मुंबई,31 अक्टूबर (युआईटीवी)- पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपने ‘ऑरा इंडिया टूर’ को लेकर चर्चा में हैं। शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित इस टूर के पहले कॉन्सर्ट में उन्होंने अपनी प्रस्तुति के साथ-साथ उन आलोचनाओं पर भी खुलकर प्रतिक्रिया दी,जो पिछले कुछ महीनों से उनके बयानों और राजनीतिक मुद्दों पर रुख को लेकर सामने आ रही थीं। मंच से दर्शकों को संबोधित करते हुए दिलजीत ने कहा कि वह एक कलाकार हैं और लोगों से प्यार करते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी चुप्पी को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने पंजाबियों की संघर्ष करने की परंपरा का जिक्र करते हुए आलोचकों से कहा कि उन्हें यह सिखाने की जरूरत नहीं है कि लड़ाइयां कैसे लड़ी जाती हैं।
दिलजीत की यह प्रतिक्रिया उन विवादों के संदर्भ में आई है,जो कुछ महीने पहले दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनों के दौरान शुरू हुए थे। उस समय उनकी फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर भी टिप्पणियाँ की गई थीं। कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि दिलजीत ने राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों से दूरी बनाए रखी और छात्र आंदोलन के समर्थन में खुलकर सामने नहीं आए। उनके ‘मैं एक कलाकार हूँ’ वाले बयान को लेकर भी आलोचना हुई थी। शुक्रवार को दिल्ली के कॉन्सर्ट में उन्होंने इसी मुद्दे पर अपनी बात रखी और कहा कि वह सभी लोगों से प्यार करते हैं,लेकिन उन्हें अपनी चुप्पी और काम करने के तरीके को लेकर किसी के सामने सफाई देने की जरूरत नहीं है।
दिल्ली में अपने कॉन्सर्ट के दौरान दिलजीत ने बड़ी संख्या में मौजूद प्रशंसकों को संबोधित करते हुए कहा, “मैं आप सभी से प्यार करता हूँ क्योंकि मैं एक कलाकार हूँ,भाई। मैं चुप हूँ, तो मुझे चुप ही रहने दो। मैं आप सभी का समर्थन करता हूँ,लेकिन पंजाबियों को यह मत सिखाओ कि लड़ते कैसे हैं।”
उनके इस बयान को हाल के विवादों का सीधा जवाब माना जा रहा है। दिलजीत ने अपनी बात में यह बताने की कोशिश की कि किसी मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कम बोलने का मतलब यह नहीं है कि वह उस मुद्दे या उससे जुड़े लोगों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि वह लोगों का समर्थन करते हैं और सभी के प्रति उनके मन में प्यार है। हालाँकि,उन्होंने यह भी साफ किया कि पंजाबियों के संघर्ष और उनके इतिहास को लेकर किसी को उन्हें सीख देने की आवश्यकता नहीं है।
दिलजीत का यह बयान सामने आते ही कॉन्सर्ट में मौजूद प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बन गया। उनके समर्थक इसे आलोचनाओं के खिलाफ उनका स्पष्ट संदेश मान रहे हैं। वहीं, उनके बयान के बाद एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई है कि कलाकारों से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देने की कितनी अपेक्षा की जानी चाहिए।
दिलजीत ने कॉन्सर्ट के दौरान अपनी फिल्म ‘सतलुज’ का जिक्र करते हुए उन लोगों को भी जवाब दिया,जिन्होंने मंचों पर फिल्म का मजाक उड़ाया था। उन्होंने कहा कि जिस फिल्म को लेकर टिप्पणी की जा रही है,वह जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी और उनके काम से जुड़ी है। इस फिल्म को बनाने और दर्शकों तक पहुँचाने के लिए टीम ने लंबे समय तक संघर्ष किया है।
गायक ने कहा, “जिस फिल्म का आप मंच पर मजाक उड़ा रहे हैं- जसवंत सिंह खालड़ा की फिल्म- उस फिल्म के लिए हमने लंबे समय तक लड़ाई लड़ी है। मैं आप सभी से प्यार करता हूँ। अगर कोई हमसे नफरत करता है,तो कोई बात नहीं,लेकिन मैं आप सभी से प्यार करता हूँ।”
दिलजीत की इस प्रतिक्रिया से स्पष्ट हुआ कि फिल्म को लेकर की गई टिप्पणियों ने भी उन्हें अपनी बात रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने फिल्म के निर्माण और उससे जुड़े प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके पीछे लंबा संघर्ष रहा है। उनके मुताबिक, किसी फिल्म या कलाकार के काम पर असहमति हो सकती है,लेकिन किसी के प्रयासों का मजाक उड़ाना उचित नहीं है।
जसवंत सिंह खालड़ा का नाम पंजाब के इतिहास और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में उनसे जुड़ी फिल्म को लेकर दिलजीत की टिप्पणी ने विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। गायक ने अपने बयान में किसी से व्यक्तिगत दुश्मनी रखने की बात नहीं कही,बल्कि दोहराया कि वह सभी से प्यार करते हैं। साथ ही उन्होंने पंजाबियों के संघर्ष और अपनी पहचान पर गर्व जताया।
दिलजीत ने केवल कॉन्सर्ट के मंच से ही अपनी नाराजगी जाहिर नहीं की,बल्कि इंस्टाग्राम लाइव सेशन के दौरान भी इस विषय पर बात की थी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनके आसपास लगातार नकारात्मकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों का उद्देश्य उन्हें परेशान करना और उनके काम से ध्यान भटकाना है। हालाँकि,उन्होंने साफ किया कि इस तरह की कोशिशों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
दिलजीत के मुताबिक,वह समझते हैं कि कुछ लोग जानबूझकर विवाद पैदा करना चाहते हैं और उन्हें मानसिक रूप से विचलित करने की कोशिश करते हैं,लेकिन वह इन बातों से ऊपर उठकर अपने काम पर ध्यान देना चाहते हैं। उनके इस रुख से यह संकेत मिलता है कि वह आलोचनाओं के बीच भी अपने संगीत,फिल्मों और दर्शकों के साथ संबंध को प्राथमिकता दे रहे हैं।
पिछले कुछ समय से दिलजीत को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएँ देखने को मिली हैं। एक ओर उनके प्रशंसक उनकी उपलब्धियों और अंतर्राष्ट्रीय पहचान की सराहना करते हैं,वहीं दूसरी ओर कुछ लोग सामाजिक और राजनीतिक घटनाओं पर उनके सार्वजनिक बयानों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। दिल्ली के कॉन्सर्ट में उन्होंने इन आलोचनाओं का जवाब देते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की।
दिलजीत के दिल्ली कॉन्सर्ट में दिए गए बयान के बाद अभिजीत दीपके ने भी सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने गायक के नाम एक लंबा संदेश लिखा, जिसका शीर्षक था ‘दिलजीत पाजी के नाम’। इस पोस्ट में अभिजीत ने जून में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिलजीत की टिप्पणी से अपनी निराशा जाहिर की,लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि उनके मन में गायक के प्रति सम्मान और प्रशंसा अब भी बरकरार है।
अभिजीत ने अपने संदेश में लिखा कि जब जून में वे विरोध प्रदर्शन कर रहे थे,तब दिलजीत की टिप्पणी से उन्हें थोड़ी ठेस पहुँची थी। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए नहीं था कि उन्हें गायक से व्यक्तिगत शिकायत थी,बल्कि इसलिए क्योंकि वह हमेशा दिलजीत को ऐसे व्यक्ति के रूप में देखते आए हैं,जो किसी मुद्दे के समर्थन में अपनी आवाज उठाता है। अभिजीत के अनुसार,दिलजीत ने खुद भी कई मौकों पर इस तरह की बात कही है। इसलिए उस समय उनकी टिप्पणी से उन्हें निराशा हुई।
हालाँकि,अभिजीत ने अपने संदेश में यह भी बताया कि वह लंबे समय से दिलजीत के प्रशंसक रहे हैं और उस विवाद के बाद भी उनकी यह भावना नहीं बदली। उन्होंने लिखा कि वह आज भी दिलजीत का संगीत सुनते हैं। उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि इस साल मई में भारत लौटने से ठीक पहले वह शिकागो में दिलजीत के कॉन्सर्ट में शामिल हुए थे।
अभिजीत ने कहा कि वह उस कार्यक्रम में केवल गायक के संगीत को सुनने के लिए नहीं गए थे,बल्कि एक इंसान के तौर पर उनका सम्मान भी करते हैं। उन्होंने दिलजीत के साहस,सच्चाई और अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए भारत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने के प्रयासों की सराहना की। उनके मुताबिक,यही वजह थी कि जून में सामने आई टिप्पणी से उन्हें कुछ तकलीफ हुई,क्योंकि वह दिलजीत को हमेशा सम्मान की नजर से देखते रहे हैं।
अभिजीत दीपके ने अपने संदेश में यह भी स्पष्ट किया कि किसी एक टिप्पणी या गलतफहमी के कारण उनके मन में दिलजीत के प्रति सम्मान और प्रशंसा कम नहीं हुई है। उन्होंने लिखा कि दोनों के बीच किसी मुद्दे पर असहमति हो सकती है,लेकिन इससे उनके रिश्ते या दिलजीत के प्रति उनकी भावना पर कोई असर नहीं पड़ता।
उन्होंने गायक से आग्रह किया कि वह उनकी बात को एक छोटे भाई की तरह समझें और इस पूरे मामले को यहीं समाप्त कर दें। अपने संदेश के आखिर में अभिजीत ने पंजाबी पंक्तियों के जरिए भी अपनी भावना व्यक्त की। उन्होंने लिखा, ‘गबरू ता वैरी नू वी मीठा बोलदा,नी तू ता फेर जट्ट दा प्यार गोरिये।’ इन पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने अपने संदेश में प्यार और अपनापन बनाए रखने की बात कही।
अभिजीत की पोस्ट का लहजा आलोचना के साथ-साथ सम्मान और स्नेह से भरा रहा। उन्होंने अपनी निराशा छिपाई नहीं,लेकिन यह भी बताया कि वह दिलजीत की कला और उनके व्यक्तित्व के प्रशंसक बने हुए हैं। इस संदेश के जरिए उन्होंने यह जताने की कोशिश की कि किसी सार्वजनिक मुद्दे पर असहमति होने के बावजूद किसी कलाकार के प्रति सम्मान खत्म होना जरूरी नहीं है।
दिलजीत दोसांझ का दिल्ली कॉन्सर्ट उनके ‘ऑरा इंडिया टूर’ की शुरुआत के लिहाज से महत्वपूर्ण था। हालाँकि,संगीत और मनोरंजन के साथ-साथ उनके बयानों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। मंच से उन्होंने अपनी चुप्पी, कलाकार के रूप में अपनी भूमिका और पंजाबियों के संघर्ष का उल्लेख किया। वहीं,अभिजीत दीपके की सोशल मीडिया पोस्ट ने इस विवाद के दूसरे पक्ष को सामने रखा,जिसमें एक प्रशंसक ने अपनी नाराजगी के बावजूद गायक के प्रति सम्मान बनाए रखने की बात कही।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर कलाकारों की सामाजिक भूमिका को लेकर बहस को चर्चा में ला दिया है। कुछ लोग मानते हैं कि लोकप्रिय कलाकारों को सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखनी चाहिए,जबकि अन्य का मानना है कि कलाकारों को अपनी कला के जरिए लोगों से जुड़ने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। दिलजीत ने अपने ताजा बयान में खुद को एक कलाकार बताते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है। फिलहाल उनके बयान और अभिजीत दीपके के संदेश के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में बना हुआ है।
