैच रेफरी की सदस्य हैं) द्वारा तय की गई सजा को स्वीकार कर लिया। नतीजतन,किसी औपचारिक सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी।

आईसीसी के अनुशासनात्मक नियमों के तहत,लेवल 1 के अपराधों के लिए कम से कम आधिकारिक चेतावनी और अधिकतम खिलाड़ी की मैच फीस के 50 प्रतिशत तक का जुर्माना लग सकता है। ऐसे उल्लंघनों के लिए एक या दो डिमेरिट पॉइंट भी मिल सकते हैं।

वर्मा को मिला यह डिमेरिट पॉइंट 24 महीने की अवधि में उनका पहला अनुशासनात्मक अपराध है। ये पॉइंट खिलाड़ी के रिकॉर्ड में 24 महीने तक बने रहते हैं। अगर इस दौरान किसी खिलाड़ी के चार या उससे ज़्यादा डिमेरिट पॉइंट हो जाते हैं,तो उन्हें सस्पेंशन पॉइंट में बदल दिया जाता है,जिसके परिणामस्वरूप खिलाड़ी पर अंतर्राष्ट्रीय मैचों से प्रतिबंध लग सकता है।

अनुशासनात्मक झटके के बावजूद, वर्मा ने उसी मैच में बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने सिर्फ 25 गेंदों पर नाबाद 55 रन बनाए,जिससे भारत को जिम्बाब्वे के 103 रनों के लक्ष्य को 9 विकेट शेष रहते हासिल करने में मदद मिली।

जिम्बाब्वे की टीम भारत की गेंदबाजी के सामने संघर्ष करती दिखी और 102/8 के स्कोर पर सिमट गई। इसके बाद भारत ने आसानी से लक्ष्य हासिल कर लिया और तीन मैचों की टी 20 सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली।

वर्मा की अर्धशतकीय पारी भारत की जीत में एक अहम योगदान रही। इससे पता चलता है कि कैच छूटने की निराशा के बावजूद,वह बल्ले से शानदार वापसी करने की क्षमता रखती हैं।

भारत और ज़िम्बाब्वे के बीच तीसरा और आखिरी टी 20 मैच 20 अक्टूबर को रायपुर में खेला जाएगा। भारत पहले ही सीरीज़ अपने नाम कर चुका है,इसलिए वह अपनी जीत की लय को बरकरार रखना चाहेगा,जबकि ज़िम्बाब्वे इस दौरे का समापन सकारात्मक रूप से करना चाहेगा।

वर्मा का ध्यान अपनी शानदार बल्लेबाज़ी को जारी रखने पर होगा,साथ ही उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मैदान पर उनकी हताशा के कारण उन पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई न हो।

यह घटना याद दिलाती है कि अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों से पूरे मैच के दौरान पेशेवर व्यवहार बनाए रखने की उम्मीद की जाती है। हालाँकि प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में दबाव और निराशा का होना स्वाभाविक है,लेकिन आईसीसी की आचार संहिता के अनुसार खिलाड़ियों को अपनी प्रतिक्रियाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए और खेल के उपकरणों तथा मानकों का सम्मान करना चाहिए।