नई दिल्ली,30 अक्टूबर (युआईटीवी)- रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के दौरान एक बार फिर आम नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। मध्य यूक्रेन के निप्रो रेलवे स्टेशन पर गुरुवार, 29 अक्टूबर को रूस की ओर से किए गए ड्रोन हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य घायल हो गए। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, हमला उस समय हुआ,जब स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर यात्री ट्रेनें खड़ी थीं और बड़ी संख्या में लोग वहाँ मौजूद थे। हमले के बाद स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी मच गई। घायलों को अस्पताल पहुँचाने और प्रभावित इलाके में राहत एवं बचाव कार्य चलाने के लिए आपातकालीन सेवाओं को तैनात किया गया। इस घटना ने एक बार फिर युद्ध के बीच नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यूक्रेन के अधिकारियों के अनुसार, रूसी सेना ने निप्रो रेलवे स्टेशन पर खड़ी दो ट्रेनों को निशाना बनाया। इनमें एक कम्यूटर ट्रेन और दूसरी यात्री ट्रेन बताई गई है। हमले में जेट इंजन से संचालित ड्रोन का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। शुरुआती विवरणों के मुताबिक, ड्रोन स्टेशन के प्लेटफॉर्म से टकराया, जहाँ डनिप्रो से जापोरिजिया जाने वाली ट्रेन संख्या 866 खड़ी थी। घटना के समय प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों को सँभलने का मौका तक नहीं मिला और हमले के बाद वहाँ दहशत फैल गई।
निप्रॉपेट्रोव्स्क क्षेत्र के गवर्नर ओलेक्सांद्र गांझा ने सोशल मीडिया मंच टेलीग्राम पर जानकारी देते हुए बताया कि हमले में 13 लोगों की मौत हो गई। उन्होंने शुरुआत में कम से कम पाँच लोगों के घायल होने की जानकारी दी थी। बाद में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने घायलों की संख्या 10 बताई। इस तरह घटना में मृतकों की संख्या 13 तक पहुँच गई,जबकि 10 लोग घायल हुए हैं।
डनिप्रो के मेयर बोरिस फिलाटोव ने इस घटना को एक बड़ी त्रासदी बताया। उनके अनुसार, ड्रोन ने नागरिकों की इलेक्ट्रिक ट्रेन को निशाना बनाया, जिससे कई लोगों की जान चली गई और अनेक लोग घायल हो गए। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की मौजूदगी के कारण हमले का असर व्यापक रहा। हालाँकि,घटना से जुड़ी विस्तृत परिस्थितियों और प्रत्येक ट्रेन को हुए नुकसान की पूरी जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
यूक्रेन में रेलवे आम नागरिकों के आवागमन के साथ-साथ युद्ध के दौरान परिवहन का एक महत्वपूर्ण साधन बना हुआ है। ऐसे में रेलवे स्टेशन और यात्री ट्रेनों पर हमले से लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ जाती है। निप्रो स्टेशन पर हुई घटना के बाद राहत एवं बचाव दलों ने प्रभावित क्षेत्र में काम शुरू किया। घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही घटनास्थल पर स्थिति का आकलन किया गया।
यूक्रेन की सरकारी रेलवे कंपनी के प्रमुख ओलेक्सांद्र पर्टसोव्स्की ने बताया कि हमले से पहले ही इलाके में खतरे का स्तर बढ़ाए जाने की घोषणा कर दी गई थी। इसके बावजूद प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में यात्री मौजूद थे। रेलवे प्रशासन के मुताबिक,जेट-संचालित ड्रोन डनिप्रो स्टेशन के एक प्लेटफॉर्म से टकराया। उस समय डनिप्रो से जापोरिजिया जाने वाली ट्रेन संख्या 866 वहीं खड़ी थी।
हालाँकि, खतरे की चेतावनी जारी होने के बावजूद यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं पहुँचाया जा सका और हमले के समय स्टेशन पर सुरक्षा के क्या इंतजाम थे,इन सवालों का विस्तृत जवाब सामने आना बाकी है। घटना की परिस्थितियों को समझने के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि चेतावनी किस समय जारी की गई थी और यात्रियों को उससे बचाव के लिए कितना समय मिला।
युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में हवाई हमलों की चेतावनी मिलने पर नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने की चुनौती बनी रहती है। रेलवे स्टेशनों पर यह चुनौती और बढ़ जाती है, क्योंकि वहाँ अलग-अलग स्थानों से आए यात्रियों की भीड़ होती है और कई लोग ट्रेन के प्रस्थान का इंतजार कर रहे होते हैं। निप्रो की घटना ने ऐसे स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन तैयारियों की अहमियत को फिर से उजागर किया है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने निप्रो रेलवे स्टेशन पर हुए हमले की निंदा की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से कहा कि रूसी सेना ने उस प्लेटफॉर्म को निशाना बनाया,जहाँ एक कम्यूटर ट्रेन और एक यात्री ट्रेन खड़ी थीं। उन्होंने बताया कि हमले में 13 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 10 अन्य लोग घायल हुए हैं।
जेलेंस्की ने मृतकों के परिवारों और उनके प्रियजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर जरूरी आपातकालीन सेवाएँ काम कर रही हैं। राष्ट्रपति ने राहत कार्य में जुटे कर्मचारियों की भूमिका का भी उल्लेख किया और संकेत दिया कि प्रभावित लोगों को सहायता पहुँचाना प्राथमिकता है।
इस हमले के बाद यूक्रेन सरकार ने एक बार फिर रूस के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ाने की अपील की है। जेलेंस्की का कहना है कि रूस की सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए केवल बयान पर्याप्त नहीं हैं,बल्कि ऐसे कदम उठाने की जरूरत है जिनका असर मॉस्को की युद्ध क्षमता और उससे जुड़े आर्थिक ढाँचे पर पड़े।
निप्रो हमले के बाद जेलेंस्की ने अमेरिका, यूरोपीय संघ और जी-7 देशों से रूस के खिलाफ नए और कड़े प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि रूस के कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूहों और उसके ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के बाद भी हमले जारी हैं। उनके अनुसार,प्रतिबंधों में राहत देने के बजाय रूस की सैन्य कार्रवाई के जवाब में दबाव बनाए रखना जरूरी है।
जेलेंस्की ने अपने बयान में कहा कि जब तक रूस का युद्ध जारी है,तब तक मॉस्को और उसके युद्ध तंत्र पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने अमेरिका, यूरोप और जी-7 देशों से इस दिशा में निर्णायक कदम उठाने की अपील की। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने उन देशों और सहयोगियों का आभार भी जताया,जो रूस पर आर्थिक एवं राजनीतिक दबाव बढ़ाने के प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं।
रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का मुद्दा युद्ध के दौरान लगातार अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति का हिस्सा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र, वित्तीय गतिविधियों और प्रभावशाली रूसी कारोबारियों से जुड़े प्रतिबंधों के जरिए रूस पर दबाव बनाने की कोशिश की गई है। हालाँजी,प्रतिबंधों में किसी भी बदलाव का प्रभाव संबंधित देशों की नीतियों और आपसी सहमति पर निर्भर करता है। जेलेंस्की की ताजा अपील ऐसे समय आई है,जब निप्रो में हुए हमले ने युद्ध के मानवीय प्रभावों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 में शुरू हुआ पूर्ण स्तर का युद्ध अब लंबे समय से जारी है। इस दौरान सैन्य ठिकानों के साथ-साथ ऊर्जा ढाँचे,परिवहन नेटवर्क और नागरिक क्षेत्रों पर हमलों की खबरें सामने आती रही हैं। युद्ध के कारण दोनों देशों में बड़े पैमाने पर लोगों को विस्थापन,जान-माल के नुकसान और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।
निप्रो रेलवे स्टेशन पर हुआ ताजा हमला इस बात की याद दिलाता है कि युद्ध का सबसे गंभीर असर आम नागरिकों पर पड़ता है। ट्रेन में सफर करने वाले यात्री,अपने काम पर जाने वाले लोग और परिवारों के साथ यात्रा कर रहे नागरिक अक्सर ऐसे हमलों की चपेट में आ जाते हैं। इस घटना में 13 लोगों की मौत और 10 लोगों के घायल होने से प्रभावित परिवारों को गहरा नुकसान पहुँचा है।
अब इस घटना के बाद राहत कार्यों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी। यूक्रेन ने रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों की माँग तेज कर दी है,जबकि हमले की परिस्थितियों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों के जवाब मिलना जरूरी है। युद्ध समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पहले की तरह बनी हुई है। निप्रो की घटना ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि लंबे समय से जारी संघर्ष का मानवीय नुकसान लगातार बढ़ रहा है और आम लोगों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
