वाशिंगटन,5 नवंबर (युआईटीवी)- अमेरिका की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हकीम जेफ्रीज ने सदन के अगले स्पीकर पद के लिए आधिकारिक रूप से अपनी दावेदारी पेश कर दी है। उन्होंने यह घोषणा ऐसे समय में की है, जब डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस में नियंत्रण हासिल करने के एक दिन बाद अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं और आगामी रणनीति का संकेत दिया है। जेफ्रीज ने अपनी उम्मीदवारी के साथ ही कई अहम वादे किए हैं। इनमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ को समाप्त करना,आम लोगों को महँगाई से राहत दिलाना और राष्ट्रपति प्रशासन की नीतियों पर कड़ी निगरानी रखना शामिल है।
अगर हकीम जेफ्रीज प्रतिनिधि सभा के स्पीकर चुने जाते हैं,तो वह अमेरिकी इतिहास में इस पद पर पहुंचने वाले पहले अश्वेत नेता बन जाएँगे। यह उपलब्धि न केवल उनके राजनीतिक करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी,बल्कि अमेरिकी राजनीति में प्रतिनिधित्व और नेतृत्व के स्तर पर भी एक ऐतिहासिक बदलाव मानी जाएगी। न्यूयॉर्क से आने वाले जेफ्रीज ने आगामी 120वीं कांग्रेस के सदस्यों को एक औपचारिक पत्र लिखकर अपनी उम्मीदवारी के समर्थन में सहयोग माँगा है। उनके कार्यालय ने बुधवार को यह पत्र सार्वजनिक किया।
इस पत्र को अमेरिकी संसदीय परंपरा के अनुसार ‘डियर कलीग’ यानी प्रिय सहयोगी के नाम से जारी किया गया। इसमें जेफ्रीज ने प्रतिनिधि सभा के सदस्यों से विनम्रतापूर्वक अपील की कि वे उन्हें सदन के अगले स्पीकर के रूप में समर्थन दें। पत्र के अंत में उन्होंने अमेरिका की प्रतिनिधि सभा के 57वें स्पीकर के रूप में सेवा करने की इच्छा जाहिर करते हुए सांसदों का समर्थन माँगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि डेमोक्रेटिक पार्टी को अब केवल सत्ता हासिल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए,बल्कि जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप नीतिगत बदलाव भी करने होंगे।
जेफ्रीज ने अपने पत्र में लिखा कि अमेरिकी जनता बड़े बदलाव की माँग कर रही है और अब समय आ गया है कि उनकी अपेक्षाओं को ठोस फैसलों में बदला जाए। उनके मुताबिक,डेमोक्रेटिक पार्टी को तीन प्रमुख मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा। इनमें आम नागरिकों को रोजमर्रा के बढ़ते खर्च और महँगाई से राहत देना,सरकार और प्रशासन को जवाबदेह बनाना तथा अमेरिकी मूल्यों और देश की बुनियादी पहचान की रक्षा करना शामिल है। उनका मानना है कि इन तीनों मुद्दों पर प्रभावी काम करके ही पार्टी जनता का भरोसा मजबूत कर सकती है।
हकीम जेफ्रीज ने अपनी उम्मीदवारी के साथ ही नई कांग्रेस के शुरुआती 100 दिनों के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी का संभावित एजेंडा भी सामने रखा है। उन्होंने कहा कि पार्टी को सबसे पहले उन फैसलों को बदलने की दिशा में काम करना चाहिए,जिनका सीधा असर आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति और सामाजिक सुरक्षा पर पड़ रहा है। उन्होंने मेडिकेड में की गई कटौती को वापस लेने,स्नैप कार्यक्रम के लिए वित्तीय सहायता बहाल करने और अफोर्डेबल केयर एक्ट के तहत मिलने वाले टैक्स क्रेडिट का विस्तार करने की बात कही।
मेडिकेड अमेरिका की स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है,जिसके तहत कम आय वाले लोगों और जरूरतमंद परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच मिलती है। वहीं,स्नैप कार्यक्रम के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भोजन खरीदने के लिए सहायता दी जाती है। जेफ्रीज का कहना है कि इन योजनाओं में कटौती का असर उन लोगों पर पड़ता है,जिन्हें सरकारी मदद की सबसे अधिक जरूरत होती है। इसलिए डेमोक्रेटिक पार्टी इन सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कदम उठाएगी।
आर्थिक मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की व्यापार नीतियों और ईरान में जारी युद्ध को भी निशाने पर लिया। जेफ्रीज ने बढ़ती लागत और आम लोगों पर पड़ रहे आर्थिक दबाव के लिए रिपब्लिकन पार्टी की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उनके अनुसार, ट्रंप प्रशासन की ओर से लगाए गए टैरिफ और ईरान में युद्ध जैसे फैसलों ने देश की आर्थिक चुनौतियों को और बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेटिक पार्टी सत्ता में आने के बाद इन नीतियों को बदलने की कोशिश करेगी।
जेफ्रीज ने विशेष रूप से ट्रंप के टैरिफ समाप्त करने और ईरान में शुरू किए गए सैन्य संघर्ष को रोकने की बात कही। उनका तर्क है कि व्यापार पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क का बोझ अंततः आम उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर पड़ता है। आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से बाजार में महँगाई का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में डेमोक्रेटिक पार्टी टैरिफ नीति की समीक्षा कर उसे समाप्त करने के लिए राजनीतिक और विधायी स्तर पर प्रयास करेगी।
जेफ्रीज ने अपने पत्र में केवल आर्थिक नीतियों तक ही अपनी प्राथमिकताएँ सीमित नहीं रखीं। उन्होंने राष्ट्रपति प्रशासन की जवाबदेही को भी एक प्रमुख मुद्दा बताया। उनका कहना है कि प्रतिनिधि सभा को कार्यपालिका के फैसलों पर निगरानी रखने की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली व्यवस्था में प्रतिनिधि सभा ने ट्रंप प्रशासन के फैसलों पर पर्याप्त सवाल नहीं उठाए और कई बार ऐसा व्यवहार किया,जैसे सदन राष्ट्रपति प्रशासन के अधीन काम कर रहा हो।
जेफ्रीज के अनुसार,अब यह स्थिति बदलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधि सभा ट्रंप प्रशासन की सहायक इकाई की तरह काम नहीं करेगी,बल्कि सरकार की शक्तियों पर नियंत्रण और संतुलन बनाए रखने वाली संस्था के रूप में अपनी भूमिका निभाएगी। अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधायिका,कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों का बंटवारा महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी व्यवस्था के तहत कांग्रेस को राष्ट्रपति और उनके प्रशासन के फैसलों की जाँच करने,सवाल पूछने और आवश्यक होने पर कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है।
डेमोक्रेटिक नेता ने संकेत दिया कि नई कांग्रेस में प्रशासन की नीतियों की जाँच के लिए संसदीय समितियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। सुनवाई,दस्तावेजों की माँग और विधायी प्रक्रियाओं के जरिए सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए जा सकते हैं। इससे ट्रंप प्रशासन की नीतियों को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ने की संभावना भी है।
आव्रजन के मुद्दे पर भी जेफ्रीज ने डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी बड़े पैमाने पर लोगों को जबरन अमेरिका से बाहर निकालने की ट्रंप प्रशासन की नीति के लिए करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल करने के पक्ष में नहीं है। उनके मुताबिक,आव्रजन कानूनों का पालन होना चाहिए,लेकिन यह प्रक्रिया निष्पक्ष,न्यायपूर्ण और मानवीय तरीके से पूरी की जानी चाहिए।
जेफ्रीज ने अमेरिका को अप्रवासियों का देश बताते हुए कहा कि देश की ऐतिहासिक विरासत में अलग-अलग देशों से आए लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसलिए आव्रजन से जुड़े फैसले लेते समय इस विरासत और मानवीय मूल्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने संकेत दिया कि डेमोक्रेटिक पार्टी ऐसी नीतियों का समर्थन करेगी,जिनमें कानून का पालन कराने के साथ-साथ लोगों के अधिकारों और सम्मान का भी ध्यान रखा जाए।
हालाँकि,अपने पत्र में जेफ्रीज ने भारत, एच-1बी वीजा या कानूनी आव्रजन से जुड़े किसी विशेष मुद्दे का उल्लेख नहीं किया। इसके बावजूद उनके नेतृत्व में प्रतिनिधि सभा की संभावित नीतियाँ भारतीय नागरिकों और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं। इसकी वजह यह है कि अमेरिका में रोजगार आधारित आव्रजन और उच्च कौशल वाले विदेशी पेशेवरों से जुड़े कई मुद्दे कांग्रेस की समितियों और विधायी प्रक्रियाओं के दायरे में आते हैं।
भारत के नजरिये से जेफ्रीज की उम्मीदवारी में सबसे अहम पहलू ट्रंप प्रशासन के टैरिफ को खत्म करने का उनका वादा है। अमेरिका की व्यापार नीति का सीधा असर भारत से होने वाले निर्यात और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर पड़ सकता है। यदि डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा में नियंत्रण हासिल करती है,तो उसे सदन की विभिन्न समितियों पर प्रभाव मिलेगा। इन समितियों के जरिए अमेरिकी प्रशासन की व्यापार नीतियों की समीक्षा की जा सकती है और उन फैसलों पर सुनवाई आयोजित हो सकती है,जिनका असर भारत सहित दूसरे देशों के निर्यात पर पड़ रहा है।
हालाँकि,प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक बहुमत होने का अर्थ यह नहीं है कि टैरिफ तुरंत समाप्त हो जाएंगे। किसी भी ऐसे विधेयक को कानून बनने के लिए अमेरिकी सीनेट से भी मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति जरूरी होगी। यदि राष्ट्रपति ट्रंप किसी विधेयक पर वीटो का इस्तेमाल करते हैं, तो उसे लागू कराना और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में जेफ्रीज का वादा फिलहाल डेमोक्रेटिक पार्टी की राजनीतिक प्राथमिकता और संभावित विधायी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
आव्रजन के मामले में भी प्रतिनिधि सभा का रुख भारतीयों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। भारतीय नागरिक अमेरिका के एच-1बी वीजा कार्यक्रम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा,रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए लंबित आवेदनों में भी भारतीयों की बड़ी संख्या शामिल है। ऐसे में उच्च कौशल वाले विदेशी पेशेवरों के लिए वीजा व्यवस्था,स्थायी निवास और रोजगार आधारित आव्रजन से जुड़े विधेयकों पर सदन की समितियों के फैसलों का भारतीय समुदाय पर प्रभाव पड़ सकता है।
डेमोक्रेटिक नियंत्रण के बाद यह भी महत्वपूर्ण होगा कि आव्रजन से जुड़े कौन से विधेयक प्रतिनिधि सभा में चर्चा के लिए लाए जाते हैं और किन प्रस्तावों को समितियों में आगे बढ़ाया जाता है। भारतीय-अमेरिकी समुदाय की नजर इस बात पर रहेगी कि नई नेतृत्व व्यवस्था कानूनी आव्रजन और उच्च कौशल वाले पेशेवरों से जुड़े मुद्दों पर क्या रुख अपनाती है।
जेफ्रीज ने बुधवार देर रात सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपनी पार्टी की चुनावी स्थिति को लेकर भी दावा किया। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी कम से कम 255 सीटें जीतने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह आँकड़ा पार्टी के लिए मजबूत राजनीतिक स्थिति का संकेत देता है। हालाँकि,सदन में बहुमत और स्पीकर पद पर अंतिम फैसला संबंधित सदस्यों के मतदान से ही होगा।
इस बीच,भारतीय-अमेरिकी सांसद रो खन्ना की भूमिका भी चर्चा में है। वह इंडिया एंड इंडियन अमेरिकन कांग्रेसनल कॉकस के सह-अध्यक्ष हैं। इस कॉकस का उद्देश्य भारत और भारतीय-अमेरिकी समुदाय से जुड़े मुद्दों को अमेरिकी कांग्रेस में उठाना है। मंगलवार को छठी बार चुनाव जीतने वाले रो खन्ना के लिए नई राजनीतिक परिस्थिति में इस समूह की भूमिका को आगे बढ़ाने का अवसर होगा। वर्ष 2022 के बाद पहली बार यह कॉकस बहुमत वाले डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि सभा में काम करेगा।
दूसरी ओर,रिपब्लिकन पार्टी में भी नए नेतृत्व को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। मौजूदा स्पीकर माइक जॉनसन ने अपने कर्मचारियों को जानकारी दी है कि वह नई कांग्रेस में अल्पसंख्यक नेता के पद के लिए चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनके इस फैसले के बाद रिपब्लिकन खेमे में नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सांसद स्टीव स्केलिस और न्यायपालिका समिति के अध्यक्ष जिम जॉर्डन ने भी अपने सहयोगियों के सामने इस पद के लिए अपनी इच्छा जाहिर की है।
ऐसे में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के अगले स्पीकर का चुनाव केवल एक संसदीय पद के लिए मुकाबला नहीं रह गया है,बल्कि यह आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गया है। हकीम जेफ्रीज की दावेदारी के साथ डेमोक्रेटिक पार्टी ने महँगाई,स्वास्थ्य सुविधाओं,सामाजिक सुरक्षा,व्यापार नीति,आव्रजन और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को केंद्र में रखा है।
यदि जेफ्रीज को पर्याप्त समर्थन मिलता है,तो वह अमेरिकी इतिहास में पहले अश्वेत स्पीकर बनकर एक नया अध्याय जोड़ेंगे। उनके सामने चुनौती केवल इस ऐतिहासिक उपलब्धि तक पहुँचने की नहीं होगी,बल्कि अपने वादों को नीतिगत फैसलों में बदलने की भी होगी। ट्रंप प्रशासन के साथ संभावित टकराव, सीनेट में राजनीतिक समीकरण और राष्ट्रपति के वीटो अधिकार जैसी चुनौतियाँ उनके एजेंडे की राह कठिन बना सकती हैं। इसके बावजूद उनकी उम्मीदवारी ने साफ कर दिया है कि नई कांग्रेस में डेमोक्रेटिक पार्टी राष्ट्रपति की नीतियों को चुनौती देने और अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।
