एशियन गेम्स 2026 में मिक्स्ड कंपाउंड आर्चरी में भारत का सोना (तस्वीर क्रेडिट@chsantokhsingh)

एशियन गेम्स 2026: मिक्स्ड कंपाउंड आर्चरी में भारत का सोना, शूट-ऑफ में दक्षिण कोरिया को हराकर जीता गोल्ड

ओकाजाकी,30 सितंबर (युआईटीवी)- एशियन गेम्स 2026 में भारतीय तीरंदाजों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। कंपाउंड आर्चरी में महिला टीम के स्वर्ण पदक जीतने के बाद भारत ने मिक्स्ड कंपाउंड टीम इवेंट में भी गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। भारतीय जोड़ी ने बेहद रोमांचक फाइनल में दक्षिण कोरिया को शूट-ऑफ में मात देकर खिताब पर कब्जा किया। निर्धारित चार एंड के बाद दोनों टीमों का स्कोर 157-157 से बराबर रहा, जिसके बाद मुकाबले का फैसला शूट-ऑफ से हुआ। यहाँ भारतीय तीरंदाजों ने दबाव के बीच शानदार सटीकता दिखाई और 10-9 के अंतर से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

फाइनल में भारतीय जोड़ी के सामने दक्षिण कोरिया के पार्क जुंगयून और चोई योंगही की चुनौती थी। मुकाबला शुरुआत से ही बेहद करीबी रहा और दोनों टीमों के बीच एक-एक अंक के लिए कड़ा संघर्ष देखने को मिला। भारतीय तीरंदाजों ने शुरुआती चरण में बढ़त बनाई, लेकिन दक्षिण कोरियाई खिलाड़ियों ने लगातार दबाव बनाए रखा। आखिरी एंड तक आते-आते मुकाबला पूरी तरह बराबरी का हो चुका था। भारत को स्वर्ण पदक के लिए अपने अंतिम दो तीरों में बेहद सटीक निशाना लगाने की जरूरत थी और भारतीय खिलाड़ियों ने निर्णायक क्षण में अपना धैर्य बनाए रखा।

भारत के लिए इस मुकाबले में चिकिथा तनिपार्थी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महिला टीम के साथ स्वर्ण पदक जीतने के बाद यह आइची-नागोया एशियन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड मेडल है। भारतीय टीम ने इस जीत के साथ कंपाउंड मिक्स्ड टीम इवेंट के लिए लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 का कोटा भी हासिल कर लिया। कंपाउंड मिक्स्ड टीम इवेंट को पहली बार ओलंपिक खेलों में शामिल किया जाएगा। ऐसे में एशियन गेम्स में हासिल किया गया यह स्वर्ण पदक भारतीय कंपाउंड तीरंदाजी के लिए विशेष महत्व रखता है।

मुकाबले की शुरुआत दोनों टीमों के लिए बेहद शानदार रही। भारतीय तीरंदाजों ने शुरुआती शॉट से ही अपनी सटीकता का परिचय दिया। चिकिथा और साहिल ने अपने शुरुआती निशाने पर 10-10 अंक हासिल किए। दक्षिण कोरिया ने भी जल्द ही लय पकड़ ली और शुरुआती रोटेशन के बाद स्कोर 20-20 से बराबर हो गया। शुरुआत में ही यह साफ हो गया था कि मुकाबला बेहद छोटे अंतर से तय होने वाला है और एक भी कमजोर शॉट किसी भी टीम को भारी पड़ सकता है।

पहले एंड में भारतीय टीम को बढ़त बनाने का मौका तब मिला जब दक्षिण कोरिया के पार्क जुंगयून ने 9 अंक हासिल किए। भारत ने इसका फायदा उठाया और चिकिथा तथा साहिल ने 10-10 अंक के साथ जवाब दिया। इस प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम ने पहले एंड के अंत में 40-39 की बढ़त बना ली। हालाँकि,अंतर सिर्फ एक अंक का था,लेकिन इससे भारतीय तीरंदाजों का आत्मविश्वास जरूर बढ़ा।

दूसरे एंड में भी भारतीय जोड़ी ने अपने प्रदर्शन की निरंतरता बनाए रखी। चिकिथा और साहिल ने लगातार सटीक निशाने लगाए और अपनी बढ़त को धीरे-धीरे बढ़ाया। शुरुआती चार शॉट में दोनों भारतीय तीरंदाजों ने 10-10 अंक हासिल किए। उनकी शानदार सटीकता का नतीजा यह रहा कि मुकाबले के आधे चरण तक भारत 80-78 से आगे निकल गया। दक्षिण कोरिया लगातार भारतीय बढ़त को कम करने की कोशिश करता रहा,लेकिन भारतीय तीरंदाजों ने दबाव में गलती नहीं की।

तीसरे एंड में भी दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर जारी रही। दक्षिण कोरियाई तीरंदाजों ने वापसी की कोशिश की, लेकिन भारत ने एक बार फिर महत्वपूर्ण मौकों पर सटीक निशाना लगाया। चिकिथा और साहिल ने दो और 10 अंक हासिल किए, जिसके बाद भारत 100-98 से आगे हो गया। हालाँकि,तीसरे एंड के अंतिम चरण में भारतीय टीम के लिए कुछ मुश्किल क्षण आए। दोनों भारतीय तीरंदाज 10-रिंग का निशाना लगाने से चूक गए और इसका फायदा दक्षिण कोरिया को मिला। उसने अंतर को और कम कर दिया।

मुकाबले में अब दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था। भारत 118-117 से आगे था और दोनों टीमों के पास चार-चार तीर बाकी थे। यहाँ से मुकाबला पूरी तरह मानसिक मजबूती और सटीकता का खेल बन गया। एक तरफ भारत के पास बढ़त बनाए रखने की चुनौती थी,तो दूसरी तरफ दक्षिण कोरिया के पास एक छोटी सी गलती का फायदा उठाकर मैच का रुख बदलने का मौका था।

अंतिम एंड में मुकाबला और भी रोमांचक हो गया। दक्षिण कोरिया के पार्क जुंगयून और चोई योंगही ने अपने दोनों तीरों पर 10-10 अंक हासिल किए। इससे भारतीय टीम पर दबाव बढ़ गया। भारत को भी तुरंत जवाब देना था और चिकिथा ने 10 अंक का शानदार निशाना लगाकर टीम की उम्मीदें कायम रखीं। साहिल ने भी 10 अंक हासिल किए। भारतीय जोड़ी की इस सटीकता से भारत ने अपनी मामूली बढ़त बरकरार रखी।

मुकाबला अपने निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुका था। दक्षिण कोरिया ने आखिरी दो तीरों पर लगातार 10-10 अंक हासिल कर कुल 20 अंक जोड़ लिए और अपना स्कोर 157 तक पहुँचा दिया। अब भारत के सामने मुकाबला जीतने के लिए आखिरी दो तीरों में 20 अंक हासिल करने की चुनौती थी। भारतीय टीम को कम से कम मुकाबला बराबरी पर लाने के लिए भी दोनों तीरों से बेहतरीन प्रदर्शन की जरूरत थी।

चिकिथा ने अपना अंतिम तीर चलाया और 9 अंक हासिल किए। इस शॉट के बाद भारत पर दबाव और बढ़ गया,क्योंकि अब टीम को हार से बचने के लिए साहिल से 10 अंक की जरूरत थी। निर्णायक क्षण में साहिल ने जबरदस्त धैर्य दिखाया और बिल्कुल सटीक 10 अंक का निशाना लगाया। उनके इस शॉट ने भारत का स्कोर 157 तक पहुँचा दिया और मुकाबला 157-157 की बराबरी पर आ गया। इसके बाद स्वर्ण पदक का फैसला शूट-ऑफ से होना था।

शूट-ऑफ में प्रत्येक तीर का महत्व कई गुना बढ़ गया। भारत और दक्षिण कोरिया के तीरंदाजों को एक-एक करके निशाना लगाना था। चिकिथा ने शुरुआत करते हुए 10 अंक हासिल किए। दक्षिण कोरिया की ओर से पार्क जुंगयून ने भी 10 अंक के साथ जवाब दिया। इसके बाद भारतीय टीम के लिए साहिल ने एक और महत्वपूर्ण तीर चलाया और 10 अंक हासिल कर भारत को निर्णायक बढ़त की स्थिति में पहुँचा दिया।

अब दक्षिण कोरिया की उम्मीदें चोई योंगही के अंतिम शॉट पर टिकी थीं। उन्हें अपनी टीम को मुकाबले में बनाए रखने के लिए बेहद सटीक निशाना लगाना था,लेकिन वह सिर्फ 9 अंक ही हासिल कर सकीं। इसके साथ ही भारत ने शूट-ऑफ में 20-19 के अंतर से जीत दर्ज कर ली और स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।

इस जीत के साथ भारत ने एशियन गेम्स 2026 में अपना आठवां स्वर्ण पदक हासिल किया। भारतीय दल के कुल पदकों की संख्या भी 54 तक पहुँच गई,जिसमें आठ स्वर्ण, 21 रजत और 25 कांस्य पदक शामिल हैं। कंपाउंड मिक्स्ड टीम में मिली यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि इसके साथ भारत ने लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के उस इवेंट का कोटा हासिल कर लिया है,जो पहली बार ओलंपिक कार्यक्रम का हिस्सा बनने जा रहा है।

भारतीय तीरंदाजों ने इस मुकाबले में शुरुआत से अंत तक जिस तरह दबाव का सामना किया,वह उनकी मजबूत मानसिकता और सटीक निशानेबाजी को दर्शाता है। मुकाबला 157-157 से बराबर होने के बाद शूट-ऑफ में भी भारतीय जोड़ी ने अपनी लय नहीं खोई। अंतिम क्षणों में 10 अंक हासिल करना और विरोधी खिलाड़ी की गलती का फायदा उठाना भारत की जीत का निर्णायक पहलू रहा। महिला टीम के स्वर्ण के बाद मिक्स्ड कंपाउंड टीम का गोल्ड भारत के लिए तीरंदाजी में एक और बड़ी उपलब्धि बन गया है।