टाइगर श्रॉफ (तस्वीर क्रेडिट@itSachinverma)

टाइगर श्रॉफ के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा,रैपिडो राइडर बनकर मुंबई में रेकी करने का आरोप

मुंबई,23 अक्टूबर (युआईटीवी)- मुंबई के जुहू इलाके में बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले की जाँच में नए तथ्य सामने आ रहे हैं। इस मामले में कोटा से गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों में शामिल ऋतिक की भूमिका को लेकर पुलिस कई पहलुओं की पड़ताल कर रही है। जाँच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक,ऋतिक कथित तौर पर पिछले करीब एक साल से मुंबई में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के स्लीपर सेल की तरह सक्रिय था। आरोप है कि उसने अपनी गतिविधियों को सामान्य दिखाने के लिए रैपिडो बाइक टैक्सी राइडर के तौर पर काम किया और इसी बहाने मुंबई के उन पॉश इलाकों में आवाजाही करता रहा,जहाँ बॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियाँ रहती हैं।

पुलिस को संदेह है कि ऋतिक की गतिविधियाँ केवल बाइक टैक्सी चलाने तक सीमित नहीं थीं। सूत्रों के दावों के अनुसार,वह फिल्मी हस्तियों के घरों और उनके आसपास के इलाकों की कथित तौर पर रेकी करता था। बताया जा रहा है कि वह इन जगहों के वीडियो बनाकर गिरोह से जुड़े लोगों तक पहुँचाता था। अब जाँच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि आरोपी ने किन-किन हस्तियों के घरों और आसपास के क्षेत्रों की जानकारी जुटाई थी। साथ ही,पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर जुटाई गई जानकारी का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था।

हालाँकि,जाँच अभी जारी है और ऋतिक की भूमिका को लेकर सामने आए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि तथा पुलिस जाँच के निष्कर्षों का इंतजार है। फिलहाल,अधिकारियों का ध्यान आरोपी की गतिविधियों,उसके संपर्कों और डिजिटल साक्ष्यों की जाँच पर केंद्रित है।

जाँच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक,ऋतिक ने मुंबई में रहते हुए अपनी गतिविधियों को सामान्य बनाए रखने के लिए रैपिडो राइडर के रूप में काम किया। बाइक टैक्सी चलाने के कारण उसका शहर के अलग-अलग इलाकों में आना-जाना सामान्य गतिविधि के तौर पर देखा जा सकता था। पुलिस को संदेह है कि उसने इसी स्थिति का फायदा उठाकर जुहू और मुंबई के अन्य पॉश इलाकों में आवाजाही की।

आरोप है कि राइडर के रूप में काम करते हुए वह फिल्मी हस्तियों के घरों के आसपास पहुँचता था और वहाँ की परिस्थितियों पर नजर रखता था। जाँच एजेंसियों को आशंका है कि इस दौरान उसने कुछ घरों के आसपास की गतिविधियों,आने-जाने वाले रास्तों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारियाँ जुटाने की कोशिश की होगी। सूत्रों के मुताबिक,वह कथित तौर पर इन स्थानों के वीडियो भी बनाता था,जिन्हें बाद में गिरोह से जुड़े लोगों तक पहुँचाया जाता था।

पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि ऋतिक ने कथित रेकी कब शुरू की और इस काम के लिए उसे किसने निर्देश दिए थे। जाँच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी है कि क्या वह किसी व्यक्ति के निर्देश पर काम कर रहा था या उसके संपर्क में गिरोह के कई लोग थे। अधिकारियों को उसके मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों से अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।

डिजिटल जाँच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि आरोपी ने किन लोगों से संपर्क किया,वीडियो या अन्य जानकारी किसके साथ साझा की और उसके फोन में मौजूद सामग्री का इस मामले से क्या संबंध है। इसके साथ ही,पुलिस उसकी मुंबई में गतिविधियों की समयरेखा तैयार करने की कोशिश कर रही है,ताकि कथित रेकी और फायरिंग की घटना के बीच किसी संभावित संबंध की जाँच की जा सके।

मामले में सामने आई एक अन्य जानकारी के मुताबिक,अंधेरी पूर्व में किराए का मकान लेकर रहने से पहले ऋतिक ने मुंबई के अलग-अलग इलाकों में समय बिताया था। सूत्रों के अनुसार,वह कुछ समय तक जुहू और गोरेगांव जैसे इलाकों में भी रहा था। इन क्षेत्रों में फिल्म और टेलीविजन उद्योग से जुड़े कई लोग रहते हैं। इसी वजह से पुलिस अब उसके पुराने ठिकानों और वहाँ बिताए गए समय की भी जाँच कर रही है।

जाँच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ऋतिक का इन इलाकों में रहना सामान्य परिस्थितियों का हिस्सा था या इसके पीछे कथित रेकी से जुड़ा कोई उद्देश्य था। इसके लिए उसके किराए के मकानों,रहने की अवधि और वहाँ आने-जाने वाले लोगों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा सकती है। पुलिस यह भी समझने की कोशिश कर रही है कि उसने अलग-अलग इलाकों में रहने के दौरान किन लोगों से संपर्क बनाए रखा था।

किसी आरोपी का किसी पॉश इलाके में रहना अपने आप में अपराध का प्रमाण नहीं है। ऐसे में जाँच के लिए यह जरूरी होगा कि पुलिस उसके ठिकानों,संपर्कों और कथित गतिविधियों के बीच ठोस संबंध स्थापित करे। अधिकारियों के सामने चुनौती यह है कि उपलब्ध जानकारियों की पुष्टि की जाए और यह निर्धारित किया जाए कि आरोपी की गतिविधियाँ किसी आपराधिक योजना का हिस्सा थीं या नहीं।

ऋतिक को लेकर सामने आया एक अहम पहलू उसके आधार कार्ड से जुड़ा है। सूत्रों के मुताबिक,उसने जुहू के पते पर आधार कार्ड बनवाया था। जाँच एजेंसियाँ अब इस जानकारी की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि उसने उस पते का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया और क्या उसका वहाँ वास्तविक निवास था।

सूत्रों ने आशंका जताई है कि स्थानीय पते से संबंधित दस्तावेजों का इस्तेमाल इलाके में अपनी पहचान स्थापित करने के लिए किया गया हो सकता है। हालाँकि,इस संबंध में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले दस्तावेजों और अन्य संबंधित तथ्यों की जाँच जरूरी है। पुलिस यह भी पता लगा सकती है कि आधार कार्ड बनवाने के लिए कौन-से दस्तावेज दिए गए थे और उनमें दर्ज जानकारी का उसके अन्य रिकॉर्ड से मेल बैठता है या नहीं।

जाँच एजेंसियों के लिए यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण हो सकता है,क्योंकि इससे आरोपी के मुंबई में रहने की अवधि और उसके अलग-अलग ठिकानों के बारे में जानकारी मिल सकती है। यदि दस्तावेजों से उसके पुराने पते और गतिविधियों की पुष्टि होती है,तो जाँच की समयरेखा तैयार करने में मदद मिल सकती है।

सूत्रों के अनुसार,ऋतिक पर आरोप है कि वह फिल्मी हस्तियों के घरों के आसपास घूमकर उनकी सुरक्षा व्यवस्था को समझने की कोशिश करता था। पुलिस को संदेह है कि वह घरों के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों,आसपास मौजूद रास्तों और अलग-अलग समय पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखता था। हालाँकि,इन आरोपों की पुष्टि जाँच के बाद ही हो सकेगी।

यदि कथित रेकी की बात प्रमाणित होती है,तो पुलिस के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि जुटाई गई जानकारी किसी संभावित आपराधिक घटना की तैयारी में इस्तेमाल की गई थी या नहीं। अधिकारी यह भी जाँच कर रहे हैं कि क्या आरोपी ने किसी विशेष व्यक्ति या घर को निशाना बनाने के उद्देश्य से जानकारी इकट्ठा की थी। इसके लिए कथित वीडियो,मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य अहम हो सकते हैं।

मुंबई में फिल्मी हस्तियों की सुरक्षा को लेकर यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है,क्योंकि बड़े कलाकारों के घरों के आसपास आमतौर पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती रहती है। फिर भी,किसी इलाके में संदिग्ध गतिविधि होने की आशंका और किसी अपराध में उसकी भूमिका साबित होना अलग-अलग बातें हैं। पुलिस को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई करनी होगी।

ऋतिक की कथित गतिविधियों के अलावा पुलिस उसके खर्च और पैसों के लेन-देन की भी जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक,मुंबई में रहने के दौरान उसके खर्च के लिए लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े लोगों द्वारा पैसे पहुँचाए जाने का दावा सामने आया है। पुलिस अब इस कथित फंडिंग के स्रोत और लेन-देन के तरीके का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

जाँच अधिकारी यह जानना चाहते हैं कि आरोपी को कितनी रकम मिली,पैसा किस माध्यम से पहुँचाया गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। इसके लिए बैंक खातों, डिजिटल भुगतान और अन्य उपलब्ध वित्तीय रिकॉर्ड की जाँच महत्वपूर्ण हो सकती है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि आरोपी के नियमित खर्च और उसकी आमदनी के बीच कोई असामान्य अंतर था या नहीं।

यदि पैसों के लेन-देन से संबंधित आरोपों की पुष्टि होती है,तो इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि आरोपी मुंबई में किस तरह अपना खर्च चला रहा था और उसके संपर्क किन लोगों से थे। हालाँकि,कथित फंडिंग को लेकर भी जाँच पूरी होने और ठोस साक्ष्य सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में ऋतिक की कथित भूमिका ने जाँच के दायरे को व्यापक बना दिया है। पुलिस के सामने अब कई सवाल हैं। इनमें यह जानना शामिल है कि आरोपी मुंबई में कब आया,उसने रैपिडो राइडर के रूप में कब काम शुरू किया,किन इलाकों में रहा और किन लोगों के संपर्क में था। इसके साथ ही,कथित वीडियो और अन्य जानकारियाँ किसे भेजी गईं तथा उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था,इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

पुलिस उसके डिजिटल उपकरणों, आवास से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन से संभावित सुराग तलाश रही है। इन सभी पहलुओं को जोड़कर यह समझने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी की गतिविधियों का फायरिंग की घटना से क्या संबंध था और क्या इस मामले में कोई व्यापक नेटवर्क सक्रिय था।

फिलहाल,मामले में सामने आई जानकारी सूत्रों के दावों और शुरुआती जाँच पर आधारित है। आरोपी की भूमिका,कथित रेकी और फंडिंग से जुड़े आरोपों की पुष्टि जाँच के निष्कर्षों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी। आने वाले समय में पुलिस की जाँच से यह स्पष्ट हो सकता है कि ऋतिक की गतिविधियाँ किस हद तक इस मामले से जुड़ी थीं और फायरिंग की घटना के पीछे किन लोगों की भूमिका रही।