अग्निवीरों को केंद्र सरकार की बड़ी राहत,75 फीसदी जवानों को मिलेगा दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार (तस्वीर क्रेडिट@hindipatrakar)

अग्निवीरों को केंद्र सरकार की बड़ी राहत,75 फीसदी जवानों को मिलेगा दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार; कुल कार्यकाल होगा छह साल

नई दिल्ली,5 नवंबर (युआईटीवी)- केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना के तहत सेना में भर्ती होने वाले अग्निवीरों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब चार साल की सेवा पूरी करने के बाद 75 प्रतिशत अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार देने का फैसला लिया गया है। इस बदलाव के बाद इन अग्निवीरों की कुल सेवा अवधि छह साल हो जाएगी। वहीं,बाकी 25 प्रतिशत अग्निवीरों को पहले की तरह नियमित सैनिक बनने का अवसर मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। सरकार के इस फैसले से उन हजारों युवाओं को राहत मिलने की उम्मीद है,जिनका चार साल का सेवा कार्यकाल जल्द समाप्त होने वाला था।

नई व्यवस्था के तहत अतिरिक्त दो साल तक सेवा देने वाले अग्निवीरों को बढ़ा हुआ वेतन और अन्य निर्धारित भत्ते भी मिलेंगे। हालाँकि,छह साल की सेवा पूरी करने के बाद नियमित सेना में शामिल होने की इच्छा रखने वाले जवानों को चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा। उनके प्रदर्शन,योग्यता और निर्धारित मानकों के आधार पर स्थायी पदों के लिए चयन किया जाएगा। इस तरह सरकार ने अग्निपथ योजना के मूल ढाँचे में बदलाव करते हुए अग्निवीरों को सेना में अधिक समय तक सेवा देने का अवसर प्रदान किया है।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने कैबिनेट के इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल पूरा होने वाला है। इस दौरान सेना ने उनके कामकाज, अनुशासन,शारीरिक क्षमता और सैन्य जिम्मेदारियों को निभाने के तरीके का लगातार मूल्यांकन किया है। शुरुआती अनुभवों और प्रदर्शन के आकलन के आधार पर अग्निवीरों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है।

जनरल सुब्रमणि के अनुसार,अग्निवीरों ने सेवा के दौरान अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह निभाया है। उनके प्रदर्शन और सेना में मिले अनुभव को देखते हुए मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत महसूस की गई। इसी के बाद 75 प्रतिशत अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार देने का प्रस्ताव तैयार किया गया। सरकार की मंजूरी के बाद अब यह नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।

इस फैसले का तत्काल लाभ उन करीब 18 हजार अग्निवीरों को मिलने की उम्मीद है, जिनका चार साल का कार्यकाल कुछ सप्ताह बाद पूरा होने वाला था। पहले की व्यवस्था के अनुसार इन युवाओं को सेवा समाप्त होने के बाद सेना से बाहर होना पड़ता,लेकिन अब उन्हें दो साल तक अतिरिक्त सेवा करने का अवसर मिल सकेगा। इससे उन्हें सैन्य अनुभव बढ़ाने के साथ आर्थिक रूप से भी अधिक स्थिरता प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

अग्निपथ योजना की शुरुआत के समय ही यह प्रावधान किया गया था कि चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों में से अधिकतम 25 प्रतिशत को उनकी योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर नियमित सेना में शामिल किया जाएगा। बाकी 75 प्रतिशत युवाओं को चार साल बाद सेवा से मुक्त होकर नागरिक जीवन में लौटना था। अब नई व्यवस्था में इसी 75 प्रतिशत हिस्से को दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार देने का फैसला किया गया है।

इस बदलाव के बाद नियमित सैनिक बनने का अवसर पाने वाले 25 प्रतिशत अग्निवीरों का प्रावधान पहले की तरह बना रहेगा। वहीं,अतिरिक्त सेवा विस्तार पाने वाले अग्निवीरों को भी भविष्य में स्थायी पदों के लिए चयन प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलेगा। हालाँकि,इसके लिए उन्हें निर्धारित शर्तों और चयन मानकों को पूरा करना होगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य अग्निवीरों को सेना में अधिक अनुभव हासिल करने का मौका देना और उनके प्रदर्शन के आधार पर भविष्य के अवसर उपलब्ध कराना है। अतिरिक्त दो साल की सेवा के दौरान जवानों को सैन्य प्रशिक्षण,जिम्मेदारियों और तकनीकी कार्यों का अधिक अनुभव प्राप्त हो सकेगा।

जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने अग्निपथ योजना के चार साल के अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि इस अवधि में भर्ती प्रक्रिया और प्रशिक्षण व्यवस्था में कई बदलाव किए गए हैं। अब देश के लगभग सभी जिलों से अग्निवीरों की भर्ती हो रही है। इससे सेना में युवाओं को देश के अलग-अलग क्षेत्रों से शामिल होने का अवसर मिल रहा है।

उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किए गए बदलावों की भी जानकारी दी। पहले भर्ती के दौरान शारीरिक परीक्षा आयोजित की जाती थी और उसके बाद लिखित परीक्षा होती थी। अब इस क्रम में बदलाव करते हुए सबसे पहले लिखित परीक्षा आयोजित की जाती है। इसके बाद सफल अभ्यर्थियों का शारीरिक परीक्षण किया जाता है। इस बदलाव से भर्ती प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश की गई है।

सीडीएस के अनुसार, पिछले चार वर्षों में अग्निवीरों ने शारीरिक फिटनेस, अनुशासन, मनोबल और तकनीकी दक्षता के मामले में अच्छा प्रदर्शन किया है। सेना में काम करने के प्रति उनका उत्साह भी सकारात्मक रहा है। इन अनुभवों ने अग्निवीरों की क्षमता और सैन्य व्यवस्था में उनकी भूमिका को समझने में मदद की है।

अग्निपथ योजना के तहत सेवा करने वाले युवाओं को केवल सैन्य प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रखा गया है,बल्कि उनकी शैक्षणिक योग्यता और व्यावसायिक कौशल बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया है। सेना में सेवा के दौरान अग्निवीरों को आगे की पढ़ाई पूरी करने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके तहत दसवीं पास अग्निवीरों को बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने और बारहवीं पास युवाओं को स्नातक स्तर की शिक्षा हासिल करने का अवसर दिया गया है।

इसके साथ ही उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कौशल प्रमाणपत्र भी प्रदान किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य यह है कि सेना में सेवा के दौरान हासिल किए गए अनुभव और प्रशिक्षण का लाभ उन्हें भविष्य में भी मिल सके। यदि कोई अग्निवीर आगे चलकर नियमित सेना में शामिल नहीं हो पाता है,तो भी उसके पास शिक्षा और कौशल के आधार पर रोजगार के दूसरे अवसर तलाशने की क्षमता हो।

केंद्र सरकार ने 14 जून 2022 को अग्निपथ योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत थल सेना,नौसेना और वायुसेना में युवाओं को चार साल की अवधि के लिए अग्निवीर के रूप में भर्ती करने की व्यवस्था की गई। योजना का उद्देश्य सेना में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने, सैन्य बलों की औसत आयु कम करने और सेना को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करना था।

हालाँकि,योजना की घोषणा के बाद से ही चार साल की सेवा अवधि और नियमित सैनिक बनने के सीमित अवसरों को लेकर चर्चा होती रही है। कई युवाओं और पूर्व सैनिकों ने सेवा समाप्त होने के बाद रोजगार और भविष्य की सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाए थे। अब 75 प्रतिशत अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार देने का फैसला इसी व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

सरकार के इस निर्णय से अग्निवीरों को सेना में अधिक समय तक काम करने,वेतन और भत्तों का लाभ लेने तथा अपने सैन्य कौशल को मजबूत करने का अवसर मिलेगा। साथ ही नियमित सेवा में शामिल होने की संभावना भी चयन प्रक्रिया के जरिए बनी रहेगी। हालाँकि, इस बदलाव का वास्तविक प्रभाव इसके क्रियान्वयन और भविष्य में सेना की भर्ती नीति पर निर्भर करेगा। फिलहाल करीब 18 हजार अग्निवीरों के लिए यह फैसला उनके सेवा जीवन में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है।