अंबेडकर जयंती पर संसद में श्रद्धांजलि (तस्वीर क्रेडिट@Shekharyadav02)

अंबेडकर जयंती पर संसद में श्रद्धांजलि,नेताओं ने याद किए बाबासाहेब के आदर्श

नई दिल्ली,14 अप्रैल (युआईटीवी)- भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर मंगलवार को संसद परिसर में देश के शीर्ष नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने ‘संविधान के जनक’ को नमन किया और उनके योगदान को याद किया। संसद भवन परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न दलों के नेताओं की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि बाबासाहेब अंबेडकर का व्यक्तित्व और उनके विचार आज भी पूरे देश को एक सूत्र में बांधते हैं।

इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला,केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू, संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल,राज्यसभा सदस्य रामदास अठावले और कांग्रेस नेता उदित राज समेत कई अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। सभी नेताओं ने बाबासाहेब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प दोहराया।

कार्यक्रम के दौरान एक दिलचस्प और सकारात्मक दृश्य भी देखने को मिला,जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच हल्की-फुल्की बातचीत हुई। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद दोनों नेताओं के बीच हुई यह बातचीत लोकतांत्रिक परंपराओं और आपसी सम्मान का प्रतीक मानी जा रही है। इस तरह के क्षण यह दर्शाते हैं कि बाबासाहेब अंबेडकर के विचार केवल संविधान तक सीमित नहीं हैं,बल्कि वे संवाद,सहिष्णुता और लोकतांत्रिक मूल्यों के जीवंत उदाहरण भी हैं।

इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी बाबासाहेब अंबेडकर को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। वर्तमान में गुजरात दौरे पर मौजूद राष्ट्रपति मुर्मु ने गांधीनगर स्थित लोकभवन में अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। अपने संदेश में उन्होंने बाबासाहेब को भारतीय संविधान के प्रमुख निर्माता,महान समाज सुधारक और न्याय के सशक्त प्रवक्ता के रूप में याद किया। राष्ट्रपति ने कहा कि अंबेडकर का जीवन संघर्ष,समर्पण और सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए एक प्रेरणास्रोत है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संदेश में यह भी उल्लेख किया कि बाबासाहेब अंबेडकर न केवल एक प्रखर विधिवेत्ता और अर्थशास्त्री थे,बल्कि वे एक दूरदर्शी चिंतक भी थे,जिन्होंने समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर ने सामाजिक असमानताओं को दूर करने के लिए जो मार्ग दिखाया,वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है,जितना उनके समय में था। उनके प्रयासों ने भारत के लोकतांत्रिक ढाँचे को मजबूत किया और संविधान के माध्यम से सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान किए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बाबासाहेब को श्रद्धांजलि देते हुए उनके योगदान को राष्ट्र निर्माण की दिशा में अत्यंत प्रेरणादायक बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि बाबासाहेब अंबेडकर का जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों को एक न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करता रहेगा। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि अंबेडकर का व्यक्तित्व और कृतित्व देश के लिए सदैव प्रेरणापुंज बना रहेगा।

अपने एक अन्य पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने एक ‘संस्कृत सुभाषित’ भी साझा किया,जिसमें ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को व्यक्त किया गया है। इस श्लोक के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि उदार और विशाल हृदय वाले लोग पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखते हैं। यह विचारधारा बाबासाहेब अंबेडकर के उस दृष्टिकोण से मेल खाती है,जिसमें उन्होंने समानता,बंधुत्व और न्याय को समाज की आधारशिला माना।

अंबेडकर जयंती के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। स्कूलों,कॉलेजों और सामाजिक संगठनों द्वारा भी बाबासाहेब के जीवन और उनके योगदान पर चर्चा की गई। कई स्थानों पर रैलियां और संगोष्ठियाँ आयोजित की गईं,जहाँ लोगों ने उनके विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। यह दिन केवल श्रद्धांजलि देने का नहीं,बल्कि उनके दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प लेने का भी अवसर है।

डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन संघर्षों से भरा रहा,लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और समाज में व्याप्त भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। भारतीय संविधान के निर्माण में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही,जिसने देश को एक मजबूत लोकतांत्रिक ढाँचा प्रदान किया। उन्होंने समानता,स्वतंत्रता और बंधुत्व के सिद्धांतों को संविधान में शामिल कर एक समतामूलक समाज की नींव रखी।

आज जब देश तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है,तब बाबासाहेब अंबेडकर के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। सामाजिक न्याय,समान अवसर और मानवाधिकार जैसे मुद्दे आज भी महत्वपूर्ण हैं और इन सभी के समाधान में अंबेडकर की सोच मार्गदर्शक का काम करती है। उनके विचार हमें यह सिखाते हैं कि एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है,जब समाज का हर वर्ग समान रूप से सशक्त और समृद्ध हो।

अंबेडकर जयंती के इस अवसर पर देश के नेताओं ने न केवल उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की,बल्कि उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश भी दिया। यह दिन हमें याद दिलाता है कि बाबासाहेब का सपना केवल एक संविधान बनाने तक सीमित नहीं था,बल्कि एक ऐसे भारत का निर्माण करना था,जहाँ हर व्यक्ति को समान अधिकार और सम्मान मिले।