नई दिल्ली,22 अक्टूबर (युआईटीवी)- सऊदी अरब में हवाई अड्डों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। देश के पूर्वी प्रांत में स्थित किंग फहद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 21 अक्टूबर की शाम हमला हुआ,जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और आठ लोग घायल हो गए। सऊदी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हमले के बाद नुकसान का आकलन और सुरक्षा से जुड़ी जाँच की जा रही है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है,जब कुछ ही दिन पहले राजधानी रियाद के हवाई अड्डे पर भी घातक हमले की खबर आई थी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने सऊदी अरब के हवाई परिवहन,तेल उद्योग और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दम्माम के पास स्थित किंग फहद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा केवल यात्रियों की आवाजाही के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है,बल्कि यह सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत की आर्थिक गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ है। इस क्षेत्र में तेल उत्पादन,परिवहन और औद्योगिक प्रतिष्ठानों की मौजूदगी इसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील बनाती है। ऐसे में हवाई अड्डे पर हुए हमले का असर केवल विमान सेवाओं तक सीमित रहने के बजाय व्यापक सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
सऊदी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के मुताबिक,बुधवार शाम हुए हमले में एक निवासी की जान गई और आठ लोग घायल हुए। हालाँकि,शुरुआती जानकारी के बाद भी हमले की पूरी परिस्थितियों और नुकसान से जुड़े सभी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। प्राधिकरण ने जाँच जारी होने की बात कही है। फिलहाल,आधिकारिक स्तर पर हमले के लिए किसी संगठन या देश को जिम्मेदार ठहराने की पुष्टि नहीं की गई है।
किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत के प्रमुख शहर दम्माम के पास स्थित है। यह शहर से लगभग 31 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम की ओर है। इसका कुल क्षेत्रफल करीब 776 वर्ग किलोमीटर बताया जाता है। जमीन के कुल आकार के लिहाज से इसे दुनिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा माना जाता है। इसका क्षेत्रफल इतना विशाल है कि इसकी तुलना पड़ोसी देश बहरीन के आकार से भी की जाती है।
इस हवाई अड्डे का नाम सऊदी अरब के पूर्व शासक किंग फहद बिन अब्दुलअजीज अल सऊद के नाम पर रखा गया था। उन्होंने वर्ष 1982 से 2005 तक सऊदी अरब के बादशाह के रूप में शासन किया। सऊदी अरब में कई प्रमुख हवाई अड्डों के नाम शाही परिवार के सदस्यों के नाम पर रखे गए हैं। किंग फहद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भी देश के प्रमुख विमानन केंद्रों में शामिल है।
हवाई अड्डे को 28 नवंबर 1999 को व्यावसायिक उड़ानों के लिए खोला गया था। इससे पहले इस क्षेत्र की नागरिक उड़ानों का संचालन धहरान अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से होता था, जिसकी शुरुआत 1962 में हुई थी। नए हवाई अड्डे के चालू होने के बाद व्यावसायिक विमान सेवाओं को धीरे-धीरे यहाँ स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद धहरान का पुराना हवाई अड्डा मुख्य रूप से सऊदी अरामको की आवासीय सुविधाओं और विमानन संबंधी गतिविधियों से जुड़ा रह गया।
किंग फहद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा दम्माम के साथ-साथ खोबर, धहरान और कतीफ जैसे शहरों के लिए भी महत्वपूर्ण है। पूर्वी प्रांत के यात्रियों को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय गंतव्यों तक पहुंचाने में इसकी बड़ी भूमिका है। यहाँ से हर साल लगभग एक करोड़ यात्रियों के गुजरने का अनुमान बताया जाता है। विभिन्न एयरलाइंस की उड़ानें इस हवाई अड्डे को क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विमानन नेटवर्क से जोड़ती हैं।
इस हवाई अड्डे की भौगोलिक स्थिति भी इसे खास बनाती है। यह बहरीन को सऊदी अरब से जोड़ने वाले किंग फहद कॉजवे के नजदीक है। बहरीन की राजधानी मनामा का हवाई अड्डा भी यहाँ से लगभग 87 किलोमीटर दूर बताया जाता है। इस निकटता के कारण दोनों देशों के बीच यात्रा करने वाले लोगों के लिए क्षेत्रीय विमानन संपर्क महत्वपूर्ण हो जाता है।
हवाई अड्डे पर किसी भी तरह की सुरक्षा घटना का असर यात्रियों,विमान कंपनियों और क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था पर पड़ सकता है। यदि सुरक्षा कारणों से उड़ानों के संचालन में बदलाव करना पड़े,तो यात्रियों को देरी,उड़ान रद्द होने या दूसरे हवाई अड्डों की ओर भेजे जाने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हालाँकि,दम्माम में हुए ताजा हमले के बाद उड़ानों पर कितना असर पड़ा है,इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
किंग फहद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की अहमियत का एक बड़ा कारण इसके आसपास मौजूद तेल उद्योग से जुड़ी सुविधाएँ हैं। इसकी दक्षिणी सीमा के पास सऊदी अरामको का लगभग 250 वर्ग किलोमीटर में फैला क्षेत्र बताया जाता है। इस इलाके में तेल उत्पादन और उसके परिवहन से संबंधित गतिविधियाँ संचालित होती हैं। यही वजह है कि हवाई अड्डे को केवल यात्री परिवहन का केंद्र नहीं,बल्कि देश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधा के रूप में भी देखा जाता है।
सऊदी अरामको का यहाँ अपना निजी टर्मिनल भी है। इसके माध्यम से कंपनी के कर्मचारियों को यानबू,शायबा और तनाजिब जैसे स्थानों तक पहुँचाने के लिए विमान सेवाओं का उपयोग किया जाता है। तेल उद्योग के लिए कर्मचारियों,उपकरणों और अन्य जरूरी संसाधनों की आवाजाही महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में इस क्षेत्र के परिवहन नेटवर्क की सुरक्षा का सीधा संबंध औद्योगिक गतिविधियों की निरंतरता से भी जुड़ता है।
दम्माम हवाई अड्डे के पास तेल संबंधी प्रतिष्ठानों की मौजूदगी को देखते हुए किसी भी हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों के लिए संभावित जोखिमों का आकलन करना जरूरी हो जाता है। हालाँकि,उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि ताजा हमले का उद्देश्य तेल उद्योग को नुकसान पहुँचाना था। इस बारे में जाँच पूरी होने और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
दम्माम हवाई अड्डे पर हमले की खबर के बीच सऊदी अरब के शायबा तेल क्षेत्र को निशाना बनाने की कोशिश की भी जानकारी सामने आई। उपलब्ध विवरण के मुताबिक,सऊदी वायु रक्षा प्रणाली ने तेल क्षेत्र की ओर बढ़ रहे एक ड्रोन को मार गिराया। इसके मलबे से दो लोगों की मौत होने और दो अन्य के घायल होने की खबर है।
इस घटना ने तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। शायबा तेल क्षेत्र सऊदी अरब के ऊर्जा ढाँचे का अहम हिस्सा है। तेल उत्पादन और उससे जुड़ी सुविधाओं पर हमले की आशंका का असर केवल स्थानीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता,बल्कि इससे ऊर्जा आपूर्ति और बाजार की धारणा भी प्रभावित हो सकती है।
हालाँकि,दम्माम हवाई अड्डे और शायबा तेल क्षेत्र की घटनाओं के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दोनों घटनाओं की परिस्थितियों और जिम्मेदार पक्षों को लेकर सावधानी से जानकारी का आकलन करना जरूरी है।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में दम्माम हवाई अड्डे पर हुए हमले के लिए ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार बताया गया है। हालाँकि,सऊदी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने अपने सार्वजनिक बयान में किसी संगठन या देश का नाम नहीं लिया है। इसलिए हमले के जिम्मेदार पक्ष को लेकर अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
रिपोर्टों के मुताबिक, 6 से 12 अक्टूबर के बीच अभा,रियाद और दम्माम के हवाई अड्डों को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के जरिए निशाना बनाए जाने की घटनाएँ भी सामने आई थीं। इन घटनाओं के संबंध में लगभग 20 लोगों की मौत और 370 से अधिक लोगों के घायल होने के आँकड़े बताए गए हैं। हालाँकि,इन सभी आँकड़ों और अलग-अलग घटनाओं के विवरण की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
लगातार हमलों की खबरों ने सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। ड्रोन और मिसाइल जैसे हथियारों के इस्तेमाल से हवाई अड्डों तथा ऊर्जा प्रतिष्ठानों के लिए सुरक्षा चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं। ऐसे हमलों का जवाब देने के लिए वायु रक्षा प्रणालियों,निगरानी और आपातकालीन प्रबंधन के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता होती है।
क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच सैकड़ों उड़ानों के रद्द होने या उनके मार्ग बदले जाने की खबरें भी सामने आई हैं। रिपोर्टों में एयर इंडिया,अकासा एयर,लुफ्थांसा और पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस जैसी विमान कंपनियों की रियाद के लिए सेवाएँ रोकने या उनमें बदलाव करने का उल्लेख किया गया है। हालाँकि,अलग-अलग एयरलाइंस की सेवाओं की स्थिति समय के साथ बदल सकती है और यात्रियों को अपनी उड़ान से जुड़ी ताजा जानकारी संबंधित कंपनी से प्राप्त करनी चाहिए।
सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच रियाद के स्कूलों में एक सप्ताह के लिए ऑनलाइन पढ़ाई शुरू किए जाने की भी खबर है। अमेरिका,कनाडा और जर्मनी समेत कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए यात्रा संबंधी चेतावनियाँ जारी की हैं। रिपोर्टों के अनुसार,अमेरिका ने अपने दूतावास के कुछ कर्मचारियों को सऊदी अरब छोड़ने के निर्देश भी दिए हैं। इसके अतिरिक्त अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों को सऊदी हवाई अड्डों से यात्रा करने के लिए विशेष अनुमति लेने की आवश्यकता बताई गई है।
इन कदमों से स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी घटनाओं का असर आम यात्रियों के साथ-साथ राजनयिक और कारोबारी गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। यात्रा संबंधी चेतावनियाँ जारी होने के बाद लोग अपनी यात्राओं पर दोबारा विचार कर सकते हैं और कंपनियाँ अपने संचालन में बदलाव कर सकती हैं।
विदेश नीति और सुरक्षा के जानकारों के अनुसार,हवाई अड्डे ऐसे महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं जहाँ किसी घटना का असर तुरंत दिखाई दे सकता है। यहाँ हमला होने से उड़ान सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं,यात्रियों में असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है और विदेशी विमान कंपनियाँ अपने संचालन की समीक्षा कर सकती हैं। इसके अलावा,किसी देश की परिवहन व्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय कारोबारी छवि पर भी दबाव पड़ सकता है।
दम्माम के मामले में तेल उद्योग से जुड़ी सुविधाओं की नजदीकी सुरक्षा संबंधी चिंताओं को और बढ़ाती है। यदि किसी क्षेत्र में हवाई अड्डों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को बार-बार निशाना बनाए जाने की आशंका पैदा होती है,तो वहाँ काम करने वाली कंपनियों को अतिरिक्त सुरक्षा उपायों पर खर्च करना पड़ सकता है। इससे कारोबार की लागत और संचालन संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
मध्य-पूर्व में जारी व्यापक तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र के अन्य हवाई अड्डे भी सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। कुवैत के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इस वर्ष ड्रोन हमलों की घटनाएँ सामने आने की जानकारी भी दी गई है। ऐसे घटनाक्रम बताते हैं कि क्षेत्रीय संघर्ष का प्रभाव सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर नागरिक परिवहन और महत्वपूर्ण आर्थिक ढाँचे तक पहुँच सकता है।
फिलहाल,दम्माम के किंग फहद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले की जाँच जारी है। एक व्यक्ति की मौत और आठ लोगों के घायल होने की पुष्टि के बाद अब नुकसान,सुरक्षा व्यवस्था और घटना की परिस्थितियों को लेकर अधिक जानकारी का इंतजार है। हमले के लिए जिम्मेदार पक्ष की आधिकारिक पुष्टि भी अभी सामने नहीं आई है। आने वाले समय में जाँच के निष्कर्ष और सऊदी अधिकारियों की ओर से जारी किए जाने वाले विवरण यह स्पष्ट करने में मदद करेंगे कि घटना कैसे हुई और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसके क्या प्रभाव पड़ सकते हैं।
