तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (तस्वीर क्रेडिट@np_nationpress)

तमिलनाडु में अस्पतालों के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लागू करने की तैयारी,स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

चेन्नई,30 जुलाई (युआईटीवी)- तमिलनाडु सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने और अस्पतालों की स्थापना से जुड़ी जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार जल्द ही अस्पताल परियोजनाओं के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न विभागों से अलग-अलग मंजूरी लेने की लंबी और जटिल प्रक्रिया को समाप्त कर एक ऐसी पारदर्शी और समयबद्ध प्रणाली विकसित करना है,जिसके माध्यम से अस्पतालों को कम समय में आवश्यक अनुमतियाँ मिल सकें। इस पहल को ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र में किया जा रहा एक बड़ा प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार,इस संबंध में सरकारी आदेश पिछले एक सप्ताह से तैयार किया जा रहा है और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के साथ प्रस्तावित समीक्षा बैठक के तुरंत बाद इसे जारी किए जाने की संभावना है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है,तो अस्पताल परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अब तक जिन परियोजनाओं को सभी विभागों से मंजूरी प्राप्त करने में कई वर्ष लग जाते थे,वे भविष्य में कुछ ही महीनों के भीतर स्वीकृत हो सकेंगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय तमिलनाडु के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। राज्य पहले से ही चिकित्सा सेवाओं,मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य अवसंरचना के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाता है। अब यदि अस्पतालों की मंजूरी प्रक्रिया को भी सरल और पारदर्शी बना दिया जाता है,तो निजी निवेशकों और चिकित्सकों के लिए नए अस्पताल स्थापित करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगा।

सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम का मूल उद्देश्य यह है कि अस्पताल स्थापित करने के इच्छुक निवेशकों और संस्थानों को अलग-अलग सरकारी विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें। वर्तमान व्यवस्था में भवन निर्माण,अग्नि सुरक्षा,पर्यावरण स्वीकृति,स्थानीय निकायों, स्वास्थ्य विभाग और अन्य नियामक संस्थाओं से अलग-अलग अनुमति लेनी पड़ती है। इस प्रक्रिया में कई बार अत्यधिक समय लग जाता है,जिससे परियोजनाओं की लागत बढ़ जाती है और निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल बनता है। नई व्यवस्था इन सभी प्रक्रियाओं को एकीकृत करने का प्रयास करेगी।

इस सुधार के लागू होने के बाद तमिलनाडु उन राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा,जहाँ पहले से ही स्वास्थ्य क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस प्रणाली लागू है। महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में इस प्रकार की व्यवस्था के कारण अस्पताल परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज और अधिक पारदर्शी मानी जाती है। तमिलनाडु सरकार का मानना है कि इसी प्रकार की प्रणाली अपनाकर राज्य में भी स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास को नई गति दी जा सकती है।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार,यह पहल केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को आसान बनाने तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करना भी है। सरकार चाहती है कि निजी क्षेत्र अधिक संख्या में अस्पताल,विशेष चिकित्सा केंद्र और आधुनिक स्वास्थ्य संस्थान स्थापित करे,जिससे राज्य में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हो और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों ने लंबे समय से मौजूदा मंजूरी प्रणाली को जटिल और समय लेने वाली बताया है। उनका कहना है कि भवन निर्माण और परियोजना डिजाइन जमा करने के बाद विभिन्न विभागों की अलग-अलग मंजूरी प्राप्त करना बेहद कठिन हो जाता था। कई मामलों में फाइलें महीनों तक लंबित रहती थीं और परियोजनाओं में अनावश्यक देरी होती थी। इस कारण निवेशकों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता था और कई परियोजनाएँ समय पर पूरी नहीं हो पाती थीं।

उद्योग से जुड़े कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि मंजूरी प्रक्रिया के दौरान कई प्रकार की अनियमितताओं का सामना करना पड़ता था। उनके अनुसार,कुछ मामलों में अस्पताल परियोजनाओं को स्वीकृति दिलाने के नाम पर 40 लाख से 50 लाख रुपये तक की माँग किए जाने की शिकायतें भी सामने आई थीं। हालाँकि,इन आरोपों पर आधिकारिक स्तर पर कोई पुष्टि नहीं की गई है,लेकिन सरकार नई व्यवस्था के माध्यम से ऐसी संभावित अनियमितताओं को समाप्त करना चाहती है।

नई प्रणाली में पारदर्शी और मानकीकृत शुल्क संरचना लागू किए जाने की संभावना है। इससे सभी आवेदकों के लिए समान नियम लागू होंगे और पूरी प्रक्रिया अधिक जवाबदेह बनेगी। डिजिटल माध्यम से आवेदन,समयबद्ध स्वीकृति और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय जैसी व्यवस्थाएँ भी इस प्रणाली का हिस्सा बन सकती हैं। इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और प्रशासनिक पारदर्शिता को भी मजबूती मिलेगी।

स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाओं से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में तमिलनाडु में कम से कम सात से आठ ऐसे अस्पतालों की परियोजनाएँ लंबित हैं,जिन्हें डॉक्टरों द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है। मंजूरी प्रक्रिया में देरी के कारण इन परियोजनाओं पर काम शुरू नहीं हो पाया है। इसके विपरीत अन्य राज्यों में इसी प्रकार की परियोजनाओं को अपेक्षाकृत जल्दी स्वीकृति मिल चुकी है और वहाँ निर्माण कार्य भी तेजी से आगे बढ़ा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसी लंबित परियोजनाओं को भी गति मिलने की उम्मीद है।

दिलचस्प बात यह है कि अस्पतालों के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम का प्रस्ताव कोई नया नहीं है। स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिनिधियों के अनुसार,पिछले एक दशक से अधिक समय से इस व्यवस्था की माँग की जा रही थी। उद्योग संगठनों,अस्पताल संचालकों और चिकित्सकों ने कई बार सरकार से अनुरोध किया था कि मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाया जाए,ताकि राज्य में स्वास्थ्य क्षेत्र का विकास तेज हो सके। अब जाकर सरकार इस दिशा में निर्णायक कदम उठाने जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सुधार प्रभावी ढंग से लागू होता है,तो इसका लाभ केवल निवेशकों को ही नहीं,बल्कि आम नागरिकों को भी मिलेगा। नए अस्पतालों की स्थापना से स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी,आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होगा और दूरदराज के क्षेत्रों में भी बेहतर इलाज की संभावना मजबूत होगी। साथ ही चिकित्सा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे,क्योंकि नए अस्पतालों के साथ डॉक्टरों,नर्सों,तकनीशियनों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की माँग भी बढ़ेगी।

तमिलनाडु पहले से ही मेडिकल टूरिज्म,सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। राज्य में बड़ी संख्या में देश-विदेश के मरीज इलाज के लिए आते हैं। सरकार का मानना है कि यदि अस्पतालों की स्थापना की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया जाता है,तो राज्य की यह स्थिति और मजबूत होगी तथा तमिलनाडु स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा निवेश का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।

अधिकारियों ने संकेत दिया है कि मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक के बाद इस संबंध में सरकारी आदेश जारी किया जा सकता है। आदेश लागू होने के साथ ही अस्पताल परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को नई व्यवस्था के तहत संचालित किया जाएगा। इससे न केवल लंबित परियोजनाओं को गति मिलेगी,बल्कि भविष्य में आने वाले निवेशकों को भी स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध प्रणाली का लाभ मिलेगा।

कुल मिलाकर,तमिलनाडु सरकार की यह पहल राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार के रूप में देखी जा रही है। अस्पतालों के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लागू होने से निवेश बढ़ने,स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार,प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आने और चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है,तो तमिलनाडु न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश के लिए और अधिक आकर्षक गंतव्य बनेगा,बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक सफल मॉडल के रूप में उभर सकता है।