पीयूष गोयल ने स्वास्थ्य सेवा,विनिर्माण और तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर (तस्वीर क्रेडिट@ddnewsBihar)

जर्मन कंपनियों के लिए भारत में निवेश के बड़े अवसर,पीयूष गोयल ने स्वास्थ्य सेवा, विनिर्माण और तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर

नई दिल्ली,23 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत और जर्मनी के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के प्रयासों के तहत केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को बर्लिन में कई प्रमुख उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं के साथ बैठकें कीं। इन बैठकों में भारत में निवेश बढ़ाने, विनिर्माण क्षमता का विस्तार करने, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने और टिकाऊ निर्माण सामग्री के क्षेत्र में नए अवसर तलाशने पर चर्चा हुई। गोयल ने कहा कि भारत जर्मन कंपनियों के लिए निवेश, उत्पादन और नवाचार के लिहाज से व्यापक संभावनाएँ उपलब्ध कराता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के पास विश्वास,प्रतिस्पर्धात्मकता और एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं के आधार पर मजबूत आर्थिक साझेदारी बनाने का महत्वपूर्ण अवसर है।

बर्लिन में आयोजित बैठकों के दौरान केंद्रीय मंत्री ने जर्मनी के कारोबारी जगत के प्रतिनिधियों को भारत की आर्थिक संभावनाओं और तेजी से विकसित हो रहे विभिन्न क्षेत्रों के बारे में जानकारी दी। उनका जोर इस बात पर रहा कि भारतीय बाजार की बढ़ती माँग, कुशल मानव संसाधन और मजबूत विनिर्माण क्षमता जर्मन कंपनियों के लिए दीर्घकालिक विकास के अवसर पैदा कर सकती है। उन्होंने उद्योग जगत से भारत में निवेश की संभावनाओं का लाभ उठाने और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का आह्वान किया।

पीयूष गोयल ने फ्रेसेनियस ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइकल सेन के साथ बैठक की। इस दौरान भारत के तेजी से बढ़ते स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र, गुणवत्तापूर्ण और किफायती चिकित्सा सेवाओं की बढ़ती माँग तथा देश की विनिर्माण क्षमताओं के आधार पर सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि जर्मन कंपनी भारत में उपलब्ध कुशल कर्मचारियों और विश्वस्तरीय उत्पादन क्षमताओं का इस्तेमाल करके न केवल घरेलू बाजार,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों की जरूरतों को भी पूरा कर सकती है। भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की माँग लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही चिकित्सा उपकरणों,उपचार संबंधी सुविधाओं और किफायती स्वास्थ्य समाधानों की उपलब्धता बेहतर बनाने की जरूरत भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

गोयल ने इस बैठक को सार्थक बताते हुए कहा कि भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत में उत्पादन और कुशल प्रतिभा का लाभ उठाकर कंपनियाँ अपने कारोबार का विस्तार कर सकती हैं। इससे घरेलू स्तर पर विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था में भारत की भूमिका भी मजबूत हो सकती है।

स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भारत और जर्मनी के बीच सहयोग बढ़ने से चिकित्सा उत्पादों के निर्माण,तकनीकी विशेषज्ञता के आदान-प्रदान और बेहतर स्वास्थ्य समाधानों के विकास की संभावनाएँ पैदा हो सकती हैं। हालाँकि,इस तरह के सहयोग का वास्तविक प्रभाव कंपनियों की निवेश योजनाओं और भविष्य में लिए जाने वाले व्यावसायिक फैसलों पर निर्भर करेगा।

केंद्रीय मंत्री ने बेयर के फार्मास्यूटिकल्स विभाग के अध्यक्ष स्टीफन ओएलरिख के साथ भी बैठक की। इस चर्चा में भारत में कंपनी की विस्तार योजनाओं और देश के तेजी से विकसित हो रहे स्वास्थ्य क्षेत्र में अधिक निवेश,नवाचार तथा सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया।

भारत का स्वास्थ्य और औषधि क्षेत्र घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजारों के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में विदेशी कंपनियों के साथ सहयोग से उत्पादन, अनुसंधान और नई तकनीकों के विकास के अवसर बढ़ सकते हैं। गोयल की बैठक का उद्देश्य भारत में उपलब्ध संभावनाओं को सामने रखना और जर्मन कंपनियों को देश में अपनी गतिविधियों का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित करना था।

भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने,गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा समाधान उपलब्ध कराने और औषधि क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहन देने की जरूरत बनी हुई है। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए घरेलू उद्योगों के साथ अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों की भागीदारी भी उपयोगी हो सकती है। हालाँकि,बैठक में बेयर की ओर से किसी निश्चित निवेश राशि या नई परियोजना की औपचारिक घोषणा किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई।

पीयूष गोयल ने बर्लिन में नॉफ ग्रुप के ग्लोबल जनरल पार्टनर मुरात अकयिलदिज के साथ भी बैठक की। इस दौरान भारत में कंपनी के विनिर्माण विस्तार,टिकाऊ निर्माण सामग्री और बुनियादी ढाँचे के विकास से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

भारत में तेजी से हो रहे शहरीकरण और बुनियादी ढाँचे के विस्तार के कारण निर्माण सामग्री की माँग बढ़ रही है। शहरों के विकास,आवासीय परियोजनाओं और औद्योगिक ढाँचे के विस्तार के साथ टिकाऊ तथा गुणवत्तापूर्ण निर्माण समाधानों की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसे में जर्मन कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में निवेश और उत्पादन बढ़ाने के अवसर मौजूद हैं।

बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि भारत की विकास संबंधी जरूरतों और जर्मनी की औद्योगिक विशेषज्ञता के बीच तालमेल किस तरह बढ़ाया जा सकता है। विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से उत्पादन क्षमता के विस्तार और नई तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाएँ पैदा हो सकती हैं। इससे दोनों देशों के उद्योगों को लाभ मिलने के साथ-साथ निर्माण क्षेत्र में बेहतर समाधान विकसित करने में भी मदद मिल सकती है।

गोयल ने व्यापक रूप से जर्मन उद्योग जगत को यह संदेश दिया कि भारत केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार ही नहीं है,बल्कि वैश्विक स्तर पर उत्पादन और आपूर्ति के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत में उपलब्ध कुशल श्रमशक्ति,औद्योगिक क्षमता और बढ़ती माँग विदेशी कंपनियों के लिए कारोबार विस्तार का आधार बन सकती है।

इन कारोबारी बैठकों से पहले पीयूष गोयल ने जर्मन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के इंडिया सेंटर के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में जर्मनी की संघीय आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्री कैथरीना रीचे भी मौजूद थीं। इस अवसर पर गोयल ने कहा कि नया केंद्र भारत और जर्मनी के बीच मजबूत होते संबंधों तथा दोनों देशों के सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी की पूरक क्षमताएँ महत्वाकांक्षी आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए मजबूत आधार उपलब्ध कराती हैं। दोनों देशों के पास ऐसे कई क्षेत्र हैं,जहाँ एक-दूसरे की विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ उठाकर आर्थिक विकास को गति दी जा सकती है। गोयल के मुताबिक,भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता इस साझेदारी को और आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर होने वाली प्रगति का असर दोनों पक्षों के व्यापारिक संबंधों पर पड़ सकता है। ऐसे समझौते का उद्देश्य व्यापार को सुगम बनाना,बाजार तक पहुँच के अवसर बढ़ाना और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना होता है। हालाँकि,इसके संभावित लाभ अंतिम शर्तों और उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।

गोयल ने यह भी कहा कि भारत और जर्मनी मिलकर वैश्विक स्तर पर मजबूत तथा लचीली मूल्य शृंखलाएँ विकसित कर सकते हैं। वैश्विक व्यापार में आपूर्ति शृंखलाओं की स्थिरता का महत्व बढ़ने के बीच विभिन्न देशों और कंपनियों के बीच सहयोग आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो गया है। भारत और जर्मनी की औद्योगिक क्षमताओं का बेहतर तालमेल उत्पादन और व्यापार के नए अवसर खोल सकता है।

बर्लिन स्थित ईएसएमटी बर्लिन की ओर से आयोजित कारोबारी नेताओं की गोलमेज बैठक में भी केंद्रीय मंत्री ने प्रमुख कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से बातचीत की। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार,निवेश और औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

गोयल ने विश्वास जताया कि भारत और जर्मनी के बीच आर्थिक तथा व्यापारिक साझेदारी आने वाले वर्षों में नई ऊँचाइयों तक पहुँच सकती है। उन्होंने कारोबारी नेताओं और निवेशकों से आपसी विकास तथा समृद्धि के लिए नए अवसर तलाशने का आह्वान किया। उनका कहना था कि दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने से उद्योगों को विस्तार के नए रास्ते मिल सकते हैं और वैश्विक बाजारों में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ सकती है।

केंद्रीय मंत्री की बर्लिन यात्रा के दौरान हुई बैठकों का मुख्य उद्देश्य जर्मन कंपनियों के सामने भारत में निवेश और उत्पादन की संभावनाओं को रेखांकित करना रहा। स्वास्थ्य सेवा, औषधि, निर्माण सामग्री और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में बातचीत से यह संकेत मिला कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को कई दिशाओं में आगे बढ़ाया जा सकता है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन चर्चाओं के बाद कंपनियाँ भारत में निवेश, विनिर्माण विस्तार और तकनीकी सहयोग को लेकर क्या कदम उठाती हैं। फिलहाल, पीयूष गोयल ने भारत को जर्मन उद्योगों के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार के रूप में प्रस्तुत करते हुए दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया है।