नई दिल्ली, 26 अगस्त (युआईटीवी)- भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड(सेबी) ने अडाणी-हिंडनबर्ग मामले में अपनी रिपोर्ट दी है। सेबी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 24 आरोपों में से 22 आरोपों की जाँच कर ली गयी है। 2 मुद्दे ऐसे हैं जिसपर जाँच का परिणाम अंतरिम चरण में है। इस समूह की कंपनियों में निवेश करने वाली विदेशी कंपनियों के असली मालिकों के बारे में पाँच देशों से जानकारी आने का उसे इन्तजार है।
अंतरिम जाँच में अडाणी कपंनियों की 13 ओवरसीज इकाइओं की जांच को गयी है। इसमें विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) के मामलों पर पाँच देशों से ब्यौरा माँगा गया है। जाँच के अंतर्गत सेबी ने ऐसी 13 ओवरसीज कंपनियों को कवर किया है जिन्हें अडानी ग्रुप का पब्लिक शेयर होल्डर कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को रिपोर्ट जमा करने के लिए 14 अगस्त 2023 तक का समय दिया था।14 अगस्त की सुनवाई में सेबी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि मामले की जाँच काफी हद तक पूरी हो चुकी है पर अंतिम रिपोर्ट जमा करने के लिए और 15 दिन का समय चाहिए। अब इस मामले की सुनवाई 29 अगस्त 2023 को होगी।

जनहित याचिका याचिकाकर्ता विशाल तिवारी ने कहा कि “आज सेबी ने जाँच की स्टेटस रिपोर्ट शीर्ष अदालत को सौंप दी है। जिसमें सेबी ने जो-जो जाँच किए हैं वो बताया गया है। सेबी को आज निर्णयात्मक रिपोर्ट जमा करना था लेकिन सेबी ने स्टेटस रिपोर्ट के साथ ऐसा कोई भी निर्णयात्मक रिपोर्ट नहीं दी है। तो इस स्टेटस रिपोर्ट को सिर्फ एक जानकारी माना जा सकता है। क्या अडानी ग्रुप का कोई अनियमिताएँ पायी गई? क्या अन्य कोई कंपनी है जिनकी कोई अनियमिताएँ पायी गई?हिंडनबर्ग रिपोर्ट में कितनी सच्चाई थी? इत्यादि ये सब सेबी के रिपोर्ट के निष्कर्ष में आना था लेकिन सेबी द्वारा इस स्टेटस रिपोर्ट के साथ फ़ाइल नहीं किया गया है। अब जब यह मामला 29 अगस्त को सुनवाई के लिए आएँगे तो ये सब बिंदुओं को उठाया जाएगा क्योंकि जो स्टेटस रिपोर्ट सौंपी गयी है वह सिर्फ एक अधूरी जानकारी है।”
24 जनवरी 2023 को हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी ग्रुप ने एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी जिसमें अडानी ग्रुप पर कई बड़े आरोप लगाए गए थे और कहा गया था कि अडानी ने शेयर के साथ हेर-फेर किया है। इसके अलावा लेन-देन को लेकर भी आरोप लगाए गए थे। जिसके बाद अडानी ग्रुप का बाजार में काफी गिरावट हुई थी। अडानी ग्रुप के शेयर में भी काफी गिरावट आई थी।
