गांधीनगर,21 अप्रैल (युआईटीवी)- मंगलवार सुबह म्यांमार-भारत सीमा क्षेत्र में आए भूकंप के झटकों ने एक बार फिर देश के विभिन्न हिस्सों में भूकंपीय गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सुबह 5 बजकर 59 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.2 मापी गई। गांधीनगर स्थित भूकंपीय अनुसंधान संस्थान और राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने इस भूकंप की पुष्टि की है। वैज्ञानिकों के अनुसार,भूकंप की गहराई लगभग 84 किलोमीटर थी,जो इसे मध्यम तीव्रता का भूकंप बनाती है,लेकिन इसकी व्यापकता के कारण कई राज्यों में इसके झटके महसूस किए गए।
भूकंप का केंद्र मणिपुर के कामजोंग क्षेत्र में बताया गया है,जहाँ सबसे पहले कंपन महसूस किया गया। इसके बाद मणिपुर के साथ-साथ नगालैंड,असम और मेघालय तक भूकंप के झटके फैल गए। सुबह के समय अधिकांश लोग अपने घरों में थे,ऐसे में अचानक आए इन झटकों से लोगों में दहशत का माहौल बन गया। कई लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए और सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। हालाँकि,राहत की बात यह रही कि अभी तक किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है।
पूर्वोत्तर भारत का यह इलाका भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। यहाँ की भौगोलिक स्थिति और टेक्टोनिक प्लेट्स की सक्रियता के कारण अक्सर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में मध्यम और हल्के भूकंप सामान्य घटना हैं,लेकिन लगातार बढ़ती आवृत्ति भविष्य में बड़े खतरे की चेतावनी भी हो सकती है।
इससे पहले 18 अप्रैल को कश्मीर घाटी में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। उस दिन रिक्टर पैमाने पर 5.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था,जिसका केंद्र अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत में स्थित था। सुबह 8 बजकर 24 मिनट पर आए इस भूकंप के दौरान घाटी में घरों के अंदर पंखे और अन्य सामान हिलते हुए देखे गए थे। लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए थे,लेकिन सौभाग्य से उस घटना में भी किसी प्रकार के बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली थी।
भूकंप विज्ञान के जानकारों के अनुसार,कश्मीर घाटी भी भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आती है। यहाँ की भौगोलिक संरचना और हिमालयी क्षेत्र की सक्रियता के कारण समय-समय पर भूकंप के झटके आते रहते हैं। इसी वजह से प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियाँ हमेशा सतर्क रहती हैं और लोगों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
14 अप्रैल को भी देश के विभिन्न हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले की भदेरवाह घाटी में सुबह 4 बजकर 55 मिनट पर 2.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इसके कुछ ही समय बाद उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में सुबह 7 बजकर 7 मिनट पर 3.4 तीव्रता का भूकंप आया। हालाँकि,इन दोनों घटनाओं में भी किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं मिली,लेकिन स्थानीय प्रशासन तुरंत सतर्क हो गया और प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया।
इसी क्रम में 11 अप्रैल को महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के हिंगोली जिले में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.7 मापी गई थी। इसके झटके नांदेड़ और परभणी जैसे पड़ोसी जिलों में भी महसूस किए गए थे। उस समय भी लोगों में दहशत का माहौल बन गया था,हालाँकि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
लगातार अलग-अलग हिस्सों में आ रहे इन भूकंपों ने वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है। उनका मानना है कि भारत के कई क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से सक्रिय जोन में आते हैं,जहाँ समय-समय पर इस तरह की गतिविधियाँ होती रहती हैं। हालाँकि,अधिकांश भूकंप कम तीव्रता के होते हैं,लेकिन इनके लगातार आने से लोगों में डर और चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए जागरूकता और तैयारी बेहद जरूरी है। लोगों को यह जानकारी होनी चाहिए कि भूकंप के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। सुरक्षित स्थानों पर जाना,मजबूत संरचनाओं के नीचे शरण लेना और घबराहट से बचना जैसे उपाय जान-माल के नुकसान को कम कर सकते हैं।
सरकार और संबंधित एजेंसियां भी समय-समय पर मॉक ड्रिल और जागरूकता अभियान चलाती हैं,ताकि लोगों को आपात स्थिति में सही कदम उठाने की जानकारी मिल सके। इसके साथ ही भवन निर्माण में भी भूकंपरोधी तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है,जिससे भविष्य में संभावित नुकसान को कम किया जा सके।
म्यांमार-भारत सीमा पर आया यह भूकंप भले ही बड़े नुकसान का कारण नहीं बना,लेकिन इसने एक बार फिर यह याद दिला दिया है कि देश के कई हिस्से भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्र में आते हैं। ऐसे में सतर्कता,तैयारी और जागरूकता ही इस तरह की आपदाओं से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका है।
