काकामिगहारा,26 सितंबर (युआईटीवी)- एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। शनिवार को खेले गए पूल ए के मुकाबले में भारत ने मेजबान जापान को 2-0 से हराकर लगातार चौथी जीत दर्ज की। कावासाकी जुको हॉकी स्टेडियम में लगातार बारिश के बीच खेले गए इस मुकाबले में जापान ने भारतीय टीम को कड़ी चुनौती दी,लेकिन मौजूदा चैंपियन ने अहम मौकों पर धैर्य बनाए रखते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया। भारत की ओर से अभिषेक ने पहले क्वार्टर में गोल किया,जबकि कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने तीसरे क्वार्टर में पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर टीम की बढ़त दोगुनी कर दी।
इस जीत के साथ भारतीय टीम ने टूर्नामेंट के अंतिम चार में अपनी जगह सुनिश्चित कर ली है। भारत ने अब तक अपने सभी चार मुकाबले जीतकर पूल ए में शानदार प्रदर्शन किया है। टीम की आक्रमण क्षमता के साथ-साथ डिफेंस ने भी लगातार प्रभावित किया है। जापान के खिलाफ मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों को मौसम और मेजबान टीम की रणनीति दोनों से चुनौती मिली,लेकिन टीम ने पूरे मैच के दौरान अपनी लय बनाए रखने की कोशिश की। भारत का पूल ए में आखिरी मुकाबला 28 सितंबर को बांग्लादेश के खिलाफ होना है। सेमीफाइनल का टिकट पहले ही हासिल कर चुकी भारतीय टीम इस मुकाबले के जरिए अपने अभियान को और मजबूत करने के इरादे से मैदान में उतरेगी।
जापान के खिलाफ मुकाबला भारतीय डिफेंडर संजय के लिए भी बेहद खास रहा। उन्होंने इस मैच के साथ अपना 100वां सीनियर अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला पूरा किया। भारतीय हॉकी में किसी खिलाड़ी के लिए 100 अंतर्राष्ट्रीय मैच पूरे करना महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है और संजय के लिए यह अवसर उस समय और यादगार बन गया, जब उनकी टीम ने जीत के साथ सेमीफाइनल में जगह बनाई। मैच से पहले से ही इस उपलब्धि को लेकर चर्चा थी और मुकाबले के बाद भारतीय टीम के लिए जीत के साथ यह व्यक्तिगत उपलब्धि भी जश्न का कारण बनी।
मुकाबले की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने आक्रामक तेवर दिखाए। भारत ने तीसरे मिनट में ही जापानी गोल पर दबाव बनाने की कोशिश की। एक एरियल पास सर्कल के शीर्ष पर अभिषेक के पास पहुँचा और वह गोलकीपर ताकाशी योशिकावा के सामने वन-ऑन-वन की स्थिति में आ गए। भारतीय टीम को यहाँ गोल का मौका दिखाई दिया,लेकिन गेंद को खतरनाक मानते हुए इस मूव को रोक दिया गया। इसके कुछ ही देर बाद भारत ने पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया। छठे मिनट में जापानी खिलाड़ी के पैर से गेंद लगने के बाद भारतीय टीम को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने फ्लिक लगाया,लेकिन गेंद रशर के पैर से टकरा गई और दोबारा मिले मौके पर पोस्ट के पास खड़े जापानी डिफेंडर ने शानदार बचाव करते हुए भारत को बढ़त लेने से रोक दिया।
जापान ने भी भारतीय दबाव का जवाब तेजी से दिया। मेजबान टीम ने सातवें मिनट में तेज काउंटर-अटैक करते हुए लगातार दो मौके बनाए। सेरेन तनाका के पहले प्रयास में पूरी तरह नियंत्रण नहीं बन पाया, लेकिन उन्हें तुरंत दूसरा मौका मिला। हालाँकि,भारतीय गोलकीपर सूरज करकेरा ने शानदार स्थिति बनाए रखते हुए जापान को गोल करने से रोक दिया। जापान के इस हमले ने भारतीय डिफेंस को सतर्क कर दिया। भारत ने इसके बाद गेंद पर अपना नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश की और जापानी सर्कल में लगातार प्रवेश करने के मौके तलाशे।
नौवें मिनट में मनप्रीत सिंह ने दिलप्रीत सिंह को गोल करने का अच्छा अवसर दिया। भारतीय टीम ने तेजी से मूव बनाया और गेंद को जापानी डिफेंस के पीछे पहुँचाने की कोशिश की, लेकिन दिलप्रीत के प्रयास में गोल के लिए जरूरी ताकत नहीं थी। जापान ने इसके बाद एक ऐसा मूव बनाया,जिससे उसे लगा कि वह मुकाबले में आगे निकल गया है। 10वें मिनट में गेंद गोल में पहुँची,लेकिन भारतीय खिलाड़ी के पैर से गेंद के संपर्क में आने के कारण गोल को अमान्य करार दिया गया। इस फैसले से भारत ने राहत की सांस ली और मैच एक बार फिर बराबरी की स्थिति में बना रहा।
भारत लगातार मौके बनाने की कोशिश कर रहा था। शिलानंद लाकड़ा ने बीच से शानदार दौड़ लगाई और अभिषेक को गेंद पहुँचाई। अभिषेक ने आगे बढ़ते हुए सुखजीत सिंह को गेंद देने का प्रयास किया,लेकिन यह मूव अंतिम चरण में सफल नहीं हो सका। इसके बावजूद भारतीय टीम का दबाव कम नहीं हुआ। आखिरकार 15वें मिनट में भारत को वह सफलता मिली जिसका उसे इंतजार था। जापानी डिफेंस ने सर्कल के शीर्ष पर अभिषेक को अपेक्षाकृत ज्यादा जगह और समय दे दिया। भारतीय फॉरवर्ड ने इस अवसर का पूरा फायदा उठाया। उन्होंने गोलकीपर को छकाते हुए गेंद को गोल में पहुँचा दिया और भारत को पहले क्वार्टर के अंत में 1-0 की बढ़त दिला दी।
पहले क्वार्टर में बढ़त हासिल करने के बाद भारत के सामने चुनौती थी कि वह दूसरे क्वार्टर में जापान की वापसी को रोके। जापान ने खेल दोबारा शुरू होते ही आक्रामक रवैया अपनाया। 17वें मिनट में मेजबान टीम ने पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया। र्योमा ओका ने जोरदार शॉट लगाया,लेकिन भारतीय खिलाड़ी की स्टिक ने गेंद को रोककर खतरा टाल दिया। जापान की कोशिश लगातार जारी रही,लेकिन भारतीय डिफेंस ने सर्कल के भीतर जगह कम रखी।
भारत भी अपनी बढ़त बढ़ाने के मौके तलाश रहा था। जरमनप्रीत सिंह,राजिंदर सिंह और सुखजीत सिंह ने मिलकर एक शानदार मूव तैयार किया। भारतीय टीम जापानी गोल के करीब पहुँची,लेकिन राजिंदर का पास गोल के सामने से निकल गया और कोई भारतीय खिलाड़ी उसे गोल में नहीं पहुँचा सका। दूसरी ओर,जापान जब भी काउंटर-अटैक करता, भारतीय गोलकीपर और डिफेंडर मजबूती से सामने खड़े दिखाई दिए। मोहित एचएस ने भी एक महत्वपूर्ण बचाव करते हुए जापान को बराबरी का मौका नहीं दिया।
21वें मिनट में भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला। इस बार जुगराज सिंह ने गेंद को जमीन के सहारे गोल की दिशा में भेजने की कोशिश की, लेकिन शॉट में पर्याप्त ताकत नहीं थी। जापानी डिफेंस ने आसानी से गेंद को बाहर कर दिया। इसके बाद मेजबान टीम ने अपने रक्षात्मक ढाँचे को और मजबूत कर लिया। जापान ने भारत के फॉरवर्ड खिलाड़ियों को सर्कल में ज्यादा जगह नहीं दी और पहले हाफ के बाकी हिस्से में भारतीय टीम के लिए स्पष्ट गोल का अवसर बनाना मुश्किल हो गया। हाफ टाइम तक भारत 1-0 से आगे रहा।
तीसरे क्वार्टर में जापान ने अपनी रणनीति में बदलाव किया। मेजबान टीम ने गहराई में रहकर डिफेंस करने और गेंद हासिल होते ही तेज काउंटर-अटैक करने पर भरोसा किया। भारत ने हालाँकि,गेंद पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की। 36वें मिनट में जापान ने भारतीय सर्कल में अच्छी तरह से तैयार किया गया मूव बनाया और इसके बाद उसे पेनल्टी कॉर्नर मिला। शोता यामाडा ने पहला प्रयास किया,लेकिन वह सफल नहीं रहा। जापान ने वीडियो रेफरल का सहारा लिया और दोबारा जाँच के बाद यह फैसला उसके पक्ष में गया कि गेंद भारतीय खिलाड़ी के पैर से लगी थी। इसके बाद जापान को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला।
इस मौके पर भारतीय टीम के लिए सूरज करकेरा ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने जापान के प्रयास को रोककर भारत की बढ़त को कायम रखा। यह बचाव इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि उस समय जापान लगातार दबाव बना रहा था और एक गोल मैच का रुख बदल सकता था। भारतीय डिफेंस ने इसके बाद भी संयम बनाए रखा और जापानी खिलाड़ियों को लगातार हमले करने के बावजूद बराबरी का आसान अवसर नहीं दिया।
भारत को 40वें मिनट में वह सफलता मिली जिसने मुकाबले पर उसकी पकड़ काफी मजबूत कर दी। भारतीय टीम को अपना छठा पेनल्टी कॉर्नर मिला और इस बार कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने कोई गलती नहीं की। उन्होंने अपनी खास शैली में तेज गति से फ्लिक लगाया। गेंद जापानी गोल के बाएँ कोने की ओर गई और इतनी तेजी से पहुँचीं कि गोलकीपर के पास उसे रोकने का कोई अवसर नहीं था। इस गोल के साथ भारत ने 2-0 की बढ़त हासिल कर ली। हरमनप्रीत का यह गोल टीम के लिए निर्णायक साबित हुआ और जापान के सामने अब दो गोल की कमी को पूरा करने की चुनौती थी।
भारत यहीं नहीं रुका। 43वें मिनट में उसे एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला। हरमनप्रीत ने फिर से गोल करने की कोशिश की,लेकिन इस बार जापानी गोलकीपर ने गेंद को रोक लिया। भारतीय कप्तान को लगा कि गेंद जापानी खिलाड़ी के पैर से लगी है और उन्होंने वीडियो रेफरल की मांग की। समीक्षा के बाद भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला। हालाँकि, इस बार हरमनप्रीत का ऊँचा शॉट लक्ष्य से बाहर चला गया और भारत अपनी बढ़त को और नहीं बढ़ा सका।
आखिरी क्वार्टर में जापान ने पूरी ताकत के साथ वापसी की कोशिश की। मेजबान टीम ने लगातार भारतीय सर्कल में प्रवेश करने का प्रयास किया, लेकिन भारतीय डिफेंस ने अपने गठन को नहीं टूटने दिया। 46वें मिनट में जुगराज सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर पर जोरदार शॉट लगाया, लेकिन गेंद सीधे जापानी गोलकीपर के पास चली गई। जापान की ओर से भी हमले जारी रहे, लेकिन भारतीय खिलाड़ी हर मूव को रोकने के लिए तैयार नजर आए।
54वें और 55वें मिनट के बीच भारत को लगातार तीन पेनल्टी कॉर्नर मिले। इन मौकों से भारत के पास मैच को पूरी तरह अपने पक्ष में करने और बढ़त बढ़ाने का अवसर था, लेकिन जापानी गोलकीपर और डिफेंस ने शानदार बचाव करते हुए भारत को तीसरा गोल नहीं करने दिया। हालाँकि,इन प्रयासों ने यह जरूर दिखाया कि भारत ने मैच के अंतिम चरण में भी आक्रमण की धार बनाए रखी थी।
मुकाबले के 58वें मिनट में जापान के पास गोल करने का एक आखिरी अच्छा मौका आया। सर्कल के शीर्ष पर गेंद को भारतीय खिलाड़ी पूरी तरह से नियंत्रित नहीं कर सके और मानाबू यामाशिता को शॉट लगाने के लिए जगह मिल गई। जापानी खिलाड़ी ने मौका भुनाने की कोशिश की,लेकिन उनका शॉट गोल के सामने से निकल गया। इसके बाद भारत ने अंतिम मिनटों में पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखा। जापान की कोशिशों के बावजूद भारतीय डिफेंस ने उसे गोल करने का मौका नहीं दिया और मुकाबला 2-0 के स्कोर के साथ भारत के पक्ष में समाप्त हुआ।
भारत की इस जीत में अभिषेक और हरमनप्रीत सिंह के गोल निर्णायक रहे,लेकिन जीत केवल इन दो गोलों तक सीमित नहीं थी। सूरज करकेरा की गोलकीपिंग,भारतीय डिफेंस का अनुशासन और दबाव के समय खिलाड़ियों का संयम भी उतना ही महत्वपूर्ण रहा। जापान ने कई मौकों पर भारतीय टीम को परेशानी में डाला,लेकिन भारत ने महत्वपूर्ण क्षणों में स्थिति को सँभाला।
लगातार चौथी जीत के साथ भारतीय टीम ने एशियन गेम्स 2026 के सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। मौजूदा चैंपियन के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टीम ने कठिन परिस्थितियों,लगातार बारिश और मेजबान जापान के दबाव के बावजूद अपना अभियान अजेय बनाए रखा। अब भारत की नजर 28 सितंबर को बांग्लादेश के खिलाफ होने वाले पूल ए के आखिरी मुकाबले पर होगी। सेमीफाइनल में जगह सुनिश्चित होने के बाद टीम के पास अपने खेल के उन पहलुओं को और बेहतर करने का अवसर होगा,जिनमें जापान के खिलाफ कुछ मौके हाथ से निकल गए थे। भारतीय टीम अब एशियन गेम्स में अपने खिताब का बचाव करने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ चुकी है।
