निशियो,3 अक्टूबर (युआईटीवी)- एशियन गेम्स 2026 में भारतीय कुश्ती के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। नागोया सिटी इनाए स्पोर्ट्स सेंटर में खेले गए पुरुषों के फ्रीस्टाइल 65 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में भारत के 23 वर्षीय पहलवान सुजीत कलकल ने असाधारण प्रदर्शन करते हुए ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुदियेव को 10-9 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। मुकाबले में एक समय सुजीत 2-9 से पीछे चल रहे थे और ताजिकिस्तान के पहलवान की जीत लगभग तय नजर आ रही थी,लेकिन भारतीय पहलवान ने आखिरी पलों में ऐसी जबरदस्त वापसी की, जिसने पूरे मुकाबले का रुख बदल दिया।
सुजीत ने अंतिम क्षणों में लगातार आठ अंक हासिल किए और 10-9 से मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ उन्होंने एशियन गेम्स 2026 में कुश्ती में भारत के स्वर्ण पदक का इंतजार भी खत्म कर दिया। फाइनल में उनकी शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही और कुदियेव ने मुकाबले में लगातार बढ़त बनाए रखी। एक समय ताजिकिस्तान के पहलवान ने 9-2 की बढ़त बना ली थी। सुजीत पर दबाव साफ दिखाई दे रहा था, लेकिन उन्होंने अपनी रणनीति और आक्रामकता में कोई कमी नहीं आने दी। मुकाबले के अंतिम दौर में उन्होंने लगातार अंक बटोरते हुए पहले अंतर कम किया और फिर निर्णायक बढ़त हासिल कर ली।
सुजीत का एशियन गेम्स अभियान फाइनल से पहले ही बेहद प्रभावशाली रहा था। उन्होंने स्वर्ण पदक के मुकाबले तक पहुँचने के रास्ते में अफगानिस्तान,ईरान और जापान के मजबूत पहलवानों को मात दी। उनकी शुरुआत अफगानिस्तान के सैयद उमर जजई के खिलाफ मुकाबले से हुई। इस मुकाबले में भारतीय पहलवान को शुरुआत में मुश्किल का सामना करना पड़ा और वह 0-3 से पिछड़ गए। हालाँकि,सुजीत ने जल्द ही अपनी रणनीति बदली और पुश-आउट के जरिए अंक हासिल किए। इसके बाद उन्होंने शोल्डर थ्रो का शानदार इस्तेमाल करते हुए बढ़त अपने पक्ष में कर ली।
मुकाबला आगे बढ़ने के साथ सुजीत ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली। उन्होंने एक और थ्रो के साथ रोल के जरिए अतिरिक्त अंक हासिल किए और देखते ही देखते मुकाबले में निर्णायक बढ़त बना ली। अंत में उन्होंने 13-3 से जीत दर्ज की और तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। इस प्रदर्शन ने साफ कर दिया था कि भारतीय पहलवान इस प्रतियोगिता में बड़ी चुनौती पेश करने के लिए तैयार हैं।
क्वार्टर फाइनल में सुजीत के सामने ईरान के अब्बास इब्राहिमजादेहसावदकोही थे। इस मुकाबले में भारतीय पहलवान ने शुरुआत से ही नियंत्रण बनाए रखा। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को कोई अंक हासिल करने का मौका नहीं दिया और तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ सुजीत ने सेमीफाइनल में जगह बनाई, जहाँ उनके सामने जापान के ओलंपिक चैंपियन कोटारो कियोका की चुनौती थी।
सेमीफाइनल सुजीत के अभियान का सबसे कठिन मुकाबला साबित हुआ। पहले पीरियड के अंत तक जापानी पहलवान 2-0 से आगे थे। इसके बावजूद सुजीत ने धैर्य नहीं खोया। दूसरे पीरियड में उन्होंने आक्रामक रुख अपनाया और तीन अंक हासिल किए। कियोका इस दौरान केवल एक अंक ही जुटा सके। मुकाबला 3-3 की बराबरी पर समाप्त हुआ। इसके बाद तय नियमों के आधार पर सुजीत को विजेता घोषित किया गया और उन्होंने फाइनल में प्रवेश कर लिया।
फाइनल में ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुदियेव के खिलाफ सुजीत के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी। कुदियेव ने मुकाबले के दौरान 9-2 की बढ़त बनाकर भारतीय पहलवान पर दबाव डाल दिया था। ऐसे समय में सुजीत के सामने मुकाबले को पलटना बेहद मुश्किल नजर आ रहा था,लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय आखिरी पलों में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। एक के बाद एक अंक हासिल करते हुए उन्होंने पहले कुदियेव की बढ़त को कम किया और फिर स्कोर बराबरी के करीब पहुँचा दिया।
इसके बाद सुजीत ने लगातार आठ अंक हासिल कर मुकाबले का परिणाम ही बदल दिया। अंतिम क्षणों में मिली यह बढ़त उनके लिए निर्णायक साबित हुई और उन्होंने 10-9 से रोमांचक जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक पर कब्जा कर लिया। मुकाबले के बाद भारतीय पहलवान की यह वापसी एशियन गेम्स 2026 के सबसे रोमांचक क्षणों में शामिल हो गई।
सुजीत कलकल के इस स्वर्ण पदक की खास बात यह भी रही कि उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में लगातार कठिन चुनौतियों का सामना किया। पहले तकनीकी श्रेष्ठता से जीत, फिर ईरानी पहलवान के खिलाफ दबदबा,सेमीफाइनल में ओलंपिक चैंपियन को हराना और अंत में फाइनल में 2-9 से पिछड़ने के बाद जीत दर्ज करना उनके अभियान को खास बनाता है। उनकी इस उपलब्धि ने एशियन गेम्स 2026 में भारतीय कुश्ती को महत्वपूर्ण स्वर्ण पदक दिलाया और देश के लिए इस खेल में पदक अभियान को यादगार बना दिया। फाइनल के आखिरी पलों में सुजीत की आठ अंकों की वापसी लंबे समय तक भारतीय खेल प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बनी रहेगी।
