नई दिल्ली,22 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत और पोलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क भारत के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर पहुँचे हैं। गुरुवार को उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने,आर्थिक संबंधों को विस्तार देने और रणनीतिक साझेदारी को आगे ले जाने के मुद्दों पर चर्चा हुई। टस्क की इस यात्रा को भारत और पोलैंड के बीच राजनीतिक,आर्थिक तथा तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि पोलैंड के प्रधानमंत्री से मिलकर उन्हें खुशी हुई। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान टस्क ने भारत और पोलैंड के बीच कई क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत बनाने को लेकर अपने विचार रखे। दोनों पक्षों के बीच हुई यह बैठक प्रधानमंत्री स्तर पर होने वाली द्विपक्षीय वार्ता से पहले महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
गुरुवार को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड टस्क के बीच भी उच्चस्तरीय बातचीत निर्धारित है। इस बैठक में दोनों देशों के नेता आपसी संबंधों की समीक्षा करने के साथ ही भविष्य में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार करेंगे। बातचीत का उद्देश्य द्विपक्षीय साझेदारी को केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित रखने के बजाय आधुनिक तकनीक, उद्योग,ऊर्जा और सुरक्षा जैसे नए क्षेत्रों में भी आगे बढ़ाना है।
भारत और पोलैंड के बीच होने वाली बातचीत में रक्षा निर्माण, व्यापार, नई तकनीक, अंतरिक्ष अनुसंधान और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को विशेष महत्व दिए जाने की संभावना है। दोनों देश इन क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाकर आपसी सहयोग का दायरा बढ़ाना चाहते हैं। रक्षा निर्माण के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ने से औद्योगिक सहयोग, तकनीकी आदान-प्रदान और निवेश की नई संभावनाएँ विकसित हो सकती हैं।
व्यापार के मोर्चे पर भी दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियों को विस्तार देने पर जोर रहेगा। भारत एक बड़ा बाजार होने के साथ-साथ तकनीकी सेवाओं,विनिर्माण और डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएँ रखता है। वहीं,पोलैंड यूरोपीय बाजार से जुड़ाव और औद्योगिक गतिविधियों के लिहाज से भारतीय कंपनियों के लिए सहयोग का अवसर प्रस्तुत करता है। ऐसे में दोनों सरकारें कारोबारी संपर्क बढ़ाने और कंपनियों के बीच साझेदारी को प्रोत्साहित करने के उपायों पर चर्चा कर सकती हैं।
नई तकनीक और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग भी इस दौरे का अहम हिस्सा है। भारत ने अंतरिक्ष कार्यक्रमों,उपग्रह प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवाओं में अपनी क्षमताओं का विस्तार किया है। पोलैंड के साथ इस क्षेत्र में संपर्क बढ़ने से शोध,तकनीकी अनुभव साझा करने और औद्योगिक भागीदारी के नए रास्ते खुल सकते हैं। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों के लिए सहयोग की गुंजाइश है। स्वच्छ ऊर्जा,टिकाऊ विकास और ऊर्जा संबंधी तकनीकों पर मिलकर काम करना भविष्य की साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड टस्क की वार्ता में आर्थिक तथा तकनीकी विषयों के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों पर भी विचार-विमर्श होगा। रूस-यूक्रेन युद्ध इस बातचीत के महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल रहेगा। यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था और युद्ध से पैदा हुई परिस्थितियों का अंतर्राष्ट्रीय संबंधों तथा अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में दोनों नेता इस विषय पर अपने विचार साझा कर सकते हैं।
भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों पर भी बातचीत होने की संभावना है। यूरोपीय देशों के साथ भारत के आर्थिक,व्यापारिक और रणनीतिक संपर्कों का विस्तार दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण है। पोलैंड यूरोपीय संघ का सदस्य होने के कारण भारत और यूरोप के बीच संवाद को आगे बढ़ाने में उपयोगी साझेदार साबित हो सकता है। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा,बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों और साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर भी दोनों देशों के विचार सामने आएँगे।
डोनाल्ड टस्क बुधवार शाम नई दिल्ली पहुँचे थे। हवाई अड्डे पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने उनका स्वागत किया। इस आधिकारिक यात्रा में टस्क के साथ पोलैंड के वित्त एवं अर्थव्यवस्था मंत्री आंद्रेज डोमान्स्की और एक उच्चस्तरीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया है। मंत्रालय के अनुसार,टस्क का दौरा भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने और लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगा। इस यात्रा के दौरान सरकारी स्तर की बैठकों के साथ-साथ कारोबार और उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच संवाद भी आयोजित किया जाएगा।
पोलैंड का प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली और बेंगलुरु में होने वाले कारोबारी कार्यक्रमों में हिस्सा लेगा। इन बैठकों के जरिए दोनों देशों की कंपनियों को एक-दूसरे के बाजार, निवेश के अवसरों और संभावित साझेदारियों को समझने का अवसर मिलेगा। कारोबारी संपर्क बढ़ाने से रक्षा उत्पादन, सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है।
पोलैंड के प्रधानमंत्री के रूप में डोनाल्ड टस्क की यह भारत की दूसरी यात्रा है। इससे पहले वह वर्ष 2010 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान भारत आए थे। दोनों देशों के नेताओं की पिछली मुलाकात वर्ष 2024 में हुई थी,जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वारसॉ का ऐतिहासिक दौरा किया था। उस यात्रा के दौरान भारत और पोलैंड के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था।
रणनीतिक साझेदारी का उद्देश्य दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद,आर्थिक सहयोग और विभिन्न क्षेत्रों में दीर्घकालिक संबंधों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाना है। मौजूदा दौरे में होने वाली बातचीत को वर्ष 2024 में तय की गई दिशा को आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। अब दोनों पक्षों के सामने चुनौती यह है कि उच्चस्तरीय बैठकों में बनी सहमति को ठोस कारोबारी और तकनीकी सहयोग में बदला जाए।
नई दिल्ली में अपने आधिकारिक कार्यक्रम पूरे करने के बाद डोनाल्ड टस्क बेंगलुरु जाएँगे। वहाँ वह सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों तथा अन्य कारोबारी हितधारकों से मुलाकात करेंगे। बेंगलुरु भारत का प्रमुख तकनीकी केंद्र है,जहाँ सूचना प्रौद्योगिकी, नवाचार और अंतरिक्ष से जुड़ी कई गतिविधियाँ संचालित होती हैं। ऐसे में यहाँ होने वाली बैठकों से पोलैंड और भारत के उद्योग जगत के बीच संपर्क बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
भारत-पोलैंड व्यापार मंच का आयोजन 22 अक्टूबर को नई दिल्ली और 23 अक्टूबर को बेंगलुरु में किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में कारोबारी प्रतिनिधियों के बीच विचारों का आदान-प्रदान,निवेश की संभावनाओं की पहचान और नए सहयोग क्षेत्रों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर,डोनाल्ड टस्क का भारत दौरा दोनों देशों के संबंधों को व्यापक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। रक्षा,व्यापार,तकनीक,अंतरिक्ष और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक मुद्दों पर संवाद भी इस यात्रा का अहम हिस्सा है। अब इस दौरे के दौरान होने वाली बैठकों और कारोबारी चर्चाओं से यह स्पष्ट होगा कि भारत और पोलैंड अपनी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए किन ठोस कदमों पर सहमति बनाते हैं।
