सौरव दास और आशुतोष रांका (तस्वीर क्रेडिट@SonuRawat_0864)

तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद सीजेपी नेताओं को क्राइम ब्रांच का नोटिस,12 बजे पूछताछ के लिए बुलाया; अगले प्रदर्शन पर भी नजर

नई दिल्ली,22 अक्टूबर (युआईटीवी)- कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद भी उनकी मुश्किलें खत्म होती नजर नहीं आ रही हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों नेताओं को एक मामले में पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। उन्हें गुरुवार,22 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे क्राइम ब्रांच के कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया है। यह मामला कथित तौर पर सरकारी आदेश का उल्लंघन करने और किसी अन्य की संपत्ति में प्रवेश करते हुए जंतर-मंतर पहुँचने से संबंधित है। दोनों नेताओं की रिहाई के बाद पुलिस की ओर से जारी इस नोटिस ने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

जानकारी के मुताबिक,बुधवार रात करीब साढ़े आठ बजे सौरव दास और आशुतोष रांका को उस समय नोटिस दिया गया,जब वे तिहाड़ जेल से बाहर निकल रहे थे। जेल से बाहर आने के कुछ ही समय बाद उन्हें अगले दिन पूछताछ के लिए पेश होने का निर्देश मिला। मामले की जाँच अब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की डब्ल्यूआर-1 इकाई कर रही है। जाँच एजेंसी संबंधित घटनाक्रम, आरोपों और जंतर-मंतर तक पहुँचने की परिस्थितियों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है।

पुलिस की ओर से जारी नोटिस के बाद दोनों नेताओं को जाँच में शामिल होकर अपना पक्ष रखना होगा। पूछताछ के दौरान उनसे घटनाक्रम से जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं। हालाँकि,जाँच के नतीजे सामने आने तक आरोपों के संबंध में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी।

क्राइम ब्रांच जिस मामले की जाँच कर रही है,उसमें कथित तौर पर सरकारी आदेश का पालन नहीं करने और दूसरे की संपत्ति में प्रवेश करने से संबंधित आरोप शामिल हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि जंतर-मंतर पहुँचने के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और संबंधित घटनाओं में किन लोगों की क्या भूमिका रही। इसी सिलसिले में सौरव दास और आशुतोष रांका को पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

इस मामले में सीजेपी के एक अन्य नेता अजिंक्य शिंदे से भी संपर्क करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस उन्हें भी जाँच में शामिल करने की तैयारी कर रही है। फिलहाल पूछताछ के लिए औपचारिक रूप से सौरव दास और आशुतोष रांका को बुलाया गया है। अजिंक्य शिंदे से संपर्क और उनकी संभावित पूछताछ को लेकर आगे की कार्रवाई जाँच की जरूरतों के अनुसार की जा सकती है।

क्राइम ब्रांच की डब्ल्यूआर-1 इकाई को जाँच सौंपे जाने के बाद मामले में आगे की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पुलिस संबंधित घटनाओं के क्रम और आरोपों से जुड़े तथ्यों को समझने के लिए पूछताछ कर सकती है। जाँच के दौरान जुटाई जाने वाली जानकारी से यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि कथित उल्लंघन किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें शामिल लोगों की भूमिका क्या थी।

दोनों नेताओं को नोटिस जारी होने के बाद अब गुरुवार की पूछताछ पर ध्यान केंद्रित है। पुलिस की जाँच और नेताओं के जवाबों के आधार पर आगे की कार्रवाई की दिशा तय हो सकती है। फिलहाल,इस मामले में किसी नए निष्कर्ष या अंतिम कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के भीतर आगे की रणनीति को लेकर हलचल बढ़ गई है। पार्टी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना विरोध जारी रखने की बात पहले भी कह चुकी है। ऐसे में दोनों नेताओं की रिहाई के बाद यह सवाल उठ रहा है कि सीजेपी अब अपने विरोध कार्यक्रम को किस तरह आगे बढ़ाएगी।

पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने पहले कहा था कि दोनों नेताओं के जेल से बाहर आने के बाद बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी और यह तय किया जाएगा कि विरोध को किस रूप में जारी रखा जाए। दीपके ने आरोप लगाया था कि पार्टी के सदस्यों को हिरासत में लेकर डराने की कोशिश की जा रही है। हालाँकि,ये आरोप पार्टी की ओर से लगाए गए हैं और इनके संबंध में स्वतंत्र रूप से कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

दोनों नेताओं की रिहाई के बाद पार्टी की अगली बैठक और संभावित प्रदर्शन को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। सीजेपी ने अभी तक अपने अगले कार्यक्रम की तारीख,समय या स्थान का औपचारिक ऐलान नहीं किया है। पार्टी की ओर से रणनीति तय किए जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वह अपना विरोध किस तरीके से आगे बढ़ाने वाली है।

जेल से बाहर आने के बाद सौरव दास ने बुधवार रात सोशल मीडिया मंच पर करीब नौ दिन बाद पोस्ट किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में ‘ज्ञानू मस्ट गो’ लिखा। इस संदेश को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पार्टी के विरोध से जोड़कर देखा जा रहा है।

वहीं,अभिजीत दीपके की ओर से साझा किए गए एक वीडियो में सौरव दास और आशुतोष रांका ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाते दिखाई दिए। इससे संकेत मिलता है कि जेल से रिहाई के बाद भी पार्टी का विरोध संबंधी रुख चर्चा में बना हुआ है। हालाँकि,सोशल मीडिया पर संदेश और वीडियो साझा किए जाने के बावजूद पार्टी ने अभी तक अगले प्रदर्शन की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है।

सीजेपी के विरोध का केंद्र मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार बने हुए हैं। पार्टी की आगामी गतिविधियों को लेकर अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संगठन अपनी रणनीति किस तरह तय करता है और क्या वह नए प्रदर्शन की घोषणा करता है। फिलहाल,पार्टी की बैठक और उसके बाद होने वाले फैसले का इंतजार किया जा रहा है।

कॉकरोच जनता पार्टी ने इससे पहले 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन करने की घोषणा की थी। इसके बाद कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने की बात भी सामने आई थी। पार्टी के विरोध कार्यक्रमों को लेकर पहले से ही राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा होती रही है। अब दोनों नेताओं की रिहाई के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि संगठन अपने आंदोलन को आगे किस रूप में प्रस्तुत करेगा।

अभिजीत दीपके पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि दोनों नेताओं की रिहाई के बाद बैठक करके आगे का रास्ता तय किया जाएगा। ऐसे में आगामी बैठक पार्टी के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। इसमें विरोध की अगली तारीख,संभावित स्थान और कार्यक्रम के स्वरूप पर निर्णय लिया जा सकता है। हालाँकि,जब तक पार्टी की ओर से औपचारिक घोषणा नहीं की जाती,तब तक अगले प्रदर्शन के बारे में किसी निश्चित जानकारी का दावा नहीं किया जा सकता।

सौरव दास और आशुतोष रांका के सामने फिलहाल दो अहम घटनाक्रम हैं। एक ओर उन्हें जंतर-मंतर पहुँचने से जुड़े मामले में क्राइम ब्रांच के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखना है, वहीं दूसरी ओर सीजेपी की अगली रणनीति को लेकर पार्टी के भीतर चर्चा जारी है। पुलिस की जाँच में उनके बयान और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

दूसरी तरफ,मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीजेपी का विरोध आगे किस दिशा में जाएगा,यह भी देखना होगा। पार्टी ने अब तक नए प्रदर्शन की तारीख और स्थान की घोषणा नहीं की है। ऐसे में आगामी बैठक के बाद ही संगठन की आगे की योजना स्पष्ट होने की उम्मीद है।

फिलहाल,तिहाड़ जेल से रिहाई के तुरंत बाद दोनों नेताओं को मिले नोटिस ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। गुरुवार दोपहर 12 बजे होने वाली पूछताछ और सीजेपी की अगली बैठक पर सबकी नजर बनी हुई है। पुलिस की जाँच से जुड़े निष्कर्ष और पार्टी के अगले कदम आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकते हैं।