निशियो,3 अक्टूबर (युआईटीवी)- एशियन गेम्स 2026 में भारत का बॉक्सिंग अभियान शानदार अंदाज में समाप्त हुआ। आइची-नागोया में आयोजित इन खेलों में भारतीय मुक्केबाजों ने दमदार प्रदर्शन करते हुए कुल छह पदक अपने नाम किए, जिसमें तीन स्वर्ण और तीन कांस्य पदक शामिल रहे। पुरुषों के 80 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में अंकुश पंघाल ने दक्षिण कोरिया के मिनसोंग किम को 4-0 से हराकर भारत की झोली में एक और स्वर्ण पदक डाला। अंकुश की जीत के साथ भारतीय बॉक्सिंग टीम का अभियान स्वर्णिम अंदाज में समाप्त हुआ।
निशियो जिम्नेजियम में खेले गए फाइनल में अंकुश पंघाल ने शुरुआत से ही अपने प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बनाए रखा। मुकाबले में भारतीय मुक्केबाज की रणनीति साफ नजर आई। उन्होंने आक्रामक पंच के साथ-साथ सही समय पर काउंटर पंच का इस्तेमाल किया और रक्षात्मक खेल में भी मजबूती दिखाई। पांच जजों में से चार ने अंकुश के पक्ष में 30-26 का फैसला दिया,जबकि एक जज ने दोनों मुक्केबाजों को 28-28 अंक दिए। इस तरह अंकुश ने 4-0 के सर्वसम्मत फैसले से मुकाबला अपने नाम कर लिया।
पहले राउंड की शुरुआत से ही अंकुश लय में नजर आए। दक्षिण कोरियाई मुक्केबाज किम को शुरुआती दौर में ही चेतावनी मिली,जिसके कारण उन्हें एक अंक का नुकसान उठाना पड़ा। इसका फायदा अंकुश ने भी उठाया और लगातार आक्रामक पंच लगाकर अपने प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बनाए रखा। भारतीय मुक्केबाज ने बेहतर फुटवर्क और सटीक पंच के दम पर पहला राउंड 4-1 से अपने नाम किया। पहले ही दौर में मिली बढ़त ने अंकुश के आत्मविश्वास को और मजबूत कर दिया।
दूसरे राउंड में भी अंकुश ने अपनी रणनीति में बदलाव नहीं किया। उन्होंने एक-दो के कॉम्बिनेशन के साथ काउंटर पंच का बेहतरीन इस्तेमाल किया। किम ने इस राउंड में वापसी की कोशिश की और कुछ अच्छे पंच भी लगाए,लेकिन अंकुश की गति और टाइमिंग उनसे बेहतर रही। भारतीय मुक्केबाज ने राउंड में 5-0 से जीत हासिल की। दो राउंड के बाद अंकुश मुकाबले पर मजबूत पकड़ बना चुके थे और अब उनके सामने केवल अंतिम राउंड को सँभालने की चुनौती थी।
तीसरे राउंड में दक्षिण कोरियाई मुक्केबाज के लिए वापसी जरूरी थी, लेकिन अंकुश ने उन्हें कोई आसान मौका नहीं दिया। भारतीय मुक्केबाज ने काउंटर पंच का प्रभावी इस्तेमाल किया और प्रतिद्वंद्वी के हमलों का जवाब तुरंत दिया। उन्होंने डिफेंस और अटैक के बीच शानदार संतुलन बनाए रखा। अंकुश ने तीसरा राउंड भी 4-1 से जीत लिया। तीनों राउंड में बेहतर प्रदर्शन के बाद उन्होंने मुकाबला 4-0 से अपने नाम कर लिया।
अंकुश के स्वर्ण पदक के साथ ही भारतीय बॉक्सिंग टीम ने एशियन गेम्स 2026 में अपने अभियान का शानदार अंत किया। इस प्रतियोगिता में भारत ने कुल 11 मुक्केबाज उतारे थे। इनमें से छह खिलाड़ी पदक जीतने में सफल रहे। तीन मुक्केबाजों ने स्वर्ण पदक हासिल किया,जबकि तीन को कांस्य पदक मिला। इस प्रदर्शन ने भारतीय बॉक्सिंग के लिए इन एशियन गेम्स को विशेष बना दिया।
अंकुश से पहले परवीन हुड्डा और लवलीना बोरगोहेन भी भारत के लिए स्वर्ण पदक जीत चुकी थीं। परवीन ने महिलाओं के वर्ग में कड़े मुकाबले के बाद गोल्ड अपने नाम किया। उनका फाइनल चीनी ताइपे की निएन-चिन चे के खिलाफ हुआ था। मुकाबला तीनों राउंड में काफी संघर्षपूर्ण रहा और दोनों मुक्केबाजों ने एक-दूसरे को कड़ी चुनौती दी।
परवीन ने फाइनल की शुरुआत शानदार अंदाज में की। उन्होंने पहले राउंड में 5-0 से जीत हासिल की और शुरुआती बढ़त बना ली। हालाँकि,दूसरे राउंड में निएन-चिन चे ने जोरदार वापसी की। उन्होंने भी 5-0 से दूसरा राउंड जीतकर मुकाबले को बराबरी के करीब पहुँचा दिया। अब नतीजा तीसरे और निर्णायक राउंड पर निर्भर था। दबाव के बावजूद परवीन ने अपना धैर्य बनाए रखा और अंतिम राउंड 3-2 से जीत लिया। इसके साथ ही उन्होंने 3-2 के विभाजित फैसले से स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
परवीन की यह जीत भारतीय महिला बॉक्सिंग के लिए भी खास रही। वह एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की तीसरी महिला मुक्केबाज बनीं। इससे पहले दिग्गज मुक्केबाज मैरी कॉम ने 2014 के इंचियोन एशियन गेम्स में महिलाओं के 51 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद लवलीना बोरगोहेन ने शुक्रवार को महिलाओं के 75 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड हासिल किया। अब परवीन की सफलता ने भारतीय महिला बॉक्सिंग के स्वर्णिम अध्याय में एक और नाम जोड़ दिया।
लवलीना के लिए एशियन गेम्स 2026 का स्वर्ण पदक व्यक्तिगत रूप से भी बेहद खास रहा। शुक्रवार को अपना 29वां जन्मदिन मना रहीं लवलीना ने चीन की जियी बाओ को 5-0 से हराकर गोल्ड जीता। इस जीत के साथ उन्होंने अपने जन्मदिन को यादगार बना दिया। लवलीना ने फाइनल में शुरू से अंत तक बेहतर नियंत्रण बनाए रखा और चीनी मुक्केबाज को मुकाबले में वापसी का मौका नहीं दिया।
टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीत चुकीं लवलीना ने एशियन गेम्स में भी अपने प्रदर्शन को एक कदम आगे बढ़ाया। 2022 के एशियन गेम्स में उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा था,लेकिन इस बार उन्होंने उस प्रदर्शन को स्वर्ण पदक में बदल दिया। 75 किलोग्राम वर्ग में मिली इस जीत ने उन्हें एशियन गेम्स के मंच पर एक और बड़ी उपलब्धि दिलाई। महिलाओं की बॉक्सिंग में भारत को लंबे समय बाद स्वर्ण पदक दिलाने में भी उनकी जीत महत्वपूर्ण रही।
भारतीय बॉक्सिंग टीम के खाते में तीन कांस्य पदक भी आए। पुरुषों के 90 किलोग्राम वर्ग में कपिल पोखरिया,पुरुषों के 90 किलोग्राम से अधिक वर्ग में नरेंद्र बेरवाल और महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में प्रिया घांघस ने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। हालाँकि, तीनों अपने-अपने सेमीफाइनल मुकाबले हार गए और उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। बॉक्सिंग में सेमीफाइनल तक पहुँचने वाले दोनों खिलाड़ियों को कांस्य पदक मिलता है,इसलिए इन तीनों ने बिना कोई अतिरिक्त मुकाबला खेले पदक अपने नाम किया।
भारतीय दल के बाकी मुक्केबाजों का सफर हालाँकि,पदक तक नहीं पहुँच सका। महिलाओं के 51 किलोग्राम वर्ग में साक्षी चौधरी को अंतिम 16 के मुकाबले में कजाकिस्तान की मौजूदा विश्व चैंपियन अलुआ बाल्किबेकोवा से हार का सामना करना पड़ा। महिलाओं के 54 किलोग्राम वर्ग में प्रीति पंवार प्री-क्वार्टर फाइनल में उत्तर कोरिया की पैंग चोल मी से हारकर बाहर हो गईं। पुरुषों के 55 किलोग्राम वर्ग में जादुमनी सिंह को प्री-क्वार्टर फाइनल में फिलीपींस के कार्लो पालाम ने हराया।
पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में सचिन सिवाच का सफर क्वार्टर फाइनल में समाप्त हुआ। उन्हें जापान के शुनसुके कितामोटो के खिलाफ हार मिली। वहीं,पुरुषों के 70 किलोग्राम वर्ग में सुमित कुंडू प्री-क्वार्टर फाइनल में ईरान के अली कासिम अल-सराय से हार गए। इन परिणामों के बावजूद भारतीय दल ने छह पदकों के साथ प्रतियोगिता में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
भारतीय बॉक्सिंग के इस अभियान की खास बात सिर्फ पदकों की संख्या नहीं,बल्कि स्वर्ण पदकों की संख्या भी रही। एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल के लिहाज से यह भारत का अब तक का सबसे सफल बॉक्सिंग अभियान रहा। इससे पहले पिछले एशियन गेम्स में भारत ने बॉक्सिंग में कुल चार पदक जीते थे,जिनमें एक रजत और तीन कांस्य पदक शामिल थे। इस बार भारत ने तीन स्वर्ण और तीन कांस्य सहित छह पदक हासिल कर उस प्रदर्शन को पीछे छोड़ दिया।
हालाँकि,एशियन गेम्स 2010 में भारत ने बॉक्सिंग में कुल नौ पदक जीते थे,जो संख्या के लिहाज से अब भी बड़ा अभियान रहा,लेकिन 2026 में तीन स्वर्ण पदक जीतना भारतीय बॉक्सिंग के लिए विशेष उपलब्धि बन गया। अंकुश पंघाल,परवीन हुड्डा और लवलीना बोरगोहेन ने स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय मुक्केबाजी की सफलता को नई ऊँचाई दी।
पूरे अभियान को देखें तो भारतीय मुक्केबाजों ने अलग-अलग भार वर्गों में मजबूत प्रदर्शन किया। कुछ खिलाड़ियों को शुरुआती दौर में ही कठिन प्रतिद्वंद्वियों का सामना करना पड़ा,जबकि कुछ ने क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल तक पहुँचकर पदक पक्का किया। तीन खिलाड़ियों ने फाइनल जीतकर देश के लिए स्वर्ण पदक हासिल किया और तीन अन्य मुक्केबाज सेमीफाइनल तक पहुँचकर कांस्य पदक जीतने में सफल रहे।
अंकुश पंघाल की फाइनल जीत के साथ भारत का बॉक्सिंग अभियान जिस अंदाज में समाप्त हुआ,उसने पूरे टूर्नामेंट के प्रदर्शन को खास बना दिया। 80 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में उनका एकतरफा दबदबा, परवीन की दबाव में निर्णायक जीत और लवलीना का जन्मदिन पर स्वर्ण पदक जीतना इस अभियान की प्रमुख उपलब्धियाँ रहीं। छह पदकों के साथ भारतीय मुक्केबाजों ने एशियन गेम्स 2026 में यह संदेश भी दिया कि देश की बॉक्सिंग प्रतिभा लगातार मजबूत हो रही है और बड़े अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारतीय मुक्केबाज पदक जीतने की क्षमता रखते हैं।
