मणिपुर में फिर भड़की हिंसा (तस्वीर क्रेडिट@_JONY_PUNJABI_)

मणिपुर के नोने जिले में फिर भड़की हिंसा,दो उग्रवादी गुटों के बीच भीषण गोलीबारी में तीन की मौत; इलाके में तनाव

नई दिल्ली,5नवंबर (युआईटीवी)- मणिपुर में लंबे समय से जारी अशांति के बीच एक बार फिर हिंसक घटना सामने आई है। राज्य के नागा बहुल नोने जिले में बुधवार तड़के प्रतिद्वंदी उग्रवादी गुटों के बीच भीषण गोलीबारी हुई। इस मुठभेड़ में कम-से-कम तीन उग्रवादियों की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया है और स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। गोलीबारी की आवाज से आसपास के गांवों में दहशत का माहौल पैदा हो गया। हालात को और बिगड़ने से रोकने के लिए स्थानीय ग्रामीणों ने भी पहल की और उग्रवादी गुटों से हथियार छोड़कर शांति बनाए रखने की अपील की।

अधिकारियों के मुताबिक,यह घटना बुधवार सुबह करीब चार बजे नोने जिले के खोपुम क्षेत्र स्थित ताओदाइजंग गाँव में हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार,दो विरोधी गुटों के बीच अचानक गोलीबारी शुरू हो गई। आशंका जताई जा रही है कि इस मुठभेड़ में अलग-अलग नागा उग्रवादी संगठनों से जुड़े कैडर शामिल थे। इनमें जेलियांग्रॉन्ग यूनाइटेड फ्रंट और उसका विरोधी संगठन भी हो सकता है। हालाँकि,घटना में शामिल सभी पक्षों और गोलीबारी की वास्तविक वजह को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है।

गोलीबारी थमने के बाद स्थानीय ग्रामीण घटनास्थल पर पहुँचे। वहाँ से तीन शव बरामद किए गए,जिनके मुठभेड़ में मारे गए उग्रवादियों के होने की आशंका है। घटना के बाद पूरे इलाके में भय और अनिश्चितता का माहौल बन गया। ग्रामीणों को आशंका है कि दोनों गुटों के बीच दुश्मनी आगे भी हिंसक टकराव का कारण बन सकती है। इसी वजह से आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने हालात को सँभालने के लिए अपनी ओर से प्रयास शुरू किए। गाँव की महिलाओं ने विशेष रूप से आगे आकर उग्रवादियों से गोलीबारी रोकने की अपील की। उन्होंने लाउडस्पीकर के माध्यम से दोनों पक्षों को संदेश दिया कि हिंसा से किसी का भला नहीं होगा और निर्दोष लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। महिलाओं ने उग्रवादियों से तत्काल हथियारों का इस्तेमाल बंद करने और इलाके में शांति कायम रखने की भावुक अपील की।

स्थानीय लोगों की इस पहल को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि लंबे समय से जारी संघर्ष और हिंसक घटनाओं का असर आम नागरिकों के जीवन पर पड़ रहा है। ग्रामीण नहीं चाहते कि गुटों के बीच आपसी संघर्ष का खामियाजा गांवों में रहने वाले परिवारों और बच्चों को भुगतना पड़े।

प्रारंभिक जानकारी में इस घटना के पीछे अलग-अलग नागा उग्रवादी संगठनों के बीच पुरानी प्रतिद्वंद्विता को संभावित वजह माना जा रहा है। जेलियांग्रॉन्ग यूनाइटेड फ्रंट और उसके विरोधी गुट के बीच टकराव की आशंका जताई गई है। हालाँकि,अभी यह स्पष्ट नहीं है कि गोलीबारी किस विवाद को लेकर शुरू हुई और दोनों पक्षों की ओर से कितने लोग इसमें शामिल थे।

नोने जिला नागा बहुल क्षेत्र है और यहाँ किसी भी तरह का सशस्त्र संघर्ष स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। ताओदाइजंग गाँव में हुई इस घटना ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि मुठभेड़ के बाद बदले की कार्रवाई या दोबारा गोलीबारी जैसी घटना न हो। ऐसी स्थिति में आसपास के गांवों की सुरक्षा और सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

मणिपुर में मई 2023 से जातीय हिंसा का दौर जारी है। इसकी शुरुआत तीन मई 2023 को उस समय हुई थी, जब ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर की ओर से आदिवासी एकजुटता मार्च निकाला गया था। यह मार्च बहुसंख्यक मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की माँग के विरोध में आयोजित किया गया था। इसके बाद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच हिंसक झड़पें शुरू हो गईं।

मैतेई समुदाय मुख्य रूप से इम्फाल घाटी में रहता है,जबकि कुकी-जो समुदाय की बड़ी आबादी पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करती है। अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर कुकी-जो समुदाय के लोगों में आशंका थी कि इससे पहाड़ी क्षेत्रों की जमीन और सरकारी नौकरियों में उनके अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसी विवाद ने धीरे-धीरे गंभीर जातीय संघर्ष का रूप ले लिया।

पिछले तीन वर्षों से अधिक समय में हिंसा के कारण राज्य में बड़े पैमाने पर जनजीवन प्रभावित हुआ है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार,इस संघर्ष में अब तक 300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। सैकड़ों लोग घायल हुए हैं,जबकि लगभग 60 हजार से अधिक लोगों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। विस्थापन और असुरक्षा के कारण हजारों परिवार लंबे समय से सामान्य जीवन में लौटने की कोशिश कर रहे हैं।

हाल के समय में मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्रों में तनाव के नए मोर्चे सामने आने की खबरें भी चिंता बढ़ा रही हैं। कुकी और नागा समुदायों के बीच कुछ इलाकों में तनाव की स्थिति बनने से राज्य की सुरक्षा चुनौती और जटिल हो सकती है। नोने जिले की ताजा घटना को इसी व्यापक अस्थिरता के बीच देखा जा रहा है। हालाँकि,इस मुठभेड़ को सीधे तौर पर मैतेई-कुकी संघर्ष से जोड़ने के बजाय इसके पीछे बताए जा रहे स्थानीय उग्रवादी गुटों के विवाद को अलग से समझना जरूरी है।

राज्य में हालात नियंत्रित रखने के लिए समय-समय पर इंटरनेट सेवाएँ निलंबित की जाती रही हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाने के साथ सेना और अर्धसैनिक बलों की तैनाती भी की जाती है। इसके बावजूद अलग-अलग इलाकों से हिंसक घटनाओं की खबरें सामने आती रही हैं।

नोने जिले में हुई ताजा गोलीबारी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि मणिपुर में स्थायी शांति स्थापित करने की राह कितनी चुनौतीपूर्ण है। फिलहाल स्थानीय लोगों की प्राथमिकता इलाके में दोबारा हिंसा भड़कने से रोकना और सामान्य जनजीवन को सुरक्षित बनाए रखना है। ग्रामीणों की अपील के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों उग्रवादी गुट तनाव कम करने की दिशा में क्या कदम उठाते हैं।