फिल्म निर्माता-निर्देशक आशुतोष गोवारिकर (तस्वीर क्रेडिट@airnewsalerts)

आईएफएफआई 57 के लिए आशुतोष गोवारिकर बने महोत्सव निदेशक,भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर मिलेगा नया आयाम

नई दिल्ली,2 मई (युआईटीवी)- भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक अहम निर्णय लेते हुए प्रख्यात फिल्म निर्माता-निर्देशक आशुतोष गोवारिकर को गोवा में आयोजित होने वाले 57वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) का महोत्सव निदेशक नियुक्त किया है। इस घोषणा के साथ ही फिल्म जगत में उत्साह का माहौल बन गया है,क्योंकि गोवारिकर का नाम भारतीय सिनेमा में गुणवत्ता और वैश्विक पहचान का पर्याय माना जाता है।

आशुतोष गोवारिकर उन फिल्मकारों में शामिल हैं जिन्होंने भारतीय सिनेमा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। ‘लगान’, ‘स्वदेश’ और ‘जोधा अकबर’ जैसी फिल्मों के माध्यम से उन्होंने न केवल दर्शकों का दिल जीता,बल्कि वैश्विक मंच पर भारतीय फिल्मों की साख को भी मजबूत किया। उनकी फिल्मों में सामाजिक सरोकार,ऐतिहासिक दृष्टिकोण और तकनीकी उत्कृष्टता का अनूठा संगम देखने को मिलता है। ऐसे में आईएफएफआई जैसे प्रतिष्ठित मंच की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आना सिनेमा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है।

भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव,जिसे भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के नाम से जाना जाता है,एशिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में से एक है। इसकी शुरुआत वर्ष 1952 में हुई थी और तब से यह सिनेमा प्रेमियों,फिल्म निर्माताओं और कलाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। आज यह दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा फिल्म महोत्सव माना जाता है,जहाँ दुनियाभर की फिल्मों का प्रदर्शन होता है और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है।

गोवारिकर का इस महोत्सव से जुड़ाव भी बेहद पुराना और गहरा रहा है। उन्होंने वर्ष 1984 में पहली बार इस महोत्सव में भाग लिया था और तब से लेकर अब तक वे विभिन्न भूमिकाओं में इससे जुड़े रहे हैं। हाल ही में 2024 में उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा जूरी के अध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएँ दी थीं। इस लंबे अनुभव के कारण उन्हें इस महोत्सव की संरचना,उद्देश्य और महत्व की गहरी समझ है,जो उनके नए दायित्व में काफी सहायक साबित होगी।

अपनी नियुक्ति पर खुशी जाहिर करते हुए गोवारिकर ने कहा कि यह उनके लिए अत्यंत गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि इस प्रतिष्ठित महोत्सव का निदेशक बनना उनके लिए एक विशेष अवसर है और वे इसकी समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि 1952 से चली आ रही इस परंपरा को नई ऊँचाइयों तक ले जाना उनके लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है,जिसे वे पूरी गंभीरता से निभाएंगे।

आईएफएफआई का आयोजन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम और गोवा सरकार के सहयोग से हर वर्ष किया जाता है। यह महोत्सव न केवल फिल्मों के प्रदर्शन तक सीमित है,बल्कि इसमें कई अन्य आकर्षण भी शामिल होते हैं। अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ,क्लासिक फिल्मों की विशेष स्क्रीनिंग,मास्टरक्लास,श्रद्धांजलि कार्यक्रम और वेव्स फिल्म मार्केट जैसे आयोजन इसे और भी खास बनाते हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से नए और स्थापित फिल्मकारों को एक मंच मिलता है,जहाँ वे अपने विचार साझा कर सकते हैं और नए अवसरों की तलाश कर सकते हैं।

नवंबर 2026 में गोवा के खूबसूरत तटीय क्षेत्र में आयोजित होने वाला 57वां संस्करण पहले से कहीं अधिक व्यापक और भव्य होने की उम्मीद है। इस बार महोत्सव में विभिन्न भाषाओं और विधाओं की फिल्मों के साथ-साथ नई तकनीकों को भी विशेष महत्व दिया जाएगा। डिजिटल सिनेमा, वर्चुअल रियलिटी और अन्य आधुनिक माध्यमों को शामिल कर इसे और भी समकालीन बनाने की योजना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आशुतोष गोवारिकर के नेतृत्व में यह महोत्सव और अधिक प्रभावशाली रूप में सामने आएगा। उनकी रचनात्मक दृष्टि और अंतर्राष्ट्रीय अनुभव इस आयोजन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा,उनके नेतृत्व में भारतीय सिनेमा को वैश्विक स्तर पर और अधिक पहचान मिलने की संभावना भी बढ़ गई है।

आईएफएफआई 57 के लिए आशुतोष गोवारिकर की नियुक्ति भारतीय सिनेमा के लिए एक सकारात्मक और उत्साहजनक कदम है। यह न केवल महोत्सव की गुणवत्ता को बढ़ाएगा,बल्कि दुनिया भर के फिल्मकारों और दर्शकों के लिए एक यादगार अनुभव भी साबित हो सकता है। अब सभी की नजरें नवंबर 2026 में होने वाले इस भव्य आयोजन पर टिकी हैं,जहाँ सिनेमा की विविधता और रचनात्मकता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।