नागोया,21 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत ने आइची-नागोया 2026 एशियन पैरा गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की शॉट पुट एफ46 स्पर्धा में तीनों पदक अपने नाम कर लिए। भारतीय खिलाड़ियों ने स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतकर प्रतियोगिता में देश का दबदबा कायम किया। सचिन खिलाड़ी ने दमदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि मोहम्मद यासर ने रजत और प्रवीण ने कांस्य पदक जीतकर भारत की ऐतिहासिक सफलता को पूरा किया। इस मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स में देश की मजबूत स्थिति को दर्शाया।
पेरिस पैरालंपिक में रजत पदक जीत चुके सचिन खिलाड़ी ने प्रतियोगिता की शुरुआत से ही अपने इरादे स्पष्ट कर दिए। उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में 15.79 मीटर दूर गोला फेंककर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। इस शानदार शुरुआत ने उन्हें मुकाबले में मजबूत बढ़त दिलाई। सचिन ने पूरे इवेंट के दौरान निरंतरता बनाए रखी और उनके सभी थ्रो 15 मीटर से अधिक रहे। उनका प्रदर्शन अन्य खिलाड़ियों के मुकाबले काफी प्रभावशाली रहा, जिसके दम पर उन्होंने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।
एशियन पैरा गेम्स में पुरुषों की शॉट पुट एफ46 स्पर्धा में सचिन का यह दूसरा स्वर्ण पदक है। इससे पहले उन्होंने 2023 में चीन के हांगझोऊ में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में भी इसी स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। लगातार दूसरी बार इस प्रतियोगिता में शीर्ष स्थान हासिल करना उनके अनुभव,मेहनत और खेल में निरंतर सुधार का प्रमाण है। सचिन का प्रदर्शन भारतीय पैरा एथलेटिक्स के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
भारतीय खिलाड़ी मोहम्मद यासर ने भी मुकाबले में शानदार प्रदर्शन किया और रजत पदक अपने नाम किया। उन्होंने शुरुआती प्रयासों में 14 मीटर की दूरी के आसपास गोला फेंका, लेकिन तीसरे प्रयास में अपनी लय हासिल करते हुए 15.06 मीटर का थ्रो किया। यह इस सीजन में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इसी प्रयास ने उन्हें दूसरा स्थान दिलाया और भारत की पदक तालिका में एक और उपलब्धि जोड़ दी।
यासर के लिए यह सफलता लंबे समय की मेहनत और प्रशिक्षण का परिणाम है। उन्होंने कम उम्र में ही खेलों में रुचि लेना शुरू कर दिया था। उनके कोच ने उन्हें पैरा खेलों से परिचित कराया और शॉट पुट में प्रशिक्षण देना शुरू किया। यासर ने अपनी क्षमता को निखारने के लिए सक्षम खिलाड़ियों के साथ भी अभ्यास किया। लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
वर्ष 2017 में आयोजित चाइना ओपन पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप यासर के करियर के लिए खास रही। यह उनका पहला अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला था और इसी प्रतियोगिता में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय पदक हासिल किया। इससे उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने का आत्मविश्वास भी मिला। इससे पहले वह 2018 के पैरा एशियन गेम्स में भी कांस्य पदक जीत चुके हैं।
यासर ने बारहवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी,लेकिन अब वह स्नातक की पढ़ाई पूरी करने की योजना बना रहे हैं। खेल के साथ शिक्षा को आगे बढ़ाने की उनकी इच्छा उनके भविष्य के लक्ष्यों को दर्शाती है। वह भारतीय पैरा एथलीट अमित कुमार सरोहा और राजिंदर सिंह राहेलू को अपना आदर्श मानते हैं। यासर का सपना है कि वह भी अपने इन आदर्श खिलाड़ियों की तरह बड़ी उपलब्धियां हासिल करें और देश का नाम रोशन करें।
मुकाबले में भारत की सफलता को प्रवीण ने कांस्य पदक जीतकर पूरा किया। उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में 13.83 मीटर दूर गोला फेंका और तीसरा स्थान हासिल किया। उनके इस प्रदर्शन के साथ ही पुरुषों की शॉट पुट एफ46 स्पर्धा के तीनों पदक भारतीय खिलाड़ियों के नाम हो गए। एक ही इवेंट में स्वर्ण,रजत और कांस्य पदक जीतना भारतीय दल के लिए बड़ी उपलब्धि रही।
इस ऐतिहासिक प्रदर्शन पर केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सचिन खिलाड़ी,मोहम्मद यासर और प्रवीण की उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे ऐतिहासिक पोडियम स्वीप बताया। उन्होंने सचिन के स्वर्ण पदक,यासर के रजत पदक और प्रवीण के कांस्य पदक जीतने पर खुशी जताई।
मंत्री की बधाई में सचिन के प्रदर्शन के लिए 15.87 मीटर का सीजन-बेस्ट आँकड़ा,यासर के लिए 15.06 मीटर और प्रवीण के लिए 14.94 मीटर का उल्लेख किया गया। हालाँकि, प्रतियोगिता के उपलब्ध विवरण में सचिन का गेम्स रिकॉर्ड थ्रो 15.79 मीटर और प्रवीण का कांस्य पदक जीतने वाला थ्रो 13.83 मीटर बताया गया है। इन आंकड़ों में अंतर के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों की पदक जीतने की उपलब्धि स्पष्ट है।
आइची-नागोया एशियन पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों की यह सफलता देश के पैरा खेलों के बढ़ते स्तर को सामने लाती है। सचिन की निरंतरता,यासर की वापसी और प्रवीण के निर्णायक प्रयास ने मिलकर भारत को इस स्पर्धा में तीनों पदक दिलाए। इस उपलब्धि से भारतीय दल का उत्साह बढ़ने के साथ-साथ आगामी मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीदें भी मजबूत हुई हैं।
