नई दिल्ली,18 अगस्त (युआईटीवी)- नई दिल्ली में शुरू हुई बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप के पहले ही दिन भारतीय बैडमिंटन के युवा सितारे आयुष शेट्टी ने ऐसा प्रदर्शन किया,जिसने पूरे टूर्नामेंट का रोमांच बढ़ा दिया। विश्व चैंपियनशिप में पदार्पण कर रहे आयुष ने पुरुष एकल के पहले दौर में दुनिया के नंबर-1 और मौजूदा विश्व चैंपियन चीन के शी यू की को तीन गेम तक चले बेहद रोमांचक मुकाबले में 21-14, 13-21, 21-19 से हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया। यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि आयुष इससे पहले चीनी खिलाड़ी के खिलाफ अपने तीनों मुकाबले हार चुके थे। इनमें बैडमिंटन एशियाई चैंपियनशिप का फाइनल भी शामिल था।
21 वर्षीय आयुष ने दुनिया के शीर्ष खिलाड़ी के खिलाफ जिस आत्मविश्वास और धैर्य का प्रदर्शन किया,वह उनके बढ़ते कद का संकेत है। खास बात यह रही कि मुकाबला नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में खेला गया,जहाँ घरेलू दर्शकों का जबरदस्त समर्थन भारतीय खिलाड़ी के साथ था। मुकाबले के बाद आयुष ने भी माना कि दर्शकों की जोरदार हौसलाअफजाई ने उन्हें निर्णायक क्षणों में अतिरिक्त ऊर्जा दी।
मुकाबले की शुरुआत से ही आयुष ने आक्रामक तेवर दिखाए। उन्होंने टॉप सीड शी यू की को दबाव में रखते हुए शुरुआती बढ़त हासिल की और पहले गेम में लगातार अपना दबदबा बनाए रखा। भारतीय खिलाड़ी ने नेट पर तेजी दिखाई और शॉट्स में विविधता रखते हुए चीनी खिलाड़ी को सहज होने का मौका नहीं दिया। शुरुआती अंकों में ही आयुष ने 3-0 की बढ़त बना ली। इसके बाद उन्होंने अपनी लय बरकरार रखी और मध्यांतर तक 11-5 की मजबूत बढ़त हासिल कर ली।
मध्यांतर के बाद भी आयुष ने अपने खेल की गति कम नहीं होने दी। शी यू की ने वापसी की कोशिश जरूर की,लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने अपने आक्रामक खेल और सटीक शॉट्स से बढ़त बनाए रखी। आयुष ने पहला गेम 21-14 से अपने नाम कर लिया और दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी को शुरुआत में ही बड़ा झटका दे दिया। विश्व चैंपियन के खिलाफ पहला गेम जीतने के बाद स्टेडियम में मौजूद भारतीय प्रशंसकों का उत्साह और बढ़ गया।
हालाँकि,दूसरे गेम में शी यू की ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए मुकाबले में वापसी की। चीनी खिलाड़ी ने शुरुआत में ही आक्रामक रवैया अपनाया और आयुष पर दबाव बनाने की कोशिश की। दोनों खिलाड़ियों के बीच कई बार लंबी रैलियाँ देखने को मिलीं और स्कोर में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहा। एक समय दोनों खिलाड़ी बराबरी पर थे, लेकिन इसके बाद शी यू की ने धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर ली।
चीनी खिलाड़ी ने मध्यांतर तक 11-9 की बढ़त बना ली थी। इसके बाद उन्होंने लगातार दबाव बनाए रखा और अपनी बढ़त को बढ़ाते हुए पाँच अंकों तक पहुँचा दिया। आयुष ने कुछ शानदार अंक जरूर हासिल किए,लेकिन इस गेम में शी यू की की गति और आक्रामकता का सामना करना उनके लिए मुश्किल साबित हुआ। अंततः चीनी खिलाड़ी ने दूसरा गेम 21-13 से जीतकर मुकाबले को 1-1 की बराबरी पर ला दिया।
अब पूरा मुकाबला निर्णायक तीसरे गेम पर आ गया था और यहीं आयुष ने अपनी मानसिक मजबूती का शानदार परिचय दिया। तीसरे गेम की शुरुआत में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली,लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने जल्द ही अपनी रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू करना शुरू कर दिया। आयुष ने लगातार अंक हासिल करते हुए 6-3 और फिर 9-4 की बढ़त बना ली।
मध्यांतर तक आयुष ने 11-5 की शानदार बढ़त हासिल कर ली थी। साइड बदलने के बाद भी भारतीय खिलाड़ी ने अपना संयम नहीं खोया और बढ़त को 14-5 तक पहुँचा दिया। एक समय स्कोर 16-5 था और ऐसा लग रहा था कि आयुष मुकाबला आसानी से अपने नाम कर लेंगे,लेकिन दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी ने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे वापसी शुरू कर दी।
शी यू की ने आयुष की बढ़त को पहले छह और फिर चार अंकों तक सीमित कर दिया। जैसे-जैसे अंतर कम होता गया,मुकाबले का दबाव भी बढ़ता गया। आयुष के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण थी,क्योंकि सामने मौजूदा विश्व चैंपियन था और वह लगातार वापसी कर रहा था। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ी ने जल्दबाजी नहीं की और अपनी रणनीति पर भरोसा बनाए रखा।
निर्णायक क्षण 20-15 के स्कोर पर आया। आयुष मैच प्वाइंट पर थे,लेकिन शी यू की ने लगातार चार अंक बचाकर मुकाबले को बेहद रोमांचक बना दिया। स्टेडियम में मौजूद दर्शकों की सांसें थम गईं और दोनों खिलाड़ियों के बीच हर रैली बेहद महत्वपूर्ण हो गई। दबाव के इस दौर में आयुष ने शानदार संयम दिखाया। उन्होंने अगला महत्वपूर्ण अंक हासिल किया और निर्णायक गेम 21-19 से अपने नाम कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने विश्व के नंबर-1 खिलाड़ी को हराकर अपने विश्व चैंपियनशिप अभियान की शुरुआत यादगार बना दी।
यह शी यू की के खिलाफ आयुष की चार मुकाबलों में पहली जीत है। इससे पहले दोनों खिलाड़ियों के बीच तीन मुकाबले हुए थे और हर बार चीनी खिलाड़ी विजयी रहा था। इनमें इस साल अप्रैल में खेली गई बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप का फाइनल भी शामिल था, जहाँ शी यू की ने आयुष को एकतरफा अंदाज में हराया था। उस हार के बाद आयुष के लिए यह जीत विशेष महत्व रखती है,क्योंकि उन्होंने उसी खिलाड़ी के खिलाफ विश्व चैंपियनशिप के सबसे बड़े मंच पर शानदार वापसी की।
आयुष ने जीत के बाद बताया कि उन्होंने पिछले मुकाबलों का विश्लेषण किया था और इस बार रणनीति को बेहतर तरीके से लागू किया। उनका कहना था कि पिछली भिड़ंत में वह मानसिक रूप से काफी निराश हुए थे,लेकिन इस बार उनके पास स्पष्ट योजना थी और वह पूरे मैच में उस पर टिके रहे। घरेलू दर्शकों के समर्थन को भी उन्होंने जीत की ऊर्जा का बड़ा स्रोत बताया।
इस जीत के साथ आयुष ने विश्व चैंपियनशिप में अपने पदार्पण को ऐतिहासिक बना दिया है। दूसरी ओर,मौजूदा चैंपियन शी यू की का खिताब बचाने का अभियान पहले ही दौर में समाप्त हो गया। दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी के खिलाफ यह जीत आयुष के लिए केवल एक मैच की सफलता नहीं,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन में उनकी बढ़ती पहचान का बड़ा संकेत भी है।
विश्व चैंपियनशिप के पहले दिन भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन कुल मिलाकर उत्साह बढ़ाने वाला रहा। महिला एकल में पीवी सिंधु ने भी जीत के साथ शुरुआत की,जबकि महिला युगल में त्रेसा जॉली और गायत्री गोपीचंद की जोड़ी ने भी अपने अभियान का शानदार आगाज किया। ऐसे में आयुष शेट्टी की ऐतिहासिक जीत ने भारतीय दल के लिए टूर्नामेंट की शुरुआत को और खास बना दिया है।
अब आयुष की नजर टूर्नामेंट के अगले दौर पर होगी। दुनिया के नंबर-1 और मौजूदा विश्व चैंपियन को हराने के बाद उनका आत्मविश्वास निश्चित रूप से बढ़ा होगा। हालाँकि,विश्व चैंपियनशिप में आगे की राह आसान नहीं होने वाली है,लेकिन पहले ही मुकाबले में हासिल की गई यह जीत भारतीय युवा शटलर के लिए एक बड़ा मंच तैयार कर चुकी है। आयुष ने जिस तरह दबाव के बीच अंतिम अंक तक धैर्य बनाए रखा,उससे यह साफ है कि वह केवल प्रतिभाशाली खिलाड़ी ही नहीं,बल्कि बड़े मुकाबलों में मानसिक मजबूती दिखाने की क्षमता भी रखते हैं। यही गुण उन्हें विश्व बैडमिंटन के शीर्ष खिलाड़ियों की कतार में आगे ले जाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
