आसाराम की मुश्किलें फिर बढ़ीं, तय समय पर जेल में सरेंडर नहीं करने पर नया मुकदमा दर्ज (तस्वीर क्रेडिट@PeoplesUpdate)

आसाराम की मुश्किलें फिर बढ़ीं, तय समय पर जेल में सरेंडर नहीं करने पर नया मुकदमा दर्ज; रात में प्रवेश से जेल प्रशासन का इनकार

जोधपुर,28 अक्टूबर (युआईटीवी)- नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। 20 दिन की अंतरिम मेडिकल पैरोल समाप्त होने के बाद निर्धारित समय पर जोधपुर केंद्रीय कारागृह में आत्मसमर्पण नहीं करने के मामले में उसके खिलाफ नया मुकदमा दर्ज किया गया है। जेल प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान के जोधपुर स्थित रातानाडा थाना पुलिस ने राजस्थान कारागार अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को 27 अक्टूबर 2026 को शाम पाँच बजे तक जेल में वापस पहुँचने का निर्देश दिया था,लेकिन वह निर्धारित समय से लगभग पौने छह घंटे की देरी से रात 10 बजकर 40 मिनट पर जोधपुर केंद्रीय कारागृह पहुँचा। हालाँकि, रात में जेल में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलने के कारण उसे वापस अस्पताल ले जाना पड़ा।

इस घटनाक्रम के बाद आसाराम की पैरोल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश और जेल में प्रवेश से संबंधित नियमों को लेकर मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। फिलहाल पुलिस ने नए मामले की जाँच शुरू कर दी है,जबकि आसाराम को बुधवार को आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद जेल में दाखिल कराने की तैयारी की जा रही है।

निर्धारित समय सीमा के भीतर जेल में आत्मसमर्पण नहीं करने के मामले को जेल प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। केंद्रीय कारागृह के प्रहरी बनवारीलाल की ओर से दी गई लिखित शिकायत के आधार पर रातानाडा थाना पुलिस ने 27 अक्टूबर 2026 को आसाराम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। यह मामला राजस्थान कारागार अधिनियम की धारा 58(ख) के तहत दर्ज किया गया है। प्रकरण संख्या 206/2026 बताई गई है।

पुलिस ने मामले की जाँच सहायक उपनिरीक्षक भवानीसिंह को सौंपी है। जाँच के दौरान निर्धारित समय पर जेल में उपस्थिति नहीं होने,जोधपुर पहुँचने में हुई देरी और इससे संबंधित परिस्थितियों की पड़ताल की जाएगी। जेल प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आसाराम को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार मंगलवार शाम पाँच बजे तक जेल में आत्मसमर्पण करना था,लेकिन वह रात करीब 10 बजकर 40 मिनट पर जोधपुर केंद्रीय कारागृह पहुँचा। इस तरह निर्धारित समय बीत जाने के बाद जेल पहुँचने के कारण उसके खिलाफ एक और कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है।

आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बाद छह अक्टूबर को उपचार के लिए 20 दिन की अंतरिम मेडिकल पैरोल दी गई थी। इस अवधि के दौरान उसे चिकित्सा सुविधा लेने की अनुमति मिली थी। पैरोल की अवधि 27 अक्टूबर को समाप्त हो रही थी, जिसके बाद उसे जेल लौटना अनिवार्य था।

हालाँकि,स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का हवाला देते हुए आसाराम के अधिवक्ताओं ने पैरोल की अवधि बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में उसकी चिकित्सा स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त समय देने की माँग की गई थी,लेकिन शीर्ष अदालत ने पैरोल बढ़ाने की माँग स्वीकार नहीं की और उसे मंगलवार शाम पाँच बजे तक जोधपुर केंद्रीय कारागृह में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।

इस आदेश के बाद आसाराम को निर्धारित समय के भीतर जोधपुर पहुँचाने की व्यवस्था की गई। स्वास्थ्य कारणों से वह मध्य प्रदेश के उज्जैन अथवा इंदौर में उपचार करा रहा था। इसके बाद उसे एयर एम्बुलेंस के जरिए जोधपुर लाया गया। हालाँकि,यात्रा और अन्य प्रक्रियाओं के कारण वह निर्धारित समय पर जेल नहीं पहुँच सका।

मंगलवार रात आसाराम को एयर एम्बुलेंस से जोधपुर लाया गया। हवाई अड्डे से उसे पुलिस और समर्थकों के काफिले के बीच केंद्रीय कारागृह ले जाया गया। रात करीब 10 बजकर 40 मिनट पर उसका काफिला जेल पहुँचा। इस समय तक सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारित समय सीमा समाप्त हुए कई घंटे बीत चुके थे।

जेल प्रशासन ने रात में कैदी को दाखिल करने से संबंधित नियमों का हवाला देते हुए उसे भीतर प्रवेश देने से इनकार कर दिया। बताया गया कि जेल मैनुअल के अनुसार सूर्यास्त और निर्धारित समय के बाद कैदी को जेल में दाखिल करने की प्रक्रिया पर प्रतिबंध लागू होता है। इसी आधार पर जेल के दरवाजे नहीं खोले गए और आसाराम को जेल के भीतर नहीं लिया गया।

इस घटनाक्रम के बाद उसके साथ मौजूद पुलिसकर्मी और वकील उसे जोधपुर के भगत की कोठी क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल ले गए। वहाँ उसे निगरानी में रखा गया है। अस्पताल में उसकी चिकित्सा स्थिति और आवश्यक औपचारिकताओं को ध्यान में रखते हुए आगे की प्रक्रिया की जा रही है।

जेल में प्रवेश नहीं मिलने के बाद अब आसाराम को दोबारा केंद्रीय कारागृह में दाखिल कराने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए आवश्यक कागजी कार्रवाई और चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी की जानी है। अधिकारियों की ओर से संबंधित औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद बुधवार को उसे जेल में दाखिल कराने की व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई है।

इस पूरे मामले में अब दो पहलुओं पर ध्यान केंद्रित है। पहला,सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद निर्धारित समय पर जेल में आत्मसमर्पण नहीं हो पाना और दूसरा,देर रात जेल पहुँचने पर प्रवेश नहीं मिलना। पुलिस की ओर से दर्ज नए मुकदमे में इन परिस्थितियों की जाँच की जाएगी।

नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम के लिए पैरोल की अवधि समाप्त होने के बाद यह घटनाक्रम नई कानूनी चुनौती बनकर सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट से पैरोल बढ़ाने की राहत नहीं मिलने,निर्धारित समय के बाद जेल पहुँचने और इसके बाद प्राथमिकी दर्ज होने से मामला और गंभीर हो गया है। अब पुलिस जाँच और जेल में दोबारा दाखिले की प्रक्रिया के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।