नागोया,29 सितंबर (युआईटीवी)- एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स टीम का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। महिलाओं की 4×400 मीटर रिले में भारत ने मंगलवार को स्वर्ण पदक अपने नाम किया। किरण पहल, एमआर पूवम्मा, प्राची और विथ्या रामराज की चौकड़ी ने 3 मिनट 29.69 सेकंड का समय निकालते हुए फाइनल में पहला स्थान हासिल किया। इस जीत में विथ्या रामराज की भूमिका बेहद अहम रही। उन्होंने एंकर लेग में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत की बढ़त को बरकरार रखा और टीम को स्वर्ण पदक तक पहुंचाया।
भारत की टीम ने फाइनल में लेन छह से दौड़ की शुरुआत की थी। शुरुआती चरण में किरण पहल को टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई। किरण ने तेज शुरुआत की, लेकिन पहले लेग के अंत में भारतीय टीम तीसरे स्थान पर थी। इसके बाद बैटन एमआर पूवम्मा के हाथों में आया। अनुभवी धाविका ने अपनी गति और अनुभव का शानदार इस्तेमाल करते हुए भारत को फिर से पदक की दौड़ में मजबूत स्थिति में ला दिया। पूवम्मा के प्रयास ने टीम को आगे की चुनौती के लिए बेहतर स्थिति प्रदान की।
इसके बाद बैटन प्राची के पास पहुँचा। प्राची इससे पहले महिलाओं की 400 मीटर दौड़ में व्यक्तिगत कांस्य पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित कर चुकी थीं। उन्होंने रिले के तीसरे चरण में संतुलित और प्रभावी दौड़ लगाई। प्राची ने भारतीय टीम को अग्रणी धावकों के करीब बनाए रखा और यह सुनिश्चित किया कि अंतिम चरण में बैटन विथ्या रामराज को ऐसी स्थिति में मिले, जहाँ भारत स्वर्ण पदक के लिए मजबूती से चुनौती पेश कर सके।
रिले का आखिरी चरण भारतीय प्रशंसकों के लिए सबसे रोमांचक रहा। बैटन सँभालते ही विथ्या रामराज ने अपनी गति बढ़ानी शुरू की। शुरुआत में भारत को आगे चल रही टीमों से कुछ दूरी तय करनी थी, लेकिन विथ्या ने धीरे-धीरे यह अंतर कम करना शुरू कर दिया। उन्होंने दौड़ के शुरुआती हिस्से में अपनी लय हासिल की और फिर 200 मीटर के आसपास अपनी गति में जबरदस्त इजाफा किया। उनकी तेज रफ्तार ने भारत को पदक की मजबूत स्थिति में पहुँचा दिया।
बहरीन की धाविका साल्वा ईद नासर ने भी अंतिम चरण में भारत को कड़ी चुनौती देने की कोशिश की। उन्होंने विथ्या से अंतर कम करने के लिए पूरी ताकत लगा दी,लेकिन भारतीय एंकर ने दबाव के बीच अपना संयम बनाए रखा। विथ्या ने फाइनल लेग के शुरुआती हिस्से में बनाई बढ़त का शानदार तरीके से बचाव किया और अंतिम मीटरों में भी अपनी गति को नियंत्रित रखते हुए सबसे पहले फिनिश लाइन पार की। उनके इस प्रदर्शन ने भारत को स्वर्ण पदक दिला दिया।
भारतीय टीम ने 3:29.69 सेकंड के समय के साथ पहला स्थान हासिल किया। बहरीन की टीम 3:30.21 सेकंड के समय के साथ दूसरे स्थान पर रही। दोनों टीमों के बीच केवल 0.52 सेकंड का अंतर रहा,जिससे मुकाबले की कड़ी प्रतिस्पर्धा का अंदाजा लगाया जा सकता है। चीन ने 3:31.02 सेकंड के समय के साथ कांस्य पदक जीता। जापान 3:31.44 सेकंड के साथ चौथे स्थान पर रहा। इसके बाद वियतनाम, कजाकिस्तान, श्रीलंका और चीनी ताइपे की टीमें रहीं।
विथ्या रामराज के लिए यह स्वर्ण पदक इसलिए भी खास रहा क्योंकि एशियन गेम्स 2026 में यह उनका तीसरा पदक है। इससे पहले वह अलग-अलग स्पर्धाओं में रजत और कांस्य पदक जीत चुकी थीं। इस तरह उन्होंने इस प्रतियोगिता में पदकों की हैट्रिक पूरी की। 4×400 मीटर रिले का स्वर्ण उनके शानदार अभियान का सबसे यादगार हिस्सा बन गया।
विथ्या के लिए एशियन गेम्स का यह सफर खास तौर पर इसलिए उल्लेखनीय रहा क्योंकि उन्होंने रिले फाइनल से ठीक एक दिन पहले महिलाओं की 400 मीटर बाधा दौड़ में भी शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने इस स्पर्धा में लंबे समय से कायम राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़कर अपनी क्षमता का परिचय दिया था। इसके बाद रिले में स्वर्ण पदक जीतना उनके लिए प्रतियोगिता के शानदार समापन के रूप में सामने आया।
विथ्या की खासियत इस प्रतियोगिता में केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं रही। रिले में उन्होंने टीम के लिए उस समय जिम्मेदारी सँभाली,जब मुकाबला बेहद करीबी था। शुरुआती तीन चरणों में किरण पहल, एमआर पूवम्मा और प्राची ने भारत को मजबूत स्थिति में पहुँचाया और अंतिम जिम्मेदारी विथ्या पर थी। उन्होंने इस जिम्मेदारी को पूरी तरह निभाते हुए टीम को शीर्ष स्थान तक पहुँचाया।
महिलाओं की 4×400 मीटर रिले में भारत की यह जीत टीमवर्क का भी बेहतरीन उदाहरण रही। रिले में सिर्फ एक धाविका का प्रदर्शन पर्याप्त नहीं होता,बल्कि चारों खिलाड़ियों के बीच सही तालमेल, बैटन का समय पर हस्तांतरण और दबाव के बीच गति बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है। भारतीय चौकड़ी ने फाइनल में इन सभी पहलुओं को प्रभावी ढंग से अंजाम दिया। शुरुआती चरण में तीसरे स्थान से आगे बढ़ते हुए टीम ने अंततः स्वर्ण पदक पर कब्जा किया।
किरण पहल ने शुरुआती लेग में भारत को मुकाबले में बनाए रखा,जबकि एमआर पूवम्मा के अनुभव ने दूसरे चरण में टीम को मजबूती दी। प्राची ने तीसरे चरण में भारत की स्थिति को संभाला और अंतिम चरण के लिए विथ्या को चुनौतीपूर्ण लेकिन मजबूत स्थिति में बैटन सौंपा। इसके बाद विथ्या ने अपनी गति का इस्तेमाल करते हुए भारत को जीत तक पहुँचाया।
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि ट्रैक स्पर्धाओं में भारत के खिलाड़ियों ने लगातार अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। महिलाओं की रिले टीम की यह सफलता व्यक्तिगत और टीम स्पर्धाओं में भारतीय एथलीटों के अच्छे प्रदर्शन को दर्शाती है। खास तौर पर विथ्या रामराज का प्रदर्शन इस अभियान की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा।
तीन पदकों के साथ एशियन गेम्स का सफर समाप्त करने वाली विथ्या ने प्रतियोगिता में अपनी निरंतरता और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता दिखाई। व्यक्तिगत स्पर्धा में राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने से लेकर रिले के निर्णायक चरण में टीम को स्वर्ण दिलाने तक उनका प्रदर्शन यादगार रहा। 4×400 मीटर रिले में फिनिश लाइन पार करते समय भारतीय टीम की बढ़त बनाए रखना उनके अभियान का शानदार अंत साबित हुआ। भारत के लिए यह स्वर्ण पदक और विथ्या के लिए तीन पदकों वाला सफर एशियन गेम्स 2026 में एथलेटिक्स के यादगार पलों में दर्ज हो गया।
