अस्ताना (कजाकिस्तान),31 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारतीय महिला पहलवान मनीषा भनवाला ने सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाया है। कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में शुक्रवार को खेले गए महिला 59 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में मनीषा ने अमेरिका की एबिगेल नेट को 8-6 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। मुकाबले में एक समय वह 6-0 से पीछे चल रही थीं,लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और शानदार खेल दिखाते हुए मुकाबले का रुख पलट दिया। उनकी इस जीत के साथ ही भारत का इस चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक का इंतजार खत्म हो गया।
मनीषा की यह जीत इसलिए भी खास रही,क्योंकि फाइनल में शुरुआती दौर में अमेरिकी पहलवान ने उन पर पूरी तरह दबाव बना लिया था। मुकाबले की शुरुआत में नेट ने मनीषा को मैट पर गिराकर चार अंक हासिल किए। भारतीय टीम ने इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन रेफरी का निर्णय बरकरार रहा। चुनौती असफल होने के कारण अमेरिकी पहलवान को एक अतिरिक्त अंक मिल गया और उनकी बढ़त 5-0 हो गई। इसके बाद मनीषा को चेतावनी मिलने से नेट का स्कोर 6-0 पहुँच गया। इस समय मुकाबला भारत के हाथ से निकलता हुआ दिखाई दे रहा था,लेकिन मनीषा ने हार मानने के बजाय वापसी की कोशिश जारी रखी।
ब्रेक से ठीक पहले मनीषा ने नेट को मैट के बाहर धकेलकर एक अंक हासिल किया। इससे स्कोर का अंतर थोड़ा कम हुआ और भारतीय पहलवान को मुकाबले में वापसी की उम्मीद मिली। ब्रेक के बाद उन्होंने अपने खेल की रणनीति में बदलाव किया और लगातार आक्रामक रुख अपनाया। मनीषा ने नेट पर दबाव बनाते हुए टेकडाउन किया। इस दौरान अमेरिकी टीम ने चुनौती पेश की और दावा किया कि रेफरी मुकाबला रोकने के लिए सीटी बजा चुके थे। हालाँकि,उनकी चुनौती खारिज कर दी गई। इसके बाद मनीषा को एक और अंक मिला और उन्हें पार टेरे की स्थिति में खेलने का फायदा हासिल हुआ।
मुकाबला अब पहले से अधिक रोमांचक हो चुका था। मनीषा ने स्कोर 6-4 करने के बाद गट-रिंच तकनीक का इस्तेमाल किया। इस तकनीक के जरिए उन्होंने नेट को पलटते हुए दो अंक हासिल किए और स्कोर बराबर कर दिया। इसके बाद उन्होंने अमेरिकी पहलवान को पूरी तरह नियंत्रित करने और फॉल के जरिए मुकाबला खत्म करने की कोशिश की, लेकिन नेट किसी तरह इस स्थिति से बाहर निकलने में सफल रहीं।
स्कोर 6-6 होने के बाद मुकाबला बेहद निर्णायक स्थिति में पहुँच गया। इस स्कोर पर क्राइटेरिया के आधार पर अमेरिकी पहलवान को बढ़त हासिल थी। नेट ने अपनी इस बढ़त को बनाए रखने की कोशिश की,लेकिन मनीषा ने लगातार आक्रमण जारी रखा। उन्होंने एक और शानदार टेकडाउन करते हुए दो अंक हासिल किए और स्कोर 8-6 कर दिया। मुकाबले के अंतिम क्षणों में उन्होंने अपनी बढ़त को सुरक्षित रखा और अमेरिकी पहलवान को बराबरी का मौका नहीं दिया। आखिरकार रेफरी ने मनीषा को विजेता घोषित किया और भारत को इस प्रतियोगिता का पहला स्वर्ण पदक मिल गया।
इससे पहले भी भारतीय पहलवानों के पास इस चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने का मौका आया था,लेकिन वे फाइनल में जीत हासिल नहीं कर सकीं। महिला 50 किलोग्राम भार वर्ग में नीलम और 76 किलोग्राम भार वर्ग में काजल ने खिताबी मुकाबले तक जगह बनाई थी। हालाँकि,दोनों को फाइनल में हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में मनीषा पर भारत को पहला स्वर्ण दिलाने की जिम्मेदारी थी। उन्होंने दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन करके इस उम्मीद को हकीकत में बदल दिया।
मनीषा ने फाइनल तक पहुँचने के लिए भी बेहतरीन प्रदर्शन किया था। गुरुवार को उन्होंने महिला 59 किलोग्राम भार वर्ग के सेमीफाइनल में मंगोलिया की बोलोर्टुया खुरेलखु को हराकर खिताबी मुकाबले में अपनी जगह पक्की की थी। इस जीत के साथ ही उन्होंने भारत के लिए स्वर्ण पदक की उम्मीद जगा दी थी। सेमीफाइनल से पहले मनीषा ने प्री-क्वार्टर फाइनल में कनाडा की लॉरेंस ब्यूरेगार्ड को 6-2 से हराकर अपने अभियान की शुरुआत की थी। शुरुआती मुकाबले से लेकर फाइनल तक उनका प्रदर्शन लगातार प्रभावशाली रहा।
मनीषा की इस उपलब्धि ने भारतीय महिला कुश्ती के लिए एक यादगार पल तैयार किया है। विश्व स्तर की इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि होती है,लेकिन 6-0 से पिछड़ने के बाद वापसी करके खिताब हासिल करना उनके संघर्ष और मानसिक मजबूती को भी दर्शाता है। फाइनल में उन्होंने तकनीक,धैर्य और सही समय पर आक्रामक खेल का शानदार तालमेल दिखाया।
अस्ताना में मिली इस जीत के साथ मनीषा भनवाला ने न केवल अपने करियर की बड़ी उपलब्धि हासिल की,बल्कि भारतीय कुश्ती को भी नई पहचान दिलाई है। उनकी जीत यह भी दिखाती है कि मुकाबले में स्कोर चाहे कितना भी पीछे क्यों न हो,आखिरी समय तक प्रयास जारी रखने से परिणाम बदला जा सकता है। अब उनकी इस ऐतिहासिक सफलता के बाद भारतीय खेल प्रेमियों की नजरें प्रतियोगिता में देश के अन्य पहलवानों के प्रदर्शन पर भी रहेंगी।
