दिल्ली दंगे 2020 : गुलफिशा फातिमा की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

नई दिल्ली, 13 फरवरी (युआईटीवी/आईएएनएस)| राष्ट्रीय राजधानी में फरवरी 2020 के दंगों को आयोजित करने के लिए आपराधिक साजिश के मामले में निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली गुलफिशा फातिमा की जमानत याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को आदेश सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और रजनीश भटनागर की खंडपीठ ने दलीलें सुनीं और आदेश सुरक्षित रख लिया। फातिमा को मार्च 2022 में ट्रायल कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया था। विस्तृत आदेश की प्रति की प्रतीक्षा है।

फातिमा के वकील, अधिवक्ता सुशील बजाज ने पहले प्रस्तुत किया था कि अभियोजन पक्ष के सभी गवाह या तो सुने गए हैं या वे व्यक्ति हैं जो सभी विरोध सभाओं में उपस्थित नहीं थे। उन्होंने तर्क दिया कि साक्ष्य की पुष्टि करने के लिए पहला कदम होना चाहिए। बजाज ने यह भी आरोप लगाया था कि प्रत्येक गवाह क्षमा प्राप्त आरोपी है और वे फातिमा के खिलाफ गवाहों के रूप में काम कर रहे हैं।

पुलिस के मुताबिक, खुलासा बयान में फातिमा ने 15 जनवरी के सीलमपुर प्रदर्शन के बारे में पुलिस को बताया था कि भीड़ योजना के अनुसार बढ़ने लगी थी, इस भीड़ को भड़काने और लामबंद करने के लिए बड़े नेता और वकील आने लगे थे। उमर खालिद, चंद्रशेखर रावण, योगेंद्र यादव, सीताराम येचुरी और वकील महमूद प्राचा शामिल थे।

चार्जशीट के मुताबिक, ”वकील महमूद प्राचा ने कहा कि प्रदर्शन में बैठना आपका लोकतांत्रिक अधिकार है और बाकी नेताओं ने सीएए और एनआरसी को मुस्लिम विरोधी बताकर समुदाय में असंतोष की भावना को हवा दी थी।” चार्जशीट में अर्थशास्त्री जयति घोष, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और एक्टिविस्ट अपूवार्नंद और डॉक्यूमेंट्री फिल्म निमार्ता राहुल रॉय के नाम भी शामिल हैं।

बयान में, कार्यकर्ताओं देवांगना कलिता और नताशा नरवाल ने कहा था कि उन्हें तीन व्यक्तियों ने सीएए और एनआरसी के खिलाफ विरोध करने और किसी भी हद तक जाने के लिए कहा था। नागरिकता (संशोधन अधिनियम) के समर्थकों और इसका विरोध करने वालों के बीच झड़प के बाद 24 फरवरी 2020 को पूर्वोत्तर दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी।

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