नई दिल्ली,28 अक्टूबर (युआईटीवी)- भीषण चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के तट से टकराने के बाद देश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में हवाई यातायात प्रभावित होने लगा है। खराब मौसम और तेज हवाओं के कारण कई हवाईअड्डों पर उड़ानों का संचालन रोकना पड़ा है, जबकि विभिन्न एयरलाइंस ने भी अपनी कई सेवाएँ रद्द कर दी हैं। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए नागर विमानन मंत्रालय ने एयरलाइंस तथा हवाईअड्डा संचालकों के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि खराब मौसम के दौरान विमानन सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का सख्ती से पालन किया जाए और उड़ानों में बदलाव की स्थिति में यात्रियों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
चक्रवात के प्रभाव का आकलन करने और हवाई यातायात की स्थिति की समीक्षा के लिए मंत्रालय ने उच्चस्तरीय बैठक भी आयोजित की। इसमें विमानन सुरक्षा, उड़ानों के संचालन और यात्रियों को होने वाली असुविधा कम करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। मंत्रालय के अनुसार, तूफान का सबसे अधिक प्रभाव तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा में पड़ने की आशंका है। विशेष रूप से भुवनेश्वर से आने-जाने वाली उड़ानों पर इसका असर हो सकता है। इसके अलावा तूफान की दिशा और मौसम की स्थिति के आधार पर हैदराबाद, वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर में भी हवाई सेवाएँ प्रभावित होने की संभावना जताई गई है।
चक्रवात के कारण विशाखापट्टनम हवाईअड्डे पर 27 अक्टूबर की दोपहर से ही उड़ानों का संचालन निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद विजयवाड़ा और राजमुंदरी हवाईअड्डों पर भी 27 अक्टूबर को शाम सात बजे के बाद सभी उड़ानें रोक दी गईं। खराब मौसम के बीच उड़ानों को संचालित करने में सुरक्षा संबंधी जोखिम को देखते हुए यह कदम उठाया गया।
इसके अलावा दिल्ली से भोगापुरम और भोगापुरम से दिल्ली के बीच 28 अक्टूबर को संचालित होने वाली उड़ान सेवा भी रद्द कर दी गई है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना बनाने से पहले संबंधित एयरलाइन से उड़ान की ताजा स्थिति की जानकारी जरूर प्राप्त करें।
चक्रवात के कारण उड़ानों के समय में बदलाव,रद्दीकरण और वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत बढ़ गई है। ऐसे में यात्रियों को हवाईअड्डे पहुँचने से पहले अपनी यात्रा से संबंधित जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है। मंत्रालय ने एयरलाइंस को निर्देश दिया है कि वे यात्रियों को उड़ानों में होने वाले बदलावों के बारे में समय रहते सूचित करें,ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
चक्रवात के प्रभाव के कारण एयर इंडिया ने दिल्ली-विशाखापट्टनम-दिल्ली मार्ग पर 27 अक्टूबर और दिल्ली-विजयवाड़ा-दिल्ली मार्ग पर 28 अक्टूबर की सेवाओं से जुड़ी कुल छह उड़ानें रद्द कर दी हैं। इन रद्दीकरणों से प्रभावित यात्रियों को अपनी यात्रा की नई योजना बनाने की जरूरत पड़ सकती है।
वहीं,एयर इंडिया एक्सप्रेस ने कुल 13 उड़ानें रद्द की हैं। इनमें विशाखापट्टनम से हैदराबाद, बेंगलुरु और विजयवाड़ा के बीच संचालित होने वाली अधिकांश उड़ानें शामिल हैं। खराब मौसम के चलते वाराणसी-बैंकॉक और बैंकॉक-विशाखापट्टनम के बीच चलने वाली सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।
उड़ानों के रद्द होने से यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुँचने में देरी हो सकती है। ऐसे में एयरलाइंस को री-बुकिंग और रिफंड से संबंधित निर्धारित नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। यात्रियों को भी सलाह दी गई है कि वे अपनी टिकट,यात्रा की तारीख और उपलब्ध विकल्पों के बारे में संबंधित एयरलाइन से जानकारी लें।
चक्रवात के प्रभाव को देखते हुए इंडिगो ने विशाखापट्टनम के लिए अपनी सभी उड़ानों का संचालन निलंबित कर दिया है। इसके अलावा विजयवाड़ा और राजमुंदरी में भी 27 अक्टूबर की शाम के बाद उड़ानों का संचालन रोक दिया गया। मौसम की स्थिति को देखते हुए सेवाओं को लेकर आगे के फैसले लिए जा सकते हैं।
अकासा एयर ने भी 28 अक्टूबर के लिए दिल्ली-भोगापुरम और वापसी की उड़ानें रद्द कर दी हैं। दूसरी ओर,उपलब्ध जानकारी के अनुसार एलायंस एयर ने अब तक किसी उड़ान को रद्द करने की घोषणा नहीं की है और उसका परिचालन सामान्य बना हुआ है। हालाँकि, यात्रियों को अपनी उड़ान की स्थिति की पुष्टि करने के बाद ही हवाईअड्डे के लिए निकलने की सलाह दी गई है।
मंत्रालय ने कहा है कि तूफान के दौरान उड़ानों का संचालन मौसम,हवाईअड्डे की स्थिति और सुरक्षा संबंधी आकलन पर निर्भर करेगा। इसलिए यात्रियों को एयरलाइन की ओर से जारी सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए और यात्रा से जुड़े किसी भी बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
चक्रवात से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए नागर विमानन मंत्रालय ने विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों, एयरलाइंस और राज्य प्रशासन के बीच समन्वय मजबूत किया है। इस व्यवस्था में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, नागर विमानन महानिदेशालय,नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो और भारतीय मौसम विभाग शामिल हैं। इनके अलावा एयरलाइंस, हवाईअड्डा संचालकों, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल तथा आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ भी तालमेल बढ़ाया गया है।
इस समन्वय का उद्देश्य मौसम की स्थिति पर नजर रखना,हवाईअड्डों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जरूरत पड़ने पर समय रहते परिचालन संबंधी फैसले लेना है। चक्रवात के कारण तटीय इलाकों में भारी बारिश,तेज हवाओं और जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे हवाईअड्डों तक पहुँचने वाली सड़कों पर भी असर पड़ने की आशंका है। इसलिए केवल उड़ान की स्थिति ही नहीं,बल्कि हवाईअड्डे तक पहुँचने के रास्तों की जानकारी लेना भी यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है।
नागर विमानन मंत्रालय ने यात्रियों से अपील की है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की पुष्टि जरूर करें। इसके लिए एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल ऐप,हेल्पलाइन या एसएमएस के माध्यम से जानकारी प्राप्त की जा सकती है। मंत्रालय ने कहा है कि उड़ान की पुष्टि होने के बाद ही हवाईअड्डे के लिए रवाना हों।
यात्रियों को अतिरिक्त यात्रा समय लेकर चलने की भी सलाह दी गई है,क्योंकि तटीय आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कुछ हिस्सों में जलभराव और सड़क बंद होने जैसी समस्याएँ सामने आ सकती हैं। खराब मौसम के कारण सड़क मार्ग से हवाईअड्डे तक पहुँचने में सामान्य से अधिक समय लग सकता है। ऐसे में यात्रा की योजना बनाते समय मौसम और यातायात की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।
मंत्रालय ने एयरलाइंस और हवाईअड्डा संचालकों को वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग यात्रियों, छोटे बच्चों के साथ यात्रा कर रहे परिवारों और चिकित्सा संबंधी जरूरत वाले यात्रियों को विशेष सहायता देने के निर्देश भी दिए हैं। उड़ानों में देरी या रद्दीकरण के दौरान इन यात्रियों को जरूरी जानकारी और सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
यदि उड़ान रद्द होने, री-बुकिंग या रिफंड से जुड़ी किसी समस्या का समाधान नहीं होता है, तो यात्रियों को पहले संबंधित एयरलाइन से संपर्क करने की सलाह दी गई है। इसके बाद भी शिकायत का निपटारा नहीं होने पर वे एयरसेवा पोर्टल या उसके मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के कारण विमानन सेवाओं पर पड़ रहे असर के बीच मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। मौसम की स्थिति के अनुसार उड़ानों के संचालन में बदलाव किए जा सकते हैं। ऐसे में यात्रियों के लिए जरूरी है कि वे यात्रा से पहले आधिकारिक सूचनाओं की जाँच करें,एयरलाइन के संपर्क में रहें और अपनी यात्रा की योजना में संभावित देरी या बदलाव के लिए पर्याप्त समय रखें।
