विदेश मंत्री एस. जयशंकर (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में,जयशंकर बोले- बातचीत पूरी होने तक कुछ भी तय नहीं

नई दिल्ली,23 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि दोनों देशों के बीच इस समझौते पर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। हालाँकि,उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक समझौते को औपचारिक रूप से अंतिम रूप नहीं दे दिया जाता,तब तक इसे पूरा हुआ नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, बातचीत के आखिरी दौर में कई तरह की चुनौतियाँ सामने आती हैं और फिलहाल वार्ताकार इन्हीं मुद्दों को सुलझाने में जुटे हैं।

नई दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी वर्ल्ड समिट के एक सत्र में बोलते हुए जयशंकर ने भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की मौजूदा स्थिति पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भी संकेत दिया है कि बातचीत अपने अंतिम चरण में पहुँच रही है। जयशंकर ने कहा कि उन्होंने भी इस दिशा में हो रही प्रगति की बात कही है। हालाँकि, उन्होंने साथ ही आगाह किया कि किसी भी समझौते की सफलता का आकलन तब तक नहीं किया जा सकता,जब तक सभी जरूरी मुद्दों पर सहमति बनाकर उसे औपचारिक रूप से पूरा नहीं कर लिया जाता।

विदेश मंत्री ने कहा कि बातचीत के अंतिम चरण में पहुँचने का अर्थ यह नहीं है कि समझौता अपने आप हो जाएगा। अक्सर आखिरी दौर में ऐसे मुद्दे सामने आते हैं,जिन पर दोनों पक्षों को अतिरिक्त चर्चा करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि बातचीत के अंतिम चरण या उससे ठीक पहले के दौर में अपनी अलग चुनौतियाँ होती हैं और वार्ता में शामिल टीमें फिलहाल इन्हीं चुनौतियों से निपट रही हैं।

जब विदेश मंत्री से पूछा गया कि व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में किन मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है,तो उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया। जयशंकर ने कहा कि इन चुनौतियों के बारे में सार्वजनिक रूप से बताना उचित नहीं होगा, क्योंकि उन्हें सुलझाने की जिम्मेदारी वार्ताकारों की है। उनके इस जवाब से स्पष्ट हुआ कि दोनों देशों के बीच बातचीत अभी जारी है और कुछ संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है।

व्यापार समझौते जैसे बड़े आर्थिक करार में कई विषयों पर सहमति बनाना जरूरी होता है। इनमें वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार,बाजार तक पहुँच,शुल्क संबंधी व्यवस्थाएँ और दोनों देशों के कारोबारी हित शामिल हो सकते हैं। हालाँकि,जयशंकर ने यह स्पष्ट नहीं किया कि भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा बातचीत में किन विशेष मुद्दों पर मतभेद या चर्चा बाकी है। इसलिए समझौते की संभावित शर्तों को लेकर किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुँचना अभी जल्दबाजी होगी।

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा,रक्षा और तकनीक सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। ऐसे में व्यापार समझौता इस साझेदारी को अधिक व्यवस्थित और व्यापक बनाने में मदद कर सकता है। हालाँकि, इसके वास्तविक प्रभाव का पता समझौते की अंतिम शर्तें सामने आने के बाद ही चल सकेगा।

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर कई वर्षों से चर्चा चल रही है। दोनों देश अपने कारोबारी संबंधों को मजबूत करने और एक-दूसरे के बाजारों में व्यापार के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक सहयोग का असर दोनों देशों के उद्योगों, कारोबारियों और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

इस तरह के समझौते का उद्देश्य आम तौर पर व्यापार से जुड़ी बाधाओं को कम करना, बाजार तक पहुँच बेहतर बनाना और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा देना होता है। इससे कंपनियों को नए बाजारों में विस्तार करने के अवसर मिल सकते हैं और निवेश के नए रास्ते खुल सकते हैं। हालाँकि,दोनों देशों के आर्थिक हित हमेशा पूरी तरह एक जैसे नहीं होते। इसलिए समझौते की शर्तों पर बातचीत के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतों और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखना पड़ता है।

जयशंकर का बयान ऐसे समय में आया है,जब दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक संपर्क जारी हैं। उनके मुताबिक,वार्ता में प्रगति हुई है,लेकिन अभी अंतिम सहमति और औपचारिक प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। इससे यह संकेत मिलता है कि समझौते को लेकर सकारात्मक उम्मीदें होने के बावजूद दोनों पक्ष सावधानी के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के संदर्भ में जयशंकर की टिप्पणी हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ हुई उनकी बैठक के कारण भी महत्वपूर्ण है। इस बैठक में दोनों देशों के बीच सहयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार,बातचीत में पश्चिम एशिया के घटनाक्रम सहित क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक के दौरान ऊर्जा व्यापार बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया। अमेरिकी पक्ष के अनुसार,अमेरिका से ऊर्जा की आपूर्ति बढ़ने से भारत को अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और देश की बड़ी उपभोक्ता माँग को पूरा करने में मदद मिल सकती है। ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है,क्योंकि देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था और औद्योगिक गतिविधियों के साथ ऊर्जा की जरूरतें भी बढ़ रही हैं।

ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने से किसी एक क्षेत्र या आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता कम करने में सहायता मिल सकती है। वहीं,अमेरिका के लिए भारत जैसे बड़े बाजार के साथ ऊर्जा व्यापार बढ़ाना आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है। हालाँकि,वास्तविक लाभ आपूर्ति की शर्तों,कीमतों,परिवहन लागत और बाजार की जरूरतों पर निर्भर करेगा।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत और अमेरिका के बीच रक्षा तथा असैन्य परमाणु सहयोग के क्षेत्रों में हुई प्रगति की सराहना की। उन्होंने अमेरिकी प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों की अधिक खरीद को भी प्रोत्साहित किया। इससे स्पष्ट है कि दोनों देशों की बातचीत केवल व्यापार समझौते तक सीमित नहीं है,बल्कि व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

रक्षा सहयोग भारत-अमेरिका संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। दोनों देश रक्षा उपकरणों,तकनीकी सहयोग और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर संपर्क बनाए हुए हैं। इसके साथ ही असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग भी दोनों देशों की दीर्घकालिक ऊर्जा और तकनीकी प्राथमिकताओं से जुड़ा हुआ है। इन क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए नियमित संवाद और आपसी विश्वास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बैठक में मौजूद भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने बातचीत को उत्पादक बताया। उन्होंने कहा कि चर्चा का मुख्य उद्देश्य रक्षा, ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकियों और व्यापार के क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करना था। उनके अनुसार,दोनों देश अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम करने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

भारत और अमेरिका के संबंधों में व्यापार के अलावा ऊर्जा सुरक्षा,रक्षा,उभरती तकनीक और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग का भी महत्वपूर्ण स्थान है। दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय बैठकों का उद्देश्य इन क्षेत्रों में साझा हितों की पहचान करना और सहयोग के नए अवसर तलाशना है। ऐसे में प्रस्तावित व्यापार समझौते पर जारी बातचीत को व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

हालाँकि,जयशंकर ने साफ कर दिया है कि बातचीत के अंतिम चरण में पहुँचने के बावजूद समझौते को लेकर अभी निश्चित घोषणा नहीं की जा सकती। वार्ताकारों को शेष मुद्दों पर सहमति बनानी होगी और इसके बाद समझौते को औपचारिक रूप देना होगा। इसलिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों पक्ष बातचीत को आगे बढ़ा रहे हैं,लेकिन अंतिम परिणाम अभी सामने नहीं आया है।

विदेश मंत्री के बयान से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत जरूर मिले हैं,लेकिन उन्होंने जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने से बचने की सलाह भी दी है। आने वाले समय में वार्ता की प्रगति और दोनों देशों की सहमति यह तय करेगी कि समझौता कब और किन शर्तों के साथ अंतिम रूप लेता है। यदि यह करार संपन्न होता है, तो इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलने की संभावना होगी। फिलहाल, दोनों पक्षों की प्राथमिकता शेष चुनौतियों को सुलझाकर बातचीत को सफल निष्कर्ष तक पहुँचाना है।